पाकुड़ जिले के तलवाडांगा स्थित महाकाल शक्तिपीठ में दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं। शारदीय नवरात्रि से यहां मां दुर्गा की आराधना शुरू होगी।

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इस शक्तिपीठ में मां दुर्गा की 1008 भुजा वाली अनोखी प्रतिमा स्थापित है। यहां शिव और शक्ति की एक साथ पूजा होती है क्योंकि दुर्गा प्रतिमा के सामने एक विशाल शिवलिंग स्थापित किया गया है।

जमशेदपुर में परसुडीह शिव मंदिर परिसर में दिखेगा महाशक्ति का अनोखा रूप।

जमशेदपुर में परसुडीह शिव मंदिर परिसर में दिखेगा महाशक्ति का अनोखा रूप।

जमशेदपुर में 3.50 लाख रुपए की लागत ‎से बन रही प्रतिमा

इसी तर्ज पर जमशेदपुर के परसुडीह स्थित श्री शिव मंदिर परिसर‎ में 108 मुख और 121 हाथों‎ वाली मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित ‎होगी। यह शहर ही नहीं, पूरे झारखंड ‎में पहला मौका है। अपने इस‎ अलौकिक और विशेष स्वरूप के‎ कारण यह प्रतिमा इस बार श्रद्धालुओं‎ के लिए शहर में मुख्य आकर्षण का ‎केंद्र रहेगी।‎

लगभग 3.50 लाख रुपए की लागत ‎से बन रही इस प्रतिमा का निर्माण‎ पश्चिम बंगाल के कारीगरों द्वारा किया‎ जा रहा है, जबकि इसके मुख्य‎ मूर्तिकार कीताडीह निवासी उपेंद्र‎ प्रजापति हैं।‎

मध्यप्रदेश के जबलपुर में (मदन महल स्टेशन के पास) में भी नवरात्रि उत्सव के दौरान 1000/1008 हाथों वाले स्वरूप में मां दुर्गा की विशेष प्रतिमा बनाई जा चुकी है।

यह शक्तिपीठ 1996 में स्वामी सिद्धार्थ परमहंस महाराज ने स्थापित किया था

वहीं, पाकुड़ जिले के तलवाडांगा स्थित मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ भगवान गणेश, कार्तिक, सरस्वती और लक्ष्मी की मूर्तियां हैं। मंदिर के निचले तल पर मां के नौ स्वरूपों के स्थान बने हैं।

जहां देवी की कई प्रतिमा स्थापित है। इसके अलावा नौ ग्रह भी स्थापित किए गए हैं इसके अलावा भगवान बजरंगबली की भी प्रतिमा स्थापित की गई है।

यहां शिव और शक्ति की एक साथ पूजा होती है।

यहां शिव और शक्ति की एक साथ पूजा होती है।

नवरात्रि के पहले दिन कलश यात्रा के साथ पूजा शुरू होती है। षष्ठी से दशमी तक भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं।

यह शक्तिपीठ 1996 में स्वामी सिद्धार्थ परमहंस महाराज ने स्थापित किया था। वहीं, परमहंस महाराज के द्वारा देश के कई स्थानों में इस प्रकार के मंदिर स्थापित किए गए हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और ओडिशा,पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से श्रद्धालु यहां आते हैं।

मंदिर परिसर में रुद्राक्ष और कल्पतरु के वृक्ष हैं, जो आसपास के इलाकों में दुर्लभ हैं। संरक्षक अनुग्रहित प्रसाद साहा और अध्यक्ष योगेंद्र ठाकुर ने भक्तों की गहरी आस्था बताई।