जयपुर के परकोटे के नीचे जयपुर मेट्रो के विस्तार को लेकर शनिवार को बड़ा कदम उठाया गया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गलता गेट पर टनल बोरिंग मशीन (TBM) का शुभारंभ कर मेट्रो फेज-1C के भूमिगत सुरंग निर्माण की शुरुआत की।

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इस परियोजना के तहत बड़ी चौपड़ से गलता गेट होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। करीब 1,511 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में 3.80 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाएगा।

इसमें लगभग 3 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक और 0.8 किलोमीटर एलिवेटेड रैंप शामिल होगा। मेट्रो प्रबंधन का लक्ष्य है कि TBM जून-जुलाई 2027 तक बड़ी चौपड़ पहुंच जाए। इसके बाद सुरंग को मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। पूरी परियोजना मार्च 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने TBM लॉन्च की।

मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने TBM लॉन्च की।

परकोटे के नीचे सुरंग बनाना बड़ी चुनौती

इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती ऐतिहासिक परकोटे के नीचे सुरंग बनाना है। इस क्षेत्र में घनी आबादी, पुराने भवन, ऐतिहासिक धरोहरें, संकरी सड़कें और व्यस्त बाजार हैं। ऐसे में सड़क की खुदाई करके मेट्रो ट्रैक बनाने से यातायात, व्यापारिक गतिविधियों और आसपास की इमारतों पर असर पड़ सकता था।

इसको ध्यान में रखते हुए सुरंग निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मशीन जमीन के भीतर खुदाई करने के साथ सुरंग की दीवारों पर कंक्रीट सेगमेंट भी लगाएगी। इससे सड़क की सतह पर बड़े स्तर पर खुदाई करने की जरूरत नहीं होगी और बाजारों में सामान्य गतिविधियां जारी रखने में मदद मिलेगी।

मेट्रो प्रबंधन के अनुसार- निर्माण के दौरान आस&पास की इमारतों और संरचनाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। सुरंग का निर्माण जमीन के काफी नीचे किया जाएगा, जबकि बिजली, पानी और अन्य उपयोगिता सेवाओं की लाइन अपेक्षाकृत कम गहराई पर होती हैं। ऐसे में निर्माण के दौरान इन व्यवस्थाओं और ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर काम किया जाएगा।

2.25 किलोमीटर लंबी दो समानांतर भूमिगत सुरंग बनेगी

जयपुर मेट्रो फेज-1C के तहत बड़ी चौपड़ से गलता गेट होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसमें लगभग 2.25 किलोमीटर लंबी दो समानांतर भूमिगत सुरंग बनाई जाएंगी।

आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए दोनों सुरंगों के बीच सात क्रॉस पैसेज भी बनाए जाएंगे। परियोजना में दो स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें गलता गेट स्टेशन भूमिगत होगा, जबकि ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन एलिवेटेड बनाया जाएगा।

गलता गेट स्टेशन करीब 200 मीटर लंबा और 24 मीटर चौड़ा होगा। इसका ट्रैक स्तर जमीन से लगभग 15 मीटर नीचे रहेगा। इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद बड़ी चौपड़ से आगे मेट्रो सेवा का विस्तार संभव होगा। इससे परकोटे के पूर्वी हिस्से और ट्रांसपोर्ट नगर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को मेट्रो का विकल्प मिलेगा।

मुख्य सचिव के साथ वैभव गालरिया भी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव के साथ वैभव गालरिया भी मौजूद रहे।

रामगंज चौपड़ की जगह गलता गेट को बनाया स्टेशन

फेज-1C की योजना में पहले रामगंज चौपड़ स्टेशन प्रस्तावित था, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने कॉरिडोर की उपयोगिता और संभावित यात्रियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से दोबारा सर्वे कराया। तकनीकी परीक्षण और आर्थिक लाभ के विश्लेषण के बाद रामगंज चौपड़ के स्थान पर गलता गेट को स्टेशन बनाने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य मेट्रो कॉरिडोर को ज्यादा आबादी और प्रमुख स्थलों से जोड़ना है।

जून-जुलाई 2027 तक बड़ी चौपड़ पहुंचेगी TBM

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री का जयपुर मेट्रो विस्तार ड्रीम प्रोजेक्ट है और फेज-1C के तहत सुरंग निर्माण शुरू होना महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बड़ी चौपड़ से गलता गेट के बीच भूमिगत सुरंग बनाना इंजीनियरिंग की बड़ी चुनौती है, जिसे निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा किया जाएगा।

फेज-1C और 1D से बनेगा पूर्व-पश्चिम मेट्रो कॉरिडोर

जयपुर मेट्रो का फेज-1C परकोटे से होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक कनेक्टिविटी बढ़ाएगा। वहीं, फेज-1D के पूरा होने के बाद पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच मेट्रो नेटवर्क को और विस्तार मिलने की संभावना है।

इन परियोजनाओं के जरिए ट्रांसपोर्ट नगर से अजमेर रोड की दिशा तक मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन के विकल्प बढ़ेंगे और सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।