
06 सितंबर 2026, चंडीगढ़: हरियाणा के गन्ना किसानों को मशीनीकरण पर सब्सिडी, 30 सितंबर तक करें आवेदन – हरियाणा के गन्ना किसानों के लिए राज्य सरकार ने कृषि यंत्रों और आधुनिक बिजाई तकनीक पर सब्सिडी देने की योजना का ऐलान किया है। इच्छुक किसान गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना के तहत 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।राज्य के कृषि विभाग के मुताबिक यह अनुदान यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, रोहतक, सोनीपत, जींद, पलवल समेत अन्य अधिसूचित गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को मिलेगा। गन्ना हरियाणा की एक प्रमुख नकदी फसल है और इसकी खेती लंबी अवधि की होने के कारण मजदूरी का खर्च ज्यादा आता है, जिसे कम करना इस योजना का मुख्य मकसद है।
किन यंत्रों और तकनीकों पर मिलेगा अनुदान
योजना के तहत किसानों को 4 फीट की कतार में बिजाई और सिंगल-बड विधि जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा पावर वीडर, रोटावेटर, गन्ना कटर और स्प्रेयर जैसे यंत्रों की खरीद पर भी सब्सिडी दी जाएगी।विभाग का कहना है कि आधुनिक बिजाई विधियों से प्रति एकड़ पौधों की संख्या बढ़ती है और निराई-गुड़ाई पर मजदूरी का खर्च कम होता है। गन्ना कटर जैसे यंत्र कटाई के समय समय और लागत दोनों बचाते हैं, जिससे किसान को प्रति एकड़ शुद्ध मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलती है।सिंगल-बड विधि में गन्ने के एक-एक आंख (बड) वाले टुकड़ों से पौधे तैयार किए जाते हैं, जिससे बीज की मात्रा कम लगती है और अंकुरण दर बेहतर रहती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक खासकर बीज की लागत घटाने में कारगर मानी जाती है।
आवेदन कैसे करें और जरूरी तारीखें
किसान agriharyana.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ग्रीष्मकालीन गन्ना बिजाई के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है, जबकि शरदकालीन (पतझड़) बिजाई के लिए किसान 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि से जुड़े दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजी जाएगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है।किसान चाहें तो अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर भी आवेदन प्रक्रिया की जानकारी और मदद ले सकते हैं। विभाग ने किसानों से समय रहते आवेदन करने की अपील की है, ताकि बिजाई सीजन में ही यंत्र और तकनीक का लाभ मिल सके।गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है और इसकी बिजाई से लेकर कटाई तक मजदूरों की जरूरत लगातार बनी रहती है। हाल के वर्षों में खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता घटने और मजदूरी बढ़ने के चलते किसानों के लिए मशीनीकरण अपनाना लगभग जरूरी हो गया है। ऐसे में राज्य सरकार की यह सब्सिडी किसानों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को काफी हद तक कम कर सकती है।कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो किसान कपास या अन्य फसलों के लिए पहले से चल रहीं दूसरी सब्सिडी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, वे भी गन्ने की इस योजना के लिए अलग से पात्र होंगे, बशर्ते वे अधिसूचित क्षेत्र के हों। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे एक साथ चल रही सभी योजनाओं की जानकारी अपने कृषि विभाग कार्यालय से जरूर लें।
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