अनुग्रह नारायण शाही | देवरिया1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

देवरिया मेडिकल कॉलेज में कार्य बहिष्कार, बिना इलाज लौटे मरीज।
देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाएं उस समय चरमरा गईं, जब चार महीने से मानदेय न मिलने से नाराज 300 से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया। नर्सिंग स्टाफ, मल्टीपरपज वर्कर और तकनीकी कर्मचारियों के अचानक काम छोड़ने से अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हो गई। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें लग गईं, ओपीडी सेवाएं धीमी पड़ गईं और तीमारदार घंटों परेशान होते रहे। कर्मचारियों ने मुख्य गेट पर प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन से बकाया भुगतान की मांग उठाई।
मुख्य गेट से कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन
मंगलवार सुबह महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के 300 से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारी मुख्य गेट पर एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया। कर्मचारियों का कहना था कि पिछले चार महीने से उन्हें मानदेय नहीं मिला है, जिसके कारण आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
प्रदर्शन की सूचना पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. एच.के. मिश्रा मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी भुगतान की स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद सभी कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां सुबह करीब 9:50 बजे जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने कर्मचारियों से लिखित प्रार्थना पत्र लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के साथ वार्ता कर भुगतान प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया।

सुबह से ही कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर नारे बाजी शुरू कर दी।
वेतन न मिलने से आर्थिक संकट गहराया
मेडिकल कॉलेज में दो आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से 300 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें मल्टीपरपज वर्कर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि तीन माह का मानदेय बकाया है और चौथा महीना भी शुरू हो चुका है।
उनका कहना है कि कम वेतन में किसी तरह परिवार चलाने वाले कर्मचारियों के सामने अब गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की स्कूल और कोचिंग फीस जमा नहीं हो पा रही है। घर का राशन, इलाज और अन्य जरूरी खर्च पूरे करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों ने बताया कि ड्यूटी पर आने-जाने के लिए भी उन्हें उधार लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि समय पर वेतन मिलना उनका अधिकार है, लेकिन लगातार हो रही देरी ने उनका जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

भर्ती मरीजों को इलाज नहीं मिलने से वह परेशान हो रही हैं।
अस्पताल की व्यवस्था चरमराई
कार्य बहिष्कार का सबसे ज्यादा असर मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और मल्टीपरपज वर्करों के काम पर नहीं आने से कई विभागों की कार्यप्रणाली प्रभावित रही। अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर के बाहर सुबह से मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर मरीज घंटों पर्ची बनवाने के लिए लाइन में खड़े रहे।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया धीमी होने के कारण ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित रहीं। मरीजों ने बताया कि समय पर पर्ची नहीं बनने से डॉक्टरों को दिखाने में देरी हुई। अस्पताल परिसर में कुछ समय तक अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारियों की बड़ी संख्या के कारण सेवाएं पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकीं।

रात से इलाज का इंतजार कर रही महिला को परिजन वापस ले गए।
120 सुरक्षा गार्ड भी वेतन के इंतजार में
मानदेय संकट केवल आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे करीब 120 सुरक्षा गार्ड भी पिछले तीन महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। इनमें पूर्व सैनिक, सुपरवाइजर तथा महिला और पुरुष सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। उनका कहना है कि नियमित ड्यूटी करने के बावजूद वेतन न मिलने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है।
इस बीच मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने आश्वासन दिया कि बकाया मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही कर्मचारियों का भुगतान कराया जाएगा। वहीं जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने भी संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसियों और मेडिकल कॉलेज प्रशासन से वार्ता कर समस्या के शीघ्र समाधान का भरोसा दिया है। हालांकि कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा।
.