10 घंटे पहले
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देश में चीनी की कीमतों को काबू करने के लिए केंद्र सरकार ने इंपोर्ट के नियमों में ढील दी है। सरकार ने विदेशों से मंगाई जाने वाली कच्ची चीनी को प्रोसेस करने और उसे घरेलू बाजार में बेचने की समय-सीमा बढ़ा दी है।
अब इंपोर्टर्स को शिपमेंट भारत पहुंचने की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा। इससे पहले सरकार ने इसके लिए 31 अक्टूबर की एक फिक्स डेडलाइन तय की थी।
शिपिंग और ट्रांसपोर्टेशन में हो रही देरी को लेकर शुगर इंडस्ट्री ने चिंता जताई थी, जिसके बाद डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने नियमों में बदलाव का यह फैसला लिया है।

ब्राजील के बंदरगाहों पर जाम, शिपमेंट में देरी से फैसला लिया
सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री या कम ड्यूटी वाले इंपोर्ट को मंजूरी दी थी।
पहले के नियम के मुताबिक, मिलों को इस चीनी को रिफाइन करके 31 अक्टूबर तक बाजार में बेचना जरूरी था।
हाल ही में हुई बैठक में इंडस्ट्री ने मंत्रालयों को बताया कि ब्राजील के बंदरगाहों पर जाम है। इसके अलावा, भारत सरकार से क्वांटिटी अप्रूवल मिलने के बाद भी कार्गो को भारत पहुंचने में 40 दिन लग रहे हैं। ऐसे में 31 अक्टूबर तक प्रोसेसिंग और बिक्री का काम पूरा करना मुमकिन नहीं था।

शुगर मिलों ने ऑनलाइन आवेदन शुरू किए
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनवारे ने कहा कि इस राहत के बाद अब देश की ज्यादा से ज्यादा चीनी मिलें इंपोर्ट के लिए आवेदन करने के लिए आगे आएंगी। मिलों ने पहले ही DGFT के ऑनलाइन पोर्टल पर रॉ शुगर इंपोर्ट के लिए एप्लीकेशन देना शुरू कर दिया है।
अक्टूबर के अंत तक भारत पहुंचेगी चीनी
DGFT को मिलों के आवेदनों की जांच करने और उन्हें कोटा अलॉट करने में 2 से 3 दिन का समय लग सकता है। इसके बाद चीनी मिलें सितंबर के मध्य तक विदेशी सप्लायर्स के साथ कांट्रैक्ट साइन कर लेंगी।
अगर ब्राजील या अन्य देशों के पोर्ट पर ज्यादा लंबा जाम नहीं रहा, तो इंपोर्टेड चीनी की पहली बड़ी खेप अक्टूबर के तीसरे हफ्ते तक भारतीय तटों पर पहुंच जाएगी।
चीनी रिटेल मार्केट में 64 रुपए किलो बिक रही
सरकार ने यह सारे कदम देश में चीनी की आसमान छूती कीमतों को रोकने के लिए उठाए हैं। मंगलवार को देश के प्रमुख खुदरा बाजारों में चीनी की औसत कीमत करीब ₹64 प्रति किलोग्राम पर बनी रही।
हालांकि, पिछले कुछ दिनों में सरकार द्वारा 10 लाख टन इंपोर्ट की मंजूरी देने और जमाखोरों के खिलाफ सख्त एक्शन के कारण मिल स्तर पर (एक्स-मिल रेट) कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन रिटेल मार्केट में आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलना अभी बाकी है। नए स्टॉक के बाजार में आने के बाद रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद है।
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