पठानकोट के सभी 31 आम आदमी क्लीनिकों में तैनात डॉक्टरों, फार्मेसी अफसरों और क्लीनिक असिस्टेंटों समेत कुल 96 कर्मचारी मंगलवार से हड़ताल पर चले गए हैं। बुधवार को भी कर्मचारियों ने सिविल सर्जन दफ्तर के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

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क्लीनिकों पर ताले लटके रहने के कारण इलाज कराने पहुंचे मरीजों को उमस और गर्मी में बिना इलाज बैरंग लौटना पड़ा। कर्मियों की हड़ताल के कारण रोजाना होने वाली लगभग 1800 मरीजों की ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही।

मरीजों को न तो डॉक्टरों का चेकअप मिल सका और न ही क्लीनिकों में होने वाले 47 तरह के फ्री टेस्ट व 80 प्रकार की मुफ्त दवाएं मिल सकीं। इसका सीधा असर सिविल अस्पताल पर पड़ा, जहां मरीजों की भीड़ अचानक बढ़ गई और ओपीडी सेवा 600 के पार पहुंच गई।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें:

'आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट पंजाब' के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:

पक्का (रेगुलर) किया जाए: आम आदमी क्लीनिकों के सभी डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिक असिस्टेंटों को मौजूदा ठेका/इम्पैनलमेंट प्रणाली से मुक्त कर डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (पंजाब) के अधीन पक्का किया जाए।

इंसेंटिव में वृद्धि: स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों की गिनती के हिसाब से मिलने वाले इंसेंटिव में बढ़ोतरी की जाए। डॉक्टरों को 80 रुपये, फार्मासिस्टों को 30 रुपये और क्लीनिक असिस्टेंटों को 25 रुपये प्रति मरीज इंसेंटिव के साथ सीधे DHS के तहत नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।

छुट्टियों का प्रावधान: कर्मचारियों को हर साल 15 दिनों की कैजुअल लीव (आकस्मिक अवकाश) और 15 दिनों की मेडिकल लीव (चिकित्सा अवकाश) की लिखित सुविधा दी जाए।

योग्यता का दर्जा व आयु सीमा में छूट: क्लीनिक असिस्टेंटों की योग्यता एएनएम होने के कारण उन्हें एएनएम का आधिकारिक दर्जा दिया जाए। साथ ही भविष्य की सरकारी भर्तियों में इस सेवाकाल के अनुभव के अंक जोड़े जाएं और आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान की जाए।

बैठक में मानी मांगों के तुरंत लिखित आदेश जारी हों

सांझा फ्रंट पंजाब के प्रधान डॉ. जसकरण सिंह रंधावा, डॉ. राघव, डॉ. अंकित, डॉ. जगबीर, डॉ. तवलीन, डॉ. नरेश, डॉ. आरुषि, डॉ. अनुरीत, डॉ. गुंजन वर्मा, फार्मेसी ऑफिसर राजवीर सिंह, रोहित, संजय, नितीश, शिवानी तथा क्लीनिक असिस्टेंट सविता, अंजलि, साक्षी, मुस्कान व सोफिया ने कहा कि मेडिकल स्टाफ पिछले तीन सालों से सेवाएं दे रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि पूर्व में हुई बैठक में मानी गई उनकी जायज मांगों के संबंध में तुरंत जरूरी लिखित आदेश जारी किए जाएं।