संभल जिले की असमौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की तीन बार की विधायक पिंकी सिंह यादव ने बीते चार वित्तीय वर्षों में विधायक निधि (MLALAD) के जरिए अपने क्षेत्र में लगातार विकास कार्य कराए हैं। यह Asmoli MLA MLALAD Fund Report 2023-24 से लेकर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 तक की पूरी तस्वीर सामने रखती है — किस साल कितने काम प्रस्तावित हुए, कितनों को मंजूरी मिली, और कितनी रकम खर्च हुई। आंकड़े बताते हैं कि चार वर्षों में कुल 327 विकास कार्य प्रस्तावित किए गए, जिनमें से 300 को औपचारिक स्वीकृति मिली और 247 पूरे भी हो चुके हैं — जो इस पूरी शृंखला में अब तक देखे गए सबसे मजबूत आंकड़ों में से एक है।

यह रिपोर्ट कार्ड सिर्फ आंकड़ों का ढेर नहीं है, बल्कि यह बताती है कि असमौली में विधायक निधि का इस्तेमाल कितनी योजनाबद्ध तरीके से हुआ, पैसा कितनी तेजी से खर्च हुआ, और साल-दर-साल अनुशंसित, स्वीकृत व पूर्ण कार्यों का अनुपात कैसे बना रहा। पूरा डेटा राज्य सरकार के विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि पोर्टल से लिया गया है, जहां हर विधायक के फंड इस्तेमाल का ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बार स्रोत में कार्यों की प्रकृति (जैसे सड़क, बिजली, पेयजल आदि की श्रेणीवार गिनती) का अलग ब्यौरा उपलब्ध नहीं था, इसलिए यह रिपोर्ट मुख्यतः वित्तीय आंकड़ों और कार्यों की कुल संख्या पर केंद्रित है।

असमौली विधानसभा और विधायक पिंकी सिंह यादव का परिचय

असमौली, संभल जिले की विधानसभा सीट संख्या 32 है। पिंकी सिंह यादव यहां से समाजवादी पार्टी की तीन बार की विधायक हैं। उनका जन्म 25 मार्च 1981 को नई दिल्ली में हुआ था, और वे स्नातक, बी.एड और एलएल.बी की पढ़ाई कर चुकी हैं। पेशे से वे वकील और कृषक हैं। उनके पिता ब्रिजेंद्र पाल सिंह यादव संभल से पूर्व सांसद और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं तथा समाजवादी पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ नेता माने जाते रहे हैं।

इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए पिंकी सिंह यादव ने असमौली सीट पर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। किसी भी दीर्घकालिक जनप्रतिनिधि के कामकाज को परखने के लिए विधायक निधि के इस्तेमाल के आंकड़े एक बेहद ठोस पैमाना माने जाते हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर बताते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल कितनी तेजी और योजनाबद्धता से हो रहा है।

भारत में सांसदों के लिए स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना (MPLAD) की शुरुआत 1993 में हुई थी, और उसी की तर्ज पर राज्यों ने बाद में अपने विधायकों के लिए भी इसी तरह की योजनाएं शुरू कीं। उत्तर प्रदेश में इसे विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना (MLALAD) कहा जाता है, जो ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित होती है। इस योजना के तहत हर विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय विकास कार्यों के लिए हर वित्तीय वर्ष में एक निश्चित बजट आवंटित किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में यह राशि लगातार बढ़ती रही है। 2019 तक विधायक निधि महज डेढ़ करोड़ रुपये प्रति वर्ष हुआ करती थी। फरवरी 2020 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये किया, और मई 2022 में इसे और बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया — यानी विधायकों की निधि अब सांसदों को मिलने वाली निधि के बराबर हो गई। इसी वजह से पिंकी सिंह यादव को भी हर वित्तीय वर्ष में 5 करोड़ रुपये की मूल निधि आवंटित होती रही है, जिसमें पिछले वर्ष की अवशेष राशि जुड़कर कुल उपलब्ध राशि और भी बढ़ जाती है।

विधायक अपने क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से कार्यों की सिफारिश करते हैं, जिन्हें प्रशासनिक स्वीकृति के बाद जिला स्तर पर क्रियान्वित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में चार चरण होते हैं — सिफारिश, स्वीकृति, व्यय और अंततः कार्य का भौतिक रूप से पूर्ण होना। हर वित्तीय वर्ष के खर्च और प्रगति की पूरी जानकारी यूपी विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन में जिलेवार देखी जा सकती है, जहां प्रदेश के सभी विधायकों के फंड उपयोग का ब्यौरा दर्ज है।

Asmoli MLA MLALAD Fund Report: चार साल का पूरा हिसाब

पिंकी सिंह यादव की विधायक निधि से जुड़े आंकड़ों को एक साथ रखकर देखें तो एक भरोसेमंद पैटर्न उभरता है — हर साल न सिर्फ ज्यादा काम प्रस्तावित हुए, बल्कि उनमें से बड़ा हिस्सा स्वीकृत और पूर्ण भी होता गया।

वित्तीय वर्षअनुशंसित कार्यस्वीकृत कार्यकार्य पूर्णस्वीकृत धनराशि
2023-248080804.64 करोड़
2024-259489765.39 करोड़
2025-2612199915.18 करोड़
2026-27 (अब तक)323201.29 करोड़
कुल32730024716.51 करोड़ (लगभग)

2023-24 में प्रस्तावित सभी 80 कार्य न सिर्फ स्वीकृत हुए बल्कि उसी साल पूरे भी हो गए। इसके बाद के वर्षों में भले ही शत-प्रतिशत का आंकड़ा दोहराया नहीं जा सका, लेकिन स्वीकृति दर और पूर्णता दर दोनों ही ज्यादातर समय 80% से 95% के बीच बनी रहीं — जो इस रिपोर्ट शृंखला में देखे गए बाकी विधायकों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन है।

2023-24: शत-प्रतिशत स्वीकृति और पूर्णता के साथ आदर्श शुरुआत

2023-24 की विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार असमौली को इस वर्ष कुल 635.11 लाख रुपये उपलब्ध थे, जिसमें पिछले वर्ष की 135.11 लाख रुपये की अवशेष राशि और नई आवंटित 500 लाख रुपये (5 करोड़) शामिल थी।

इस वर्ष कुल 80 कार्य प्रस्तावित हुए, और सभी 80 को स्वीकृति मिली — शत-प्रतिशत स्वीकृति दर। स्वीकृत राशि 464.36 लाख रुपये रही, जिसके विरुद्ध केवल 170.75 लाख रुपये स्वीकृति की प्रतीक्षा में बचे। सबसे उल्लेखनीय यह रहा कि सभी 80 स्वीकृत कार्य उसी वित्तीय वर्ष में पूरे भी हो गए — यानी कार्य पूर्णता दर भी शत-प्रतिशत रही। खर्च हुई राशि 463.48 लाख रुपये रही, जो स्वीकृत राशि का करीब 99.8% है — यानी स्वीकृत लगभग पूरा पैसा उसी वर्ष खर्च भी हो गया। वर्षांत में सिर्फ 171.63 लाख रुपये का अवशेष बचा, और प्रतिबद्ध राशि नाममात्र 0.88 लाख रुपये रही। यह आंकड़े दिखाते हैं कि इस वर्ष फंड प्रबंधन बेहद कुशल तरीके से हुआ।

2024-25: अनुशंसित कार्य बढ़े, स्वीकृति दर भी मजबूत बनी रही

2024-25 की विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष पिछले साल की अवशेष राशि 112.45 लाख रुपये रही, जिसमें 500 लाख रुपये का नया आवंटन जुड़ने से कुल उपलब्ध राशि 612.45 लाख रुपये तक पहुंची।

इस वर्ष अनुशंसित कार्यों की संख्या बढ़कर 94 हो गई, जिनमें से 89 को स्वीकृति मिली — स्वीकृति दर करीब 94.7%, जो पिछले साल के शत-प्रतिशत स्तर के बेहद करीब है। स्वीकृत राशि 539.02 लाख रुपये रही — यह आंकड़ा उस वर्ष के मूल आवंटन (500 लाख) से भी ज्यादा है, जो दिखाता है कि पिछले वर्ष की अवशेष राशि का भी सक्रियता से इस्तेमाल किया गया। स्वीकृति के लिए सिर्फ 73.43 लाख रुपये शेष बचे — यह राशि बाकी वर्षों के मुकाबले काफी कम है।

स्वीकृत 89 कार्यों में से 76 उसी वर्ष पूरे हो सके, यानी कार्य पूर्णता दर करीब 85.4% रही। खर्च हुई राशि 510.52 लाख रुपये रही — स्वीकृत राशि का करीब 94.7%, जो लगातार दूसरे वर्ष भी बेहद ऊंचा खर्च अनुपात है। वर्षांत में अवशेष राशि 101.93 लाख रुपये रही, जबकि प्रतिबद्ध राशि 28.5 लाख रुपये दर्ज हुई।

2025-26: सबसे ज्यादा अनुशंसित कार्य, फिर भी मजबूत प्रदर्शन बरकरार

2025-26 की जिलेवार विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष पिछले साल की अवशेष राशि 147.79 लाख रुपये और नया आवंटन 500 लाख रुपये मिलाकर कुल उपलब्ध राशि 647.79 लाख रुपये रही।

अनुशंसित कार्यों की संख्या इस वर्ष बढ़कर 121 हो गई — चार वर्षों में सबसे ज्यादा। इनमें से 99 कार्यों को स्वीकृति मिली, यानी स्वीकृति दर करीब 81.8%। स्वीकृत राशि 518.32 लाख रुपये रही, जबकि 129.47 लाख रुपये स्वीकृति की प्रतीक्षा में बचे।

इस वर्ष की सबसे उल्लेखनीय बात कार्य पूर्णता दर रही — स्वीकृत 99 कार्यों में से 91 उसी वर्ष पूरे हो गए, यानी पूर्णता दर करीब 91.9%, जो 2023-24 के बाद दूसरा सबसे बेहतर आंकड़ा है। खर्च हुई राशि 502.12 लाख रुपये रही — स्वीकृत राशि का करीब 96.9%, जो तीनों वर्षों में सबसे ऊंचे खर्च अनुपातों में से एक है। वर्षांत में अवशेष राशि 145.67 लाख रुपये रही, जबकि प्रतिबद्ध राशि 16.2 लाख रुपये दर्ज हुई।

2026-27: चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआती तस्वीर

चूंकि 2026-27 का वित्तीय वर्ष अभी जारी है, इसलिए इसके आंकड़े पूरे साल की नहीं बल्कि अब तक की प्रगति दिखाते हैं। 2026-27 की जिलेवार विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत 119.46 लाख रुपये की अवशेष राशि के साथ हुई, जिसमें अब तक 250 लाख रुपये (2.5 करोड़) का नया आवंटन जुड़कर कुल उपलब्ध राशि 369.46 लाख रुपये हो गई है।

अब तक 32 कार्य प्रस्तावित हुए हैं और सभी 32 को स्वीकृति मिल चुकी है — यानी शत-प्रतिशत स्वीकृति दर, जो 2023-24 के बाद दूसरी बार देखने को मिली है। स्वीकृत राशि 128.96 लाख रुपये है, जबकि 240.5 लाख रुपये अब भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं। खर्च फिलहाल 77.38 लाख रुपये हुआ है, यानी खर्च अनुपात करीब 60%, जो पहले तीन वर्षों के मुकाबले कम है — लेकिन यह स्वाभाविक भी है क्योंकि वित्तीय वर्ष अभी शुरुआती चरण में ही है। चूंकि वर्ष अभी चल रहा है, इसलिए एक भी कार्य पूर्ण के रूप में दर्ज नहीं हुआ है। वर्तमान में 292.08 लाख रुपये अवशेष के तौर पर और 51.58 लाख रुपये प्रतिबद्ध राशि के तौर पर दर्ज हैं।

वित्तीय प्रबंधन: चारों वर्षों में लगातार मजबूत प्रदर्शन

आंकड़ों को करीब से देखें तो असमौली की विधायक निधि में एक भरोसेमंद पैटर्न नजर आता है — हर वर्ष स्वीकृति दर, पूर्णता दर और खर्च अनुपात, तीनों ही ज्यादातर समय ऊंचे स्तर पर बने रहे।

वित्तीय वर्षस्वीकृति दरकार्य पूर्णता दरखर्च अनुपात (व्यय/स्वीकृत)वर्षांत अवशेष राशि
2023-24100%100%99.8%171.63 लाख
2024-2594.7%85.4%94.7%101.93 लाख
2025-2681.8%91.9%96.9%145.67 लाख
2026-27 (अब तक)100%0%*60.0%292.08 लाख

*2026-27 का वित्तीय वर्ष अभी चल रहा है, इसलिए पूर्णता दर का आंकड़ा वर्षांत तक बदल सकता है।

इस तालिका से साफ है कि पहले तीन पूर्ण वित्तीय वर्षों में खर्च अनुपात लगातार 94% से ऊपर बना रहा — यानी जितना पैसा स्वीकृत हुआ, उसका लगभग पूरा हिस्सा उसी वर्ष खर्च भी हो गया। यह किसी भी सरकारी योजना के लिहाज से एक मजबूत प्रदर्शन माना जाता है, क्योंकि इससे अवशेष राशि नियंत्रण में रहती है और आने वाले वर्षों पर बोझ नहीं बढ़ता। वर्षांत अवशेष राशि भी चारों वर्षों में अपेक्षाकृत सीमित दायरे (करीब 100-170 लाख रुपये) में बनी रही, जो दिखाता है कि फंड का इस्तेमाल आमतौर पर उसी वित्तीय वर्ष के भीतर हो जाता रहा है।

2025-26 में स्वीकृति दर थोड़ी घटकर 81.8% रही, लेकिन इसकी भरपाई कार्य पूर्णता दर के 91.9% तक पहुंचने से हो गई — यानी जो भी काम स्वीकृत हुए, उनमें से ज्यादातर तेजी से पूरे भी किए गए। यह पैटर्न बताता है कि असमौली में क्रियान्वयन की गति लगातार मजबूत बनी रही, भले ही अनुशंसित कार्यों की संख्या हर साल बढ़ती गई हो।

यह रिपोर्ट कार्ड आम नागरिक के लिए क्यों मायने रखता है?

विधायक निधि का हिसाब-किताब सिर्फ प्रशासनिक कागजी कार्रवाई नहीं है — यह सीधे तौर पर आम नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। जब किसी क्षेत्र में विधायक निधि से स्वीकृत कार्य समय पर पूरे होते हैं, तो इसका सीधा फायदा स्थानीय निवासियों को मिलता है, चाहे वह सड़क हो, बिजली हो या कोई अन्य बुनियादी सुविधा। असमौली के आंकड़े बताते हैं कि यहां फंड का इस्तेमाल अपेक्षाकृत तेज और अनुशासित तरीके से हुआ है — कम अवशेष राशि और ऊंचा खर्च अनुपात इसी बात के संकेत हैं।

पारदर्शिता के लिहाज से यह भी अहम है कि हर वित्तीय वर्ष का डेटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है, जिससे कोई भी नागरिक, पत्रकार या शोधकर्ता इन आंकड़ों की जांच खुद कर सकता है और अपने प्रतिनिधि से जवाबदेही मांग सकता है। हालांकि इस बार कार्यों की प्रकृति (जैसे सड़क, पेयजल या बिजली से जुड़े कार्यों की अलग-अलग गिनती) का ब्यौरा स्रोत में उपलब्ध नहीं था, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि असमौली में किस तरह की सुविधाओं पर सबसे ज्यादा जोर रहा। यह जानकारी भविष्य में जनप्रतिनिधि की प्राथमिकताओं को समझने के लिए एक अहम कड़ी हो सकती है।

चार वर्षों का सार: कितना काम हुआ, कितना अब भी बाकी?

कुल मिलाकर देखें तो पिंकी सिंह यादव ने चार वित्तीय वर्षों में असमौली विधानसभा क्षेत्र में 327 विकास कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 300 को औपचारिक मंजूरी मिली और 247 पूरे भी हो चुके हैं। यानी प्रस्तावित कार्यों में से करीब 75.5% अब तक पूरी तरह क्रियान्वित हो चुके हैं, और स्वीकृत कार्यों में से भी करीब 82.3% पूर्ण हो पाए हैं — यह अनुपात इस रिपोर्ट शृंखला में देखे गए बाकी विधायकों के मुकाबले काफी बेहतर है।

आर्थिक रूप से देखें तो चार वर्षों में कुल मिलाकर करीब 17.5 करोड़ रुपये नया आवंटन हुआ, जिनमें से करीब 16.51 करोड़ रुपये के कार्यों को स्वीकृति मिली और करीब 15.53 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मौजूदा अवशेष राशि 292.08 लाख रुपये है, जो इस वित्तीय वर्ष के अभी जारी रहने की वजह से स्वाभाविक है और आने वाले महीनों में घटने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, असमौली का यह रिपोर्ट कार्ड एक ऐसे पैटर्न को दर्शाता है जहां फंड की उपलब्धता, स्वीकृति की रफ्तार और क्रियान्वयन की गति — तीनों के बीच अपेक्षाकृत अच्छा तालमेल बना रहा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विधायक निधि (MLALAD) क्या है? यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना है, जिसके तहत हर विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय विकास कार्यों के लिए हर वित्तीय वर्ष में एक निश्चित धनराशि (आमतौर पर 5 करोड़ रुपये) आवंटित की जाती है।

असमौली की वर्तमान विधायक कौन हैं? पिंकी सिंह यादव, जो समाजवादी पार्टी से असमौली विधानसभा (सीट संख्या 32, संभल जिला) का प्रतिनिधित्व करती हैं और लगातार तीसरी बार यहां से विधायक चुनी गई हैं।

चार वर्षों में कुल कितने विकास कार्य पूरे हुए? 2023-24 से 2026-27 (अब तक) के बीच कुल 247 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 300 कार्यों को स्वीकृति मिली और 327 कार्य प्रस्तावित किए गए थे।

असमौली में विधायक निधि का खर्च अनुपात कैसा रहा? पहले तीन पूर्ण वित्तीय वर्षों में खर्च अनुपात 94% से 99.8% के बीच रहा, जो दिखाता है कि स्वीकृत राशि का लगभग पूरा हिस्सा उसी वर्ष खर्च कर लिया गया।

विधायक निधि के खर्च की जानकारी कहां देखी जा सकती है? हर विधायक के फंड इस्तेमाल का पूरा ब्यौरा आधिकारिक MLALAD पोर्टल और यूपी विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।

असमौली विधायक पिंकी सिंह यादव की विधायक निधि का यह चार वर्षों का रिपोर्ट कार्ड एक भरोसेमंद और अनुशासित फंड प्रबंधन की तस्वीर पेश करता है। जहां 2023-24 में शत-प्रतिशत स्वीकृति और पूर्णता दर के साथ एक आदर्श शुरुआत हुई, वहीं बाद के वर्षों में भी 80% से 95% के बीच बनी स्वीकृति और पूर्णता दरें दिखाती हैं कि क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार लगातार मजबूत बनी रही। हालांकि कार्यों की प्रकृति का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध न होने से यह स्पष्ट नहीं है कि किस तरह की सुविधाओं को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिली, लेकिन वित्तीय अनुशासन के लिहाज से असमौली का यह प्रदर्शन एक सकारात्मक उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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