धार जिले के निसरपुर स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर में छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर हंगामा हो गया। करीब 35 छात्राएं रविवार रात लगभग 10 बजे खिड़की से निकलकर कुक्षी थाने की ओर पैदल रवाना हो गईं।
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रात में छात्राओं को सड़क पर देख स्थानीय लोगों ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और रास्ते में उनके साथ रहे। छात्राओं ने छात्रावास की क्षमता, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि छात्रावास की क्षमता करीब 50 बेड की है और वहां 140 छात्राओं को रखा गया है।

रास्ते में पुलिस ने समझाने की कोशिश की, लेकिन बच्चियां थाने जाने पर अड़ी रहीं।
चाय-नाश्ता मेन्यू के अनुसार नहीं मिल रहा
छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन और नाश्ता नहीं मिल रहा है। खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने पर उन्हें चुप रहने के लिए कहा जाता है।
छात्राओं ने यह आरोप भी लगाया कि अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान भोजन व्यवस्था बेहतर रहती है, लेकिन निरीक्षण के बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

इसी हॉस्टल में बच्चियां रहकर पढ़ाई करती हैं।
रास्ते में एक छात्रा की तबीयत बिगड़ी
छात्राओं के थाने की ओर जाने के दौरान एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। उसे तत्काल कुक्षी के कैलाश हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया। बाकी छात्राएं आगे बढ़ती रहीं।
निसरपुर पुलिस ने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी शिकायतें अधिकारियों के सामने रखने के लिए थाने जाने पर अड़ी रहीं। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से वाहनों की व्यवस्था कर उन्हें सुरक्षित कुक्षी थाने पहुंचाया गया।
थाने में अधिकारियों के सामने रखी शिकायतें
छात्राओं के कुक्षी थाने पहुंचने की सूचना मिलने पर जयस के रविराज बघेल भी वहां पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याओं में साथ देने का भरोसा दिलाया।
थाने में तहसीलदार प्रवीण पाटीदार, एसडीओपी सुनील गुप्ता, टीआई दीपक चौहान और चौकी प्रभारी भुवानसिंह चौहान सहित अन्य अधिकारियों ने शिकायतें सुनीं।

जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
जयस के रविराज बघेल ने कहा कि छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया तो छात्राओं के साथ मिलकर धरना-आंदोलन किया जाएगा। छात्राओं पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाने के लिए वार्डन को भी हिदायत देने की बात कही गई। बाद में पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों के वाहनों की मदद से छात्राओं को वापस छात्रावास पहुंचाया गया।