महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय ने संबद्ध निजी महाविद्यालयों की संबद्धता शर्तों की पालना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विद्या परिषद की विशेष बैठक में निर्णय लिया गया कि निर्धारित शर्तों की पालना के लिए महाविद्यालयों को दो माह का समय दिया जाएगा। शर्तें

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इस निर्णय से संभाग के करीब 350 निजी महाविद्यालयों की संबद्धता अभिवृद्धि के लंबित प्रकरण प्रभावित हो सकते हैं। कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संबद्धता व्यवस्था, शुल्क निर्धारण और परीक्षा प्रणाली में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। परिषद ने तय किया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में दो माह के भीतर निर्धारित शर्तों की पालना करने वाले महाविद्यालयों की शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक की संबद्धता अभिवृद्धि के लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। हालांकि, न्यायिक प्रकरण इस निर्णय के दायरे से बाहर रहेंगे। विद्या परिषद ने संबद्धता शुल्क को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के समान करने तथा शोध शुल्क का पुनर्निर्धारण करने का निर्णय लिया। इससे विश्वविद्यालय की शुल्क व्यवस्था में बदलाव होगा।

परीक्षा प्रणाली में संशोधन के लिए बनेगी समिति

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षा व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाने के लिए परीक्षा की समयावधि और प्रश्नपत्र प्रणाली में संशोधन पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही अंतिम वर्ष के सेमेस्टर में शेष प्रश्नपत्रों की पूरक परीक्षा तथा स्वयंपाठी विद्यार्थियों से लिए जाने वाले महाविद्यालय प्रायोगिक शुल्क के उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों की समीक्षा भी होगी। इन विषयों पर सुझाव देने के लिए समिति गठित की जाएगी। समिति की अनुशंसाओं पर निर्णय लेने के लिए कुलगुरु को अधिकृत किया गया है।

विशेषज्ञों की अस्थायी नियुक्ति नीति को मिली अनुशंसा

विश्वविद्यालय में विजिटिंग, संविदा, मानद शिक्षकों एवं प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की अस्थायी नियुक्तियों के लिए तैयार नीति एवं दिशा-निर्देश-2026 को भी विद्या परिषद ने अनुशंसित किया। इस व्यवस्था के तहत विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने के लिए निर्धारित नीति के अनुसार आगे की प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।

5 लाख की एफडीआर बनवाना अनिवार्य

विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों को एंडोमेंट फंड के तहत पांच लाख रुपये की एफडीआर बनानी होगी। यह एफडीआर विश्वविद्यालय के कुलसचिव और संबंधित महाविद्यालय के संयुक्त नाम से न्यूनतम पांच वर्ष की अवधि के लिए बनानी होगी। इस निर्णय के माध्यम से संबद्धता संबंधी वित्तीय प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता, पारदर्शिता और नियमों की पालना सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। संबद्धता एवं परीक्षा व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। विद्या परिषद की बैठक में संबद्धता नियमों की पालना, शैक्षणिक गुणवत्ता और परीक्षा प्रणाली में सुधार संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है। प्रो.नरसी राम बिश्नोई, कुलगुरु, एमजीएस यूनिवर्सिटी