ग्वालियर58 मिनट पहलेलेखक: राजेश दुबे

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों का आंकड़ा 4.78 लाख के करीब पहुंच गया है, जबकि जजों के 15 पद खाली हैं। स्वीकृत 53 पदों के मुकाबले चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोकजे सहित केवल 38 जज कार्यरत हैं।

जुलाई 2026 के अंत में हाईकोर्ट की तीनों पीठों में कुल 4,77,764 मामले लंबित थे। इस हिसाब से एक जज के हिस्से औसतन 12,573 लंबित मामले आते हैं। हालांकि यह कुल पेंडेंसी और जजों की संख्या के आधार पर निकाला गया गणितीय औसत है, किसी जज का वास्तविक व्यक्तिगत केस लोड नहीं।

हाईकोर्ट में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मई के तीसरे सप्ताह में मप्र हाईकोर्ट कॉलेजियम ने बार कोटे से 9 अधिवक्ताओं और न्यायिक सेवा कोटे से 7 अधिकारियों के नाम जज के लिए प्रस्तावित किए थे। अब सुप्रीम कोर्ट स्तर पर बार कोटे के सभी 9 अधिवक्ताओं से 20-20 रिपोर्टेबल जजमेंट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने बार एनरोलमेंट की सनद भी मांगी है।

रिपोर्टेबल जजमेंट से परखेंगे वकालत की भूमिका : बार कोटे से प्रस्तावित अधिवक्ताओं के 20-20 रिपोर्टेबल जजमेंट मंगाने को चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इनके जरिए संबंधित अधिवक्ताओं के न्यायिक मामलों में अनुभव, महत्वपूर्ण प्रकरणों में उनकी भूमिका और कानून से जुड़े तर्कों का आकलन किया जा सकेगा। दूसरी ओर न्यायिक सेवा के 7 अधिकारियों की प्रोफाइल और सर्विस रिकॉर्ड की जांच चल रही है।

न्यायिक सेवा के 7 अफसरों की प्रोफाइल जांच जारी; जुलाई में नए केस से 2,205 ज्यादा निपटे, फिर भी मामले बढ़े

दोनों कोटे से प्रस्तावित हैं 16 नाम, लेकिन 15 पद खाली दोनों कोटे से कुल 16 नाम प्रस्तावित किए गए हैं। हालांकि हाईकोर्ट में फिलहाल रिक्त पदों की संख्या 15 है। ऐसे में सभी प्रस्तावित नामों की नियुक्ति होना जरूरी नहीं है। अंतिम नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा, केंद्र सरकार की संवैधानिक प्रक्रिया और नियुक्ति के समय उपलब्ध रिक्तियों पर निर्भर करेंगी।

जुलाई में निपटारे बढ़े, लेकिन 3 माह का बैकलॉग नहीं घटा मामलों के निपटारे की रफ्तार देखें तो जुलाई में सुधार हुआ। 19,706 नए प्रकरण दर्ज हुए, जबकि 21,911 मामलों का निराकरण हुआ। यानी 2,205 केस ज्यादा निपटाए गए। मई और जून में स्थिति इसके उलट थी। मई में 12,68a9 नए मामले आए और 12,280 निपटे। इससे पेंडेंसी 409 बढ़ी।

कॉलेजियम से शपथ तक नियुक्ति की प्रक्रिया

  • हाईकोर्ट कॉलेजियम : अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करता है।
  • रिकॉर्ड की जांच : वकालत, पात्रता, सेवा रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जात है।
  • सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम: प्रस्तावित नामों पर विचार व अनुशंसा करता है।
  • केंद्र सरकार व राष्ट्रपति: संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्ति की जाती है।
  • शपथ: नियुक्त जज को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शपथ दिलाते हैं।

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