भोपाल32 मिनट पहलेलेखक: जितेंद्र मेहरा
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राजधानी की सड़कों पर मौत का मकड़जाल बिछा पड़ा है। रिववार को युवक की मौत के बाद जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम तक सब जगह मुस्तैदी दिखी, लेकिन हकीकत में यह मुस्तैदी सिर्फ नाकामी छिपाने और मौत की जिम्मेदारी किसी दूसरे पर थोपने की ज्यादा थी।
जिम्मेदारों ने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि और कहां-कहां इस तरह खंभों में मौत खुलेआम झूल रही है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने 38 किमी में घूमकर 661 खंभों की स्थिति देखी तो 400 खतरनाक हालत में मिले। कहीं भी कट पॉइंट और बीच में खंभे पर झूलते तार! लोग रोजाना मौत को छूकर निकलते हैं... बच गए तो किस्मत, हादसा हुआ तो जिम्मेदार तलाशने टीम बना दी जाएगी।

सीहोर नाका से लालघाटी : इन तारों में रोजाना हजारों की भीड़ उलझती है बीआरटीएस कॉरिडोर के 280 से ज्यादा पोल में से 190 के कनेक्शन बॉक्स खुले मिले। बाजार वाले हिस्सों में खुले तार पोल से बाहर निकले थे। खरीदारी करने आए लोग रोजाना इनमें उलझते हैं। शुक्र है! हादसा नहीं हुआ।
लालघाटी से बाणगंगा: मंदिर जाने वाले कई श्रद्धालु यहीं से गुजरते हैं कमला पार्क रोड सहित 128 पोल की पड़ताल की गई। करीब 51 पोल पर तार लटके मिले। हनुमान मंदिर के सामने डिवाइडर के कट पॉइंट पर भी खुले तार दिखाई दिए। मंदिर जाने वाले अधिकतर श्रद्धालु रोजाना इन्हीं खंभों के बीच से होकर गुजरते हैं।

चंचल चौराहा से बैरागढ़ बस स्टैंड: घरों के पास खतरे की खुली डीपी प्रेमरामचंदानी मार्ग से बस स्टैंड तक 44 पोल देखे। इनमें से 26 पर तार बाहर झूलते मिले। कई जगह अंडरग्राउंड लाइन की केबल जमीन से बाहर खींचकर छोड़ी गई थी। यहीं एक जगह घरों के पास ही डीपी खुली मिली।

शौर्य स्मारक से RKMP: स्टेशन के रास्ते में जरा सी चूक पड़़ेगी भारी इस मार्ग पर 57 पोल देखे गए। इनमें 34 से अधिक कनेक्शन बॉक्स खुले मिले। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की ओर जाने वालों के अलावा अन्य लोग भी इन्हीं पोल के आसपास से होकर रोजाना गुजरते हैं।

आरआरएल तिराहा से मिसरोद तक: सर्विस लेन और फुटपाथ पर खतरा सबसे व्यव्स्त मार्गों में से एक नर्मदापुरम रोड पर दोनों तरफ 152 पोल देखे। 99 पर तारों के गुच्छे बाहर मिले। कई जगह कनेक्शन बॉक्स के ढक्कन भी गायब थे। ये पोल सर्विस लेन और पैदल चलने वाले रास्तों के पास हैं।
जिम्मेदारी ढोल रही एजेंसियां: हादसे के बाद जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी ने पोल को क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए पीडब्ल्यूडी, स्मार्ट सिटी या निगम का बताया। पड़ताल में पोल निगम के निकले।
रिपोर्ट से साफ होगी वजह फिलहाल पोल में करंट का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम में पूर्व शिकायत का रिकॉर्ड नहीं मिला। खुले-कटे तार और पोल्स से कवर गायब होना गंभीर है। खंभों की डबल-ट्रिपल चेकिंग कराएंगे। संयुक्त दल की रिपोर्ट के बाद स्थिति साफ होगी। -संस्कृति जैन, निगम कमिश्नर
बयान नहीं दे सकता मैं इस मामले में किसी भी स्तर पर बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हूं। हादसे और विद्युत व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए नगर निगम के पीआरओ या निगमायुक्त से बात की जा सकती है। इस संबंध में वही पक्ष दे सकते हैं। -आशीष श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, विद्युत शाखा, नगर निगम
पोल स्मार्ट सिटी का नहीं हादसे वाला पोल स्मार्ट सिटी का नहीं है। शहर के प्रमुख मार्गों पर लगे स्मार्ट सिटी के अन्य पोल के कटे तार और खुले कनेक्शन बॉक्स को लेकर भी सवाल किया गया था। हालांकि, इन सवालों पर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।-अंजू अरुण कुमार, सीईओ, स्मार्ट सिटी
हादसे वाली जगह 7 कट, छूकर निकल रहे लोग... भास्कर ने पड़ताल की शुरुआत उसी जगह से की, जहां रविवार शाम हादसा हुआ था। डीबी मॉल के सामने डिवाइडर में 7 अघोषित कट हैं। इन जगहों पर पोल के दोनों तरफ थोड़ी- थोड़ी जगह बची है। लोग इसी रास्ते से डिवाइडर पार करते हैं। कई पोल के कनेक्शन बॉक्स खुले हैं। कुछ में तार भी बाहर निकले हुए थे। हादसे के अगले दिन भी लोग इन्हीं पोल के पास से निकलते रहे। यानी जिस जगह लोगों की रोज आवाजाही है, वहां बिजली के कनेक्शन खुले पड़े हैं। हालांकि, दिन में नगर निगम के अधिकारी हादसे वाली जगह पहुंचे थे और पड़ताल कर लौट गए।
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