
पुलिस गिरफ्त में आरोपी महिलाएं.
Tonk Crime News: कुछ वर्षों का संबंध था, विश्वासों का संसार था. क्या पता था उस मासूम को, मौत का षड्यंत्र तैयार था… ये सिर्फ एक कविता नहीं है. बल्कि जज ने इसके जरिए एक केस की कहानी भी बयां की और इसी पर फैसला भी सुनाया. मामला राजस्थान के टोंक जिले का है. पचेवर थाना क्षेत्र के नगर गांव में सितंबर 2022 में हुई इस वारदात में विशेष SC-ST अदालत ने प्रेमी प्रधान और उसके परिजनों को अपनी ही प्रेमिका सुमन की जहर देकर निर्मम हत्या करने का दोषी पाया. परिवादी बनवारीलाल की रिपोर्ट के अनुसार, उसकी बहन सुमन लगभग डेढ़ साल से जयपुर के वैशाली नगर में किराए के मकान में रह रही थी, जहां उसकी पहचान सांगानेर निवासी प्रधान से हुई थी.
11 सितंबर 2022 को प्रधान उसे लेकर नगर गांव आया. तीन दिन बाद 14 सितंबर को आरोपी ने सुमन के परिवार को झूठी सूचना दी कि उसे सांप ने काट लिया है और वह अजमेर अस्पताल में भर्ती है. जब परिजन पहुंचे तब तक सुमन की मौत हो चुकी थी और बाद में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
परिजनों का संदेह, पुलिस जांच और विसरा रिपोर्ट का खुलासा
कुछ दिन बाद मृतक के परिजनों को सुमन की मौत पर संदेह हुआ, फिर मृतका के भाई की रिपोर्ट पर थाना पचेवर में मामला दर्ज किया और जांच शुरु की. फिर जांच में सामने आया कि सुमन को उसके प्रेमी और प्रेमी की मां, एक अन्य महिला ने श्रद्धा के बहाने बुलाया और जहरीला पदार्थ देकर उसकी हत्या कर दी. पुलिस जांच और विसरा रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि सुमन की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि कीटनाशक पिलाने से हुई थी.
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विशेष लोक अभियोजक मेघराज जाट ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में 25 गवाह और 37 दस्तावेज पेश किए. जांच में यह भी सामने आया कि सुमन प्रधान पर इतना अंधविश्वास करती थी कि उसने अपना बैंक एटीएम कार्ड और उसका पिन तक उसे दे रखा था. हत्या की साजिश में प्रधान के साथ उसकी मां, भाई और बहन भी शामिल थे.

4 अभियुक्तों को आजीवन कारावास और 1.35 लाख का जुर्माना
विशेष न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने सेशन प्रकरण (सरकार बनाम प्रधान आदि) में सुनवाई पूरी करते हुए चारों आरोपियों को हत्या और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया.
सजा पाने वाले दोषियों में शामिल हैं:
प्रधान (पुत्र जगदीश, निवासी शिकारपुरा, सांगानेर, जयपुर)
संजना देवी (पत्नी जगदीश, निवासी शिकारपुरा, सांगानेर, जयपुर)
सवाईराम (पुत्र जगदीश, निवासी शिकारपुरा, सांगानेर, जयपुर)
सुशीला (पत्नी मांगीलाल, निवासी नगर, पचेवर, टोंक)
जज आरती माहेश्वरी ने कविता के जरिए दिया न्याय का कड़ा संदेश
अदालत ने चारों को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ-साथ कुल 1.35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. सजा सुनाते समय न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने अपने फैसले में एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश देती कविता पढ़कर सुनाई:
“कुछ वर्षों का संबंध था, विश्वासों का संसार था. क्या पता था उस मासूम को, मौत का षड्यंत्र तैयार था.” “जाति के नाम पर प्रेम को विष का प्याला पिलाया.” “जिसने जीवन भर साथ देने का वादा किया उसी ने जीवन मिटाया.” “मां, भाई, बहन के संग मिलकर मानवता को शर्मसार किया.” “प्रेमिका के पवित्र भरोसे का निर्ममता से संहार किया.” “विसरा में विष, एटीएम की गवाही, सच को कब तक छिपाएगी.” “न्याय की कलम अपराधियों को उनके कर्मों की सजा दिलाएगी.” “प्रेम कोई अपराध नहीं पर विश्वासघात क्षम्य नहीं.” “न्याय का संदेश यही- निर्दोष का रक्त व्यर्थ नहीं.”
(रिपोर्ट: राकेश सैनी)
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