अलवर16 घंटे पहले
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ये पूरा बायोवेस्ट कबाड़ की दुकान पर मिला था।
अलवर के आवासीय कॉलोनी अंबेडकर नगर के बीच में कबाड़ की दुकान पर 4 टन बायोवेस्ट मिलन के बावजूद CMHO ने मामले को दबा दिया। केवल आमजन के लिए सार्वजनिक नोटिस निकाल कर मामले को निबटा दिया।
कबाड़ी दुकानदार को नोटिस तक नहीं दिया। मौके से कबाड़ भी हास्वीन इनसीनेटर फर्म की टीम जब्त कर लेकर गई। जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी मौके पर भी नहीं गए। ऐसे में आगे भी अस्पताल से निकल रहा खतरनाक बायोवेस्ट कबाड़ियों तक पहुंचेगा। जिससे आमजन की जान को पूरा खतरा रहेगा।
नियम के अनुसार नहीं खरीद सकते बायोवेस्ट
जैविक अवशिष्ट अधिनिधिम के तहत अस्पतालों का बायो वेस्ट (निडिल, बोतल, सीरिंज सहित अन्य) कबाड़ी की दुकानों पर नहीं बेचा जा सकता है। ऐसा किया जाता है कि अधिनियम के तहत सख्ती से कार्यवाही करने का प्रावधान है। लेकिन जिम्मेदार अफसर बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद चुप हो गए। कुछ एक्शन नहीं लिया।
यही वजह है कि अलवर में अंबेडकर नगर की मुख्य सड़क के पास एक कबाड़ी की दुकान पर कट्टों के नीचे करीब 4 टन बायोवेस्ट मिला था। बायोवेस्ट एकत्रित करने वाली हॉस्वीन इनसीनेटर फर्म ने मौके पर जाकर बायोवेस्ट जब्त कर लिया। सीएमएचओ को रिपोर्ट दे दी। उसके बावजूद सीएमएचओ के स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिस कबाड़ी के यहां संक्रमण फैलाने वाला कबाड़ मिला। उसके खिलाफ कोई शिकायत तक दर्ज नहीं कराई गई।

अंबेडकर नगर में इस तरह कबाड़ी की दुकान पर बायोवेस्ट भरा मिला था। उसके बाद सीएमएचओ ने सबके लिए एहतियात के तौर पर ये लेटर जारी किया। जिम्मेदारों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया।
उधर, हॉस्वीन इनसीटनेटर फर्म के प्रतिनिध अरविंद कुमार का कहना है कि सीएमएचओ को पूरी रिपोर्ट बनाकर दे दी है। अब आगे कार्यवाही करना विभाग का जिम्मा है। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने का मतलब बायोबेस्ट खरीदने वाले की जेल होना पक्की है।
यहां खून से भरी थैलियां व सिरिंज मिली
अंबेडकर नगर में 1 अगस्त को कबाड़ी की दुकान पर बायोवेस्ट का ढेर मिला। यहां खून से भरी थैलियां, सिरिंज और निडिल मिलीं। दरअसल, शहर के अस्पतालों का कचरा बायो वेस्ट प्लांट भेजने की बजाय सीधे डंपिंग यार्ड या कबाड़ियों को बेचा जा रहा था। अस्पतालों से निकलने वाले इस घातक कचरे से संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा रहता है।
सम्राट नाम के कबाड़ी की दुकान पर अस्पतालों से निकलने वाला रिस्की प्लास्टिक, इस्तेमाल की जा चुकी सिरिंज, ग्लूकोज की बोतलें, यूज्ड ग्लव्स और खून से भरी थैलियां मिली हैं।
आसपास के दुकानदारों का कहना है कि बायो वेस्ट से कई बार तो खून टपकता हुआ दिखाई देता है। बदबू और गंदगी के कारण आसपास काम करना दूभर हो गया है। कचरा उठाने वाले सीधे गाड़ियों से कबाड़ियों की दुकानों तक पहुंचा रहे हैं।
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