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गुमला सदर अस्पताल में सेवा दे रहे दर्जनों स्वास्थ्यकर्मियों के सामने इन दिनों विकट आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। समानता कंपनी'' के माध्यम से कार्यरत फार्मासिस्ट, एएनएम, जीएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी पिछले पांच महीनों से अपने मानदेय के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। नियमित रूप से ड्यूटी करने के बावजूद वेतन न मिलने से कर्मियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। ​वेतन न मिलने का सीधा असर लगभग 400 अधिक कर्मियों के पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। कर्मियों का कहना है कि वे अस्पताल में पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन खाली हाथ घर लौटना उनके लिए ग्लानि और चिंता का विषय बन गया है। हीरालाल बैठा, नकुल सिंह और दिलीप साहू जैसे कर्मियों ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि घर का राशन लाने के पैसे नहीं हैं। दुकानदारों ने भी अब उधार देने से इनकार कर दिया है। ​दिलीप साहू ने दर्द बयां करते हुए कहा हालत यह है कि ड्यूटी पर आने के लिए बाइक में पेट्रोल डलवाने के भी पैसे नहीं बचे हैं। बच्चों की स्कूल फीस, ट्यूशन फीस और घर के आवश्यक खर्चों का भुगतान न हो पाने के कारण परिवार के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

​इस पूरे मामले में स्वास्थ्यकर्मियों को एक ओर जहां आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी के बीच जिम्मेदारी को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। ​सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी गई है। डॉ. किशोर के अनुसार अस्पताल प्रबंधन द्वारा ट्रेजरी से लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की राशि कंपनी के खाते में पहले ही भेजी जा चुकी है। अब कर्मियों को भुगतान करना पूरी तरह से संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है। इसमें अस्पताल प्रशासन की कोई भूमिका या गलती नहीं है। ​वहीं दूसरी ओर समानता कंपनी के सुपरवाइजर संजू खलखो ने भुगतान में देरी के लिए तकनीकी कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल से मिली राशि पूरी तरह से कंपनी के खाते में क्रेडिट नहीं हो पाई थी, जिसके कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई। ​कंपनी ने राहत की बात कहते हुए जानकारी दी है कि सोमवार शाम तक एक माह का मानदेय कर्मियों के खाते में हस्तांतरित कर दिया गया है। साथ ही कंपनी ने आश्वासन दिया है कि अगले 15 दिनों के भीतर दो माह का बकाया वेतन और जुलाई के अंत तक शेष सभी मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा। ​हालांकि कंपनी ने भुगतान का भरोसा दिया है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों में भारी रोष है। पांच माह के लंबे इंतजार ने उन्हें कर्ज के बोझ और मानसिक तनाव के बीच ला खड़ा किया है। कर्मियों का कहना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर उनका बकाया मानदेय नहीं मिला, तो उन्हें अपने हक के लिए कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ेगा। ​फिलहाल अस्पताल परिसर में तैनात स्वास्थ्यकर्मी इस उम्मीद में काम कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले में दखल देगा ।