झुंझुनूं में हरियालो राजस्थान अभियान के तहत वन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली है। इसका मुख्य उद्देश्य कागजों में आंकड़े जुटाना और औपचारिकता निभाना नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधे वास्तव में धरातल पर जीवित रहकर विशाल पेड़ बनें, यह सुनिश्चित करना है।

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इसके ​लिए वन विभाग पूरी तरह से सतर्क और निंरतर कार्य कर रही है। पौधों की सही देखभाल के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धतियों (Scientific Plantation) पर विशेष जोर दे रहा है, ताकि हर पौधा विपरीत मौसम में भी सुरक्षित रहकर तेजी से पनप सके।

साढ़े 42 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

DFO काव्या बी के अनुसार इस अभियान के तहत अकेले वन विभाग को जिले में साढ़े 42 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य सौंपा गया है। अब तक 70 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि शेष पौधों के वितरण और रोपण की प्रक्रिया पूरी गति के साथ जारी है।

सरकारी कार्यालयों को मुहित से जोड़ा

​इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए जिले के तमाम सरकारी कार्यालयों को भी इससे जोड़ा गया है। सभी सरकारी परिसरों को हरा-भरा और सुंदर बनाने के उद्देश्य से 33 लाख पौधे लगाने का अतिरिक्त लक्ष्य सौंपा गया है, ताकि हर सरकारी भवन के आसपास हरियाली नजर आए।

​12 नर्सरी से हो रहा पौधों का वितरण

​DFO काव्या बी ने बताया- इस पौधरोपण अभियान के लिए जिले में 12 सरकारी नर्सरियों के जरिए पौध वितरण किया जा रहा है। आम नागरिक, किसान और विभिन्न संस्थाएं सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक नर्सरी में पहुंचकर अपनी पसंद के पौधे प्राप्त कर सकते हैं।

​इस बार नर्सरी में पारंपरिक छायादार पौधों के साथ-साथ फलदार पौधों की सबसे अधिक मांग है। लोग अपने घरों के आंगन, खेतों और बाड़ों में फलदार पौधे लगाने में खासी रुचि दिखा रहे हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए नर्सरियों में विशेष वितरण व्यवस्था की गई है।

​खेतड़ी में लगा विशेष ट्रेनिंग कैंप

​पौधे केवल कागजों में दर्ज न रह जाएं और धरातल पर हकीकत में तब्दील हों, इसी बात को सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने खेतड़ी में एक दिवसीय विशेष प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया।

​इस प्रशिक्षण शिविर में जयपुर से आए वरिष्ठ विशेषज्ञ- सीसीएफ (CCF), डीसीएफ (DCF) और रिटायर्ड सीसीएफ जयप्रकाश ने वनकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों को वैज्ञानिक तकनीक से पौधारोपण करने का व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण दिया।

विशेषज्ञों ने समझाया कि यदि सही वैज्ञानिक तकनीक का पालन किया जाए, तो पौधा भीषण गर्मी या विपरीत मौसम में भी बिना सूखे तेजी से विकसित होता है।

वैज्ञानिक पद्धतियों से विकसित होंगे पौधे

  • ​गड्ढे का आकार: पौधा लगाने से कम से कम 10 से 15 दिन पहले 2x2x2 फीट का गड्ढा खोदना चाहिए। ऐसा करने से गड्ढे की मिट्टी पर सीधी धूप पड़ती है। जिससे उसमें मौजूद हानिकारक कीड़े और फंगस अपने आप नष्ट हो जाते हैं।
  • ​मिट्टी का मिश्रण: गड्ढे से निकाली गई 50% ऊपरी मिट्टी में 30% गोबर की पकी हुई खाद (या वर्मीकंपोस्ट) और 20% बालू रेत मिलाना चाहिए। दीमक के खतरे से बचाने के लिए इसमें नीम की खली या दीमक रोधी दवा का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
  • ​नर्सरी स्तर पर हमेशा स्वस्थ बीजों का चयन किया जाता है। बीजों को बोने से पहले रात भर पानी में भिगोकर फफूंदनाशी (Fungicide) से उपचारित किया जाता है। ​इन उपचारित बीजों को कोकोपीट और केंचुआ खाद युक्त थैली या ट्रे में बोया जाता है। सही तापमान और नमी मिलने पर 7 से 15 दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप लेने लगते हैं।
  • ​पौधा जमीन में उतारते समय पॉलीथिन थैली को ब्लेड से सावधानीपूर्वक काटना चाहिए ताकि पौधे की जड़ के आसपास की मिट्टी (Root Ball) किसी भी हाल में टूटे नहीं। पौधे को गड्ढे के ठीक बीचों-बीच सीधा रखना बेहद जरूरी है। पौधे की तना संधि (Grafting area/Stem node) हमेशा जमीन के स्तर के बिल्कुल बराबर होनी चाहिए।
  • पौधे के चारों तरफ तैयार किया गया मिट्टी का मिश्रण डालकर हाथों या पैरों से अच्छी तरह दबाना चाहिए ताकि अंदर कोई हवा की थैली न बचे।