बिहार सरकार ने वित्त रहित और अनुदानित शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए 461 करोड़ रुपये का सहायक अनुदान जारी किया है।

Bihar teachers salary Samrat Choudhary announcement

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। (File Photo)

  • Published: 19 Sep 2026, 02:31 PM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 02:31 PM IST

Bihar news: बिहार के वित्त रहित और अनुदानित शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से अपने बकाये वेतन और वित्तीय भुगतान का इंतजार कर रहे इन कर्मियों के लिए राज्य सरकार ने खजाना खोल दिया है। सरकार की ओर से इन संस्थानों के सुचारू संचालन और कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुल 461 करोड़ रुपये के सहायक अनुदान की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।

सरकार के इस महत्वपूर्ण फैसले से उन हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जो लंबे अरसे से वेतन और पारिश्रमिक न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट और चुनौतियों का सामना कर रहे थे।

सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
इस वित्तीय सहायता की घोषणा की जानकारी खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से साझा की।

वित्त रहित विद्यालय -महाविद्यालय के लिए खुशखबरी

शिक्षक एवं साक्षकेत्तर कर्मियों के भुगतान हेतु अनुदानित विद्यालयो एवं महाविद्यालयों के लिए कुल ₹ 461 करोड़ का सहायक अनुदान निर्गत किया गया हैं

शिक्षकों,कर्मियों एवम संस्थानों के हित निरंतर प्रयास- उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य

— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 19, 2026

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक हैंडल पर लिखा, "वित्त रहित विद्यालय-महाविद्यालय के लिए खुशखबरी। शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के भुगतान के लिए अनुदानित विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए कुल 461 करोड़ रुपये का सहायक अनुदान निर्गत किया गया है। शिक्षकों, कर्मियों और संस्थानों के हित निरंतर प्रयास- उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य।" उनके इस संदेश के बाद राज्यभर के शैक्षणिक हलकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

कहां और कैसे किया जाएगा इस राशि का उपयोग?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आर्थिक तंगी से जूझ रहे कई शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से कर्मचारियों का वेतन भुगतान अटका हुआ था। ऐसे में सरकार द्वारा जारी किया गया यह भारी-भरकम अनुदान इन संस्थानों के लिए एक मजबूत आर्थिक संबल साबित होगा।

इस पूरी राशि का मुख्य उपयोग शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक (शिक्षकेत्तर) कर्मचारियों के लंबित वेतन और पारिश्रमिक के भुगतान के लिए ही किया जाना है। इस फंड के आने से संस्थानों की खराब वित्तीय स्थिति में सुधार होगा और कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हो सकेगा।

शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा पर विशेष जोर
राज्य सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था को गुणात्मक रूप से बेहतर बनाने के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की पूरी सुरक्षा करने पर भी विशेष बल दिया गया है।

सरकार का मानना है कि किसी भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और सशक्त बनाने में शिक्षक और कर्मचारी रीढ़ की हड्डी की तरह होते हैं। इसलिए, उनके वित्तीय हितों को सुरक्षित रखना और समय पर उनका भुगतान सुनिश्चित करना शैक्षणिक संस्थानों के सुचारू रूप से संचालन के लिए बेहद आवश्यक है।