पटना36 मिनट पहले
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बिहार में गंडक नदी का जलस्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है। इससे बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है। कई जगह तटबंध, जमींदारी बांध और सुरक्षात्मक तटबंध टूट गए हैं। कई जगह ये क्षतिग्रस्त भी हुए हैं। इनके टूटने से बाढ़ का पानी तेजी से नए इलाकों और गांवों में पहुंच गया।
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के बाद गंडक में उफान आया। नासा की उपग्रह तस्वीरों और रिपोर्ट में भी बाढ़ की पुष्टि की गई है। तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर समेत छह जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सारण में स्थिति सबसे गंभीर है। जिले में 75,286 परिवारों की करीब 3,55,100 आबादी बाढ़ से प्रभावित है।
इनमें से 43,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य के छह जिलों के 466 गांव में पानी घुस गया है। 92,730 लोगों का पलायन हुआ है। राज्य की प्रमुख नदियां कई जगह खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में लाल निशान पार कर चुकी है। गंगा पटना के दीघाघाट, गांधीघाट और हाथीदह के अलावा भागलपुर और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर है। कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा भी कई जगह उफान पर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने कहा कि गंडक नदी का पानी छह जिलों के 30 प्रखंडों में फैला है। 156 पंचायतों में रहने वाली 7.75 लाख आबादी प्रभावित हुई है।
तटबंध टूटने से नाराज लोगों ने जेई को घेरा, नदी में फेंकने की दी धमकी जेई को घेरा: बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे जल संसाधन विभाग प्रक्षेत्र दिघवारा के जेई चन्द्रशेखर कुमार को ग्रामीणों ने चारों तरफ से घेर लिया। एसडीओ भी मौजूद: जेई चन्द्रशेखर कुमार के साथ विभाग के एसडीओ सुनील कुमार भी मौके पर मौजूद थे, जहां ग्रामीणों ने जमकर नाराजगी जताई। नदी में फेंकने की धमकी: तटबंध टूटने से नाराज ग्रामीणों ने जेई पर लापरवाही के आरोप लगाए और उन्हें उफनती नदी में धकेलने की कोशिश की।
एयर ड्रॉपिंग के दौरान कई घरों के छप्पर टूटे
सारण के पानापुर प्रखंड में बाढ़ पीड़ितों के लिए चलाई जा रही राहत सामग्री की एयर ड्रॉपिंग के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। सलेमपुर गांव में शनिवार को वायुसेना के हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री गिराए जाने के दौरान कई कर्कटनुमा घर क्षतिग्रस्त हो गए। पैकेट का वजन अधिक होने और ऊंचाई से गिरने से एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में 13 वर्षीय आदित्य कुमार, 8 वर्षीया तनुजा कुमारी, 13 वर्षीया ब्यूटी कुमारी, 17 वर्षीया सरिता कुमारी, 11 वर्षीय युवराज कुमार और प्रिया कुमारी सहित कुल एक दर्जन बच्चे शामिल हैं।
बांध में बहे 7 के शव बरामद, 5 और डूबे
गंडक नदी का तटबंध टूटने के तीन दिन बाद शनिवार को सारण के मकेर में अलग-अलग स्थानों से 7 लोगों के शव बरामद किए गए। ये सभी लोग बुधवार और गुरुवार को तटबंध टूटने के बाद आई तेज धारा में बह गए थे। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने स्थानीय लोगों और ट्रैक्टर की मदद से काफी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला। इसके अलावा जिले के अन्य हिस्सों में 5 अन्य लोग भी बाढ़ के पानी में डूब गए। पानापुर-सतजोड़ा मुख्य सड़क पार करने के दौरान रसौली गांव के दो युवक बह गए, जिनमें से एक का शव बरामद हुआ।
आगे क्या... जलस्तर में कमी: बारिश थमने से गंडक और गंगा के जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। भीषण भू-कटान: बहाव घटने से नदियों के तटीय इलाकों में तेजी से भू-कटान शुरू होगा। बीमारियों का खतरा: पानी जमा रहने से गांवों में जलजनित बीमारियों का प्रकोप फैलेगा।
नासा की रिपोर्ट...गंडक: उपग्रह की तस्वीरों से बाढ़ की भयावहता दिखी नासा की ‘अर्थ ऑब्जर्वेटरी’ ने 2 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी वैश्विक रिपोर्ट में बिहार और नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका की आधिकारिक पुष्टि की है। उपग्रह तस्वीरों और वैज्ञानिक आंकड़ों से यह साबित हुआ है कि यह बाढ़ सामान्य मौसमी बारिश नहीं, बल्कि अतिवृष्टि से उत्पन्न असाधारण स्थिति थी। नासा की रिपोर्ट के अनुसार, 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के लुंबिनी और गंडकी प्रांतों में भीषण बारिश हुई। इससे कई भूस्खलन हुए और गंडक (नारायणी) नदी में पानी का बहाव ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। नासा द्वारा 20 सितंबर और 29 सितंबर 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन से बाढ़ के विस्तार का स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण मिला है।
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