भारतीय सेना की ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स और सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को लेकर मेगा प्लान तैयार किया गया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क, हेलिपैड, रेलवे, संचार और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को तेजी से मजबूत किया जा रहा है.

सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए अलग-अलग एजेंसियों और बजट हेड्स को एक साथ जोड़कर सिंक्रोनाइज्ड अप्रोच अपनाई जा रही है. निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और निर्माण की गुणवत्ता बेहतर रहे.

सीमा क्षेत्रों में 22,156 किमी सड़कें बनाने की योजना

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की योजना के तहत सीमा क्षेत्रों में करीब 22,156 किलोमीटर लंबाई की 476 सड़कों का निर्माण किया जाना है. पिछले पांच सालों में रक्षा मंत्रालय ने BRO को करीब 27,668 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया है. इसके जरिए फॉरवर्ड एरिया में करीब 4,595 किलोमीटर सड़कें बनाई जा चुकी हैं. खास तौर पर उत्तरी सीमाओं पर फॉरवर्ड कनेक्टिविटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. मौजूदा अवधि में करीब 1,113 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा किया गया है.

चीन की तर्ज पर भारत का भी बॉर्डर रोड नेटवर्क मजबूत

उत्तरी सीमा पर मौजूद चीन ने एक्सियल और लेटरल रोड नेटवर्क के जरिए लेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी पर जोर दिया है. इसी को देखते हुए भारत के लिए भी उत्तरी सीमाओं पर तेजी से बॉर्डर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना ऑपरेशनल जरूरत है.

सड़क निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कई सुधार

BRO की सड़क निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कई सुधार किए जा रहे हैं. इनमें Detailed Project Report यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया में सुधार, उपकरणों का आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को शामिल करना, Engineering, Procurement and Construction यानी EPC मॉडल को बढ़ावा देना, वैधानिक मंजूरियों में तेजी और BRO के कैडर की समीक्षा शामिल हैं.

717 किमी लंबा ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट

जम्मू-कश्मीर में करीब 717 किलोमीटर लंबी Trans-Kashmir Connectivity विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई है. यह कनेक्टिविटी पुंछ-त्रिस्तार-बनाली-साधना पास-पनजी गली-जेड गली-SPG-रजदान-गुरेज-काोबल गली-सोनमर्ग रूट के जरिए विकसित की जाएगी.

इस परियोजना में साधना पास, पी गली, जेड गली और रजदान पास पर सुरंगों के निर्माण का प्रस्ताव है. परियोजना को चरणबद्ध तरीके से BRO द्वारा रक्षा मंत्रालय की General Staff फंडिंग के तहत पूरा किया जाएगा. इससे फॉरवर्ड एरिया, अलग-अलग सेक्टर और घाटियों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी.

लद्दाख में ड्रोन से तैयार हो रही DPR

सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर में तकनीक के इस्तेमाल का एक और उदाहरण लद्दाख में ड्रोन आधारित DPR तैयार करना है. यानी सड़क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की विस्तृत योजना तैयार करने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे कठिन भौगोलिक इलाकों में सर्वे और परियोजना की योजना बनाने में तेजी आने की उम्मीद है.

ट्रेन से कश्मीर पहुंची सेना की बटालियन

भारतीय सेना ने 13 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब एक Infantry Battalion को सैन्य विशेष ट्रेन के जरिए कश्मीर घाटी में पहुंचाया गया. इस ट्रेन में जवानों के साथ जरूरी सैन्य उपकरण भी शामिल थे. यह आवाजाही उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के जरिए हुई.

इसके अलावा 12 सितंबर 2025 को BD Bari से अनंतनाग तक सैन्य सामान की आवाजाही Military Freight/Goods Train के जरिए की गई. इसके लिए 20 BCN वैगन का इस्तेमाल किया गया.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर भी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा

भारत के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर में भी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर दिया जा रहा है. कॉरिडोर में मौजूदा Lines of Communication के लिए वैकल्पिक और अतिरिक्त कनेक्टिविटी (Redundancy) तैयार करने के उपाय किए जा रहे हैं. इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया जा रहा है.

कॉरिडोर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए जरूरी मंजूरियां दी जा चुकी हैं और परियोजनाओं के अनुमान तैयार किए जा रहे हैं. इसके साथ ही Force Preservation और Command and Control infrastructure का निर्माण भी जारी है.

बॉर्डर पोस्ट तक फुट ट्रैक, ऑपरेशनल ट्रैक और हेलिपैड

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने के लिए फॉरवर्ड एरिया में व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. इसमें सैनिकों के रहने की सुविधाएं, जरूरी सुविधाएं और फॉरवर्ड क्षेत्रों में तैनात हथियारों एवं सैन्य उपकरणों के संचालन के लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है.

दुर्गम सीमा क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने के लिए फुट ट्रैक, ऑपरेशनल ट्रैक और हेलिपैड बनाए जा रहे हैं. साथ ही दूरदराज और दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों की युद्धक तैयारी बनाए रखने के लिए Force Preservation Infrastructure पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर में काम आया नया MPU प्लान

Mobility Plan Unit (MPU) Policy 2025 को मौजूदा और भविष्य की ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से संशोधित किया गया है. नई नीति के तहत सालाना सैन्य अभ्यासों के दौरान MPU Bricks को सक्रिय करने की व्यवस्था की गई है, ताकि ऑपरेशन के दौरान अचानक बढ़ने वाली लॉजिस्टिक्स जरूरतों को पूरा किया जा सके.मंत्रालय के मुताबिक, इस व्यवस्था का ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रभावी इस्तेमाल किया गया.

4 रणनीतिक रेलवे लाइन और 4G कनेक्टिविटी पर भी फोकस

सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 4 रणनीतिक रेलवे लाइनों, 355 फॉरवर्ड लोकेशन तक 4G कनेक्टिविटी और 108 फॉरवर्ड लोकेशन तक बिजली कनेक्टिविटी की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इन परियोजनाओं पर अलग-अलग चरणों में योजना और निर्माण का काम चल रहा है.

सीमा सुरक्षा के साथ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी मजबूत

भारतीय सेना अब सीमा सुरक्षा को सिर्फ सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि सड़क, रेल, हेलिपैड, संचार, बिजली और लॉजिस्टिक्स के पूरे नेटवर्क को मजबूत करने पर फोकस कर रही है. खास तौर पर उत्तरी सीमाओं, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर में तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का उद्देश्य किसी भी आकस्मिक स्थिति में सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तेजी से आवाजाही सुनिश्चित करना और भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस को मजबूत करना है.

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.

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