Jul 28, 2026 09:14 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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5 Life Lessons for old age parents: बुढ़ापे में काफी सारे पैरेंट्स अपने बच्चों के बिहेवियर को लेकर दुखी रहते हैं और हमेशा रोते रहते हैं। लेकिन सारे बूढ़े पैरेंट्स को लाइफ के ये 5 लेसन जरूर याद रखने चाहिएं, जिससे बची-खुची जिंदगी हंसी-खुशी बीते।

life lessons for old age

बुढ़ापे में दुखी नहीं रहना तो ये 5 लाइफ लेसन जरूर याद रखें

जवानी तो बीत जाती है लेकिन बुढ़ापा काटना मुश्किल होता है। जीवन की सांझ बहुत धीरे ढलती है। इस उम्र तक पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे वक्त ठहर सा गया है। खासतौर पर अगर जीवनसाथी का साथ छूट चुका है और आप अकेले हैं तो ये सफर और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बच्चों की तरफ आपकी उम्मीदभरी निगाहें होती है। लेकिन वो बच्चे अपने परिवार, करियर, पैसों को बनाने में बिजी होते हैं। ठीक उसी तरह जैसे एक वक्त आपने खुद को काम के दायरे में बांध रखा था। बच्चों से मिली निराशा काफी सारे बुजुर्गों को अनकहे दुख में ढकेल देती है और वो चाहकर भी खुश नहीं रह पाते। दरअसल, वो समय के साथ भागती जिंदगी के कुछ सबक को जानबूझकर भूल जाते हैं। अगर बुढ़ापे में सुकून और खुशहाल जिंदगी बितानी है तो इन 5 बातों को गांठ बांध लें। ताकि जीवन की सांझ हंसी-खुशी बीते और आप किसी के ऊपर बोझ ना बनकर रह जाएं।

बुढ़ापे में सुखी रहने के ये 5 मंत्र हमेशा याद रखें

अपने घर में रहने की कोशिश करें

इस बात को याद रखें कि बच्चों का घर आपका खुद का घर नहीं हो सकता। कोशिश करें कि अपने घर में ही रहें। अगर बच्चों के साथ रहना पड़ रहा तो उनकी दिनचर्या के अनुसार खुद को ढालें और अपनी तरफ से घर के कामों को बंटाने की कोशिश करें। बच्चों के घर में मेहमान की तरह रहने की जरूरत नहीं लेकिन हर किसी पर अपने नियम थोपना भी गलत है। इसलिए हमेशा समझदारी के साथ बीच का रास्ता निकालें।

बुढ़ापे के लिए कुछ पैसे बचा कर रखें

अपनी जीवनभर की कमाई बच्चों के ऊपर सभी पैरेंट्स लगाते हैं। लेकिन बच्चे आप पर कितना खर्च करेंगे इस पर आपका कंट्रोल नहीं है। कोशिश करें कि धीरे-धीरे कुछ पैसे बुढ़ापे के लिए जोड़ें। किसी ऐसी जगह इन्वेस्ट करें जहां से बुढ़ापे में आपको थोड़ी इनकम मिले और आप पूरी तरह से पैसों के लिए बच्चों पर निर्भर ना रहें। ये एक समझदारी भरा फैसला है। बच्चों के ऊपर अपनी जरूरतें थोपना ठीक नहीं, ऐसे में बच्चें मां-बाप को जल्दी ही बोझ समझने लगते हैं।

अपने काम खुद करें

जब तक हाथ-पैर सही से काम कर रहे हैं, धीरे या तेज अपने कामों को खुद से ही करें। बच्चों से सेवा करवाने का भाव ज्यादा दिल में ना लाएं। क्योंकि आजकल के व्यस्त समय में बेटे-बहू या बेटी-दामाद के पास इतना वक्त नहीं है कि वो आपकी सेवा कर पाएं।

सेहत का ध्यान रखें

सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। मन की खुशी और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए खुद से कोशिश करें। वॉक करें, योग करें और अपने पैसों से दवा वगैरह पर खर्च कर हेल्दी बनें। सेहत अच्छी होगी तो मन अच्छा रहेगा और आप प्रसन्न रहेंगे।

केवल बच्चों तक सीमित ना रहें

माना कि आपके बच्चे आपकी दुनिया हैं। लेकिन बच्चों के बड़े होने के साथ अपने इस दायरे को बढ़ाएं। दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसियों के साथ मेल-जोल बढ़ाएं। कुछ समय उन लोगों के साथ बिताएं। ये आपके मन को खुशी देंगे और अकेलेपन से भी आप दूर रह सकेंगे।