
बिहार में ट्रेन पर पत्थरबाजी.
बिहार में रील बनाने के लिए ट्रेनों पर पत्थरबाजी की जा रही है. वंदे भारत, तेजस और जन शताब्दी जैसी आधुनिक ट्रेनों को रीलबाज निशाना बना रहे हैं. बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के 12 जिलों को ट्रेन पर पत्थरबाजी के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है. वास्तव में रील बनाने का चस्का बिहार में रेलवे और रेल यात्रियों के लिए खतरा बन गया है. बिहार के ऐसे 12 जिलों में रेलवे का हॉटस्पॉट चिन्हित किया गया है, जहां रीलबाज रील बनाने के लिए ट्रेनों पर पत्थरबाजी करते हैं. इनमें राजधानी पटना समेत भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, बेतिया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, सारण, गया, वैशाली और नवादा शामिल है.
बिहार में ट्रेनों पर पत्थरबाजी की बढ़ रही घटनाओं के बाद जब विशेष अभियान चलाया गया तो इसका खुलासा हुआ कि दरअसल ट्रेनों पर पत्थरबाजी रील बनाने के लिए किया जा रहा है.
5 दिनों में 134 गिरफ्तार
आश्चर्यजनक रूप से पिछले 5 दिनों में ही 134 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें 40 नाबालिक हैं. राजधानी, वंदे भारत जैसी ट्रेनों में लगे कैमरे के आधार पर इन रीलबाज पत्थरबाजों की पहचान की गई है.
पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन पर पत्थर फेंकने की घटनाएं अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा दर्ज की गईं. इसके अलावा आमतौर पर छुट्टी के दिन यानी शनिवार और रविवार को पत्थरबाजी के मामले ज्यादा सामने आए हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि वे ये हरकतें रील बनाने, वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए करते हैं.
12 जिलों में पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
पुलिस मुख्यालय ने अब RPF और जीआरपी को यह साफ निर्देश दिया है कि राज्य के 12 जिलों में पत्थरबाजी वाले, जिन स्थलों को चिन्हित किया गया है वहां खास निगरानी रखी जाए.
ट्रेन पर पत्थरबाजी करने वालों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और रेल यात्रियों की जान-माल को खतरे में डालने जैसे आरोपों में कार्रवाई करें. ऐसे मामलों में तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान है. सोशल मीडिया कंटेंट के नाम पर रेलवे और रेल यात्रियों सुरक्षा से खिलवाड़ की छूट नहीं दी जा सकती.
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रूपेश कुमार
लेखक TV9 भारतवर्ष में बिहार और झारखंड के ब्यूरो हेड हैं. इसके पहले वर्षों तक न्यूज़18 में काम किया है. लगभग तीन दशक से टीवी पत्रकारिता में फील्ड, डेस्क और वर्षों तक एंकरिंग भी करते रहे हैं.
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