खेती में बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से सीमित आमदनी के बीच गुना के बमौरी के बींदाखेड़ी गांव के किसान बबलू किरार ने करीब 6 साल पहले मिर्च की खेती शुरू की। शुरुआत में तकनीक और बाजार की समझ बनाने में समय लगा, लेकिन ड्रिप, मल्चिंग और फसल चक्र को खेती का

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अब वे 2 एकड़ में हरी मिर्च, 2 एकड़ में शिमला मिर्च और 4 एकड़ में गेंदे की खेती कर रहे हैं। मिर्च की खेती में एक एकड़ पर करीब 1.50 लाख रुपए खर्च कर औसतन 180 क्विंटल उत्पादन ले रहे हैं। औसत 35 से 40 रुपए किलो भाव मिलने पर एक एकड़ से करीब 6.50 लाख रुपए की बिक्री हो जाती है। खर्च निकालने के बाद करीब 5 लाख रुपए तक का मुनाफा बचता है।

10 हजार पौधे, 180 क्विंटल तक उत्पादन

बबलू बताते हैं कि हाइब्रिड मिर्च की खेती में एक एकड़ में करीब 10 हजार पौधे लगाए जाते हैं। ड्रिप और मल्चिंग के कारण पौधों को जरूरत के अनुसार पानी और पोषक तत्व मिलते हैं। एक एकड़ में करीब 1.50 लाख रुपए लागत आती है।

मौसम और बाजार के हिसाब से मिर्च का भाव 20 से 80 रुपए किलो तक रहता है। उन्हें औसतन 35 से 40 रुपए किलो भाव मिल रहा है। एक एकड़ से करीब 180 क्विंटल मिर्च निकलने पर 6 से 6.50 लाख रुपए तक की बिक्री हो जाती है। इस तरह लागत निकालने के बाद करीब 5 लाख रुपए तक की आय बचती है।

बबलू 2 एकड़ में हरी मिर्च, 2 एकड़ में शिमला मिर्च और 4 एकड़ में गेंदे की खेती कर रहे हैं।

बबलू 2 एकड़ में हरी मिर्च, 2 एकड़ में शिमला मिर्च और 4 एकड़ में गेंदे की खेती कर रहे हैं।

गेंदे को बनाया फसल चक्र का हिस्सा

मिर्च के साथ गेंदे की खेती भी कर रहे हैं। इस साल 4 एकड़ में गेंदा लगाया है। बबलू बताते हैं कि अलग-अलग फसलों को खेत में लेने से एक ही फसल पर निर्भरता नहीं रहती। गेंदा मिर्च की फसल में कीट प्रबंधन में भी मदद करता है। इसे ट्रैप क्रॉप के तौर पर खेत में लगाने से कुछ कीट मिर्च के बजाय गेंदे की ओर आकर्षित होते हैं। इससे फसल को बचाने में मदद मिलती है और एक अतिरिक्त फसल से आमदनी भी होती है।

देखो, सीखो और सीखकर करो... इसी मॉडल से किसानों को सिखा रहे

खुद मिर्च की खेती करने के साथ बबलू आसपास के किसानों को भी इसकी तकनीक बता रहे हैं। बमौरी विकासखंड में करीब 1000 एकड़ क्षेत्र में मिर्च की खेती करने वाले किसानों को वे पौध, ड्रिप, मल्चिंग, खाद, दवाओं और वाटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर के इस्तेमाल की जानकारी देते हैं।

उनका कहना है कि किसान सिर्फ किसी की बात सुनकर तकनीक न अपनाएं, पहले खेत में देखकर समझें और फिर अपने खेत में प्रयोग करें। इसी वजह से उन्होंने अपना मॉडल “देखो, सीखो और सीखकर करो” रखा है।

बबलू किरार खुद तकनीक अपनाने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी खेती के नए तरीके सीखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

बबलू किरार खुद तकनीक अपनाने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी खेती के नए तरीके सीखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

अगले साल खेत पर ही तैयार करेंगे मिर्च की पौध

बबलू अब मिर्च की पौध के लिए भी दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहते। अगले साल खेत पर नेट हाउस तैयार कर मिर्च की पौध तैयार करने की योजना है। इसके बाद अच्छी गुणवत्ता वाली पौध दूसरे किसानों को भी उपलब्ध कराने की तैयारी है।

तकनीक से खेती में बढ़ी संभावनाएं

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केपीएस किरार के अनुसार, जिले में किसान अब सब्जी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। ड्रिप, मल्चिंग, फर्टिगेशन और फसल चक्र जैसी तकनीकों से पानी और खाद का बेहतर उपयोग कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। बबलू किरार का खेत इसका उदाहरण है, जहां वे खुद तकनीक अपनाने के साथ दूसरे किसानों को भी खेती के नए तरीके सीखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।