महंगाई का असर अब घर में बनने वाले खाने पर भी साफ दिखाई दे रहा है. अगस्त में एक सामान्य नॉन-वेज थाली की लागत सालाना आधार पर 5% बढ़कर करीब ₹57.50 हो गई. एक साल पहले इसकी लागत लगभग ₹55 थी. वहीं, वेज थाली की कीमत 1% बढ़कर ₹29.50 हो गई, जो पिछले साल अगस्त में करीब ₹29 थी. यह दावा CRISIL Intelligence की ताजा रिपोर्ट में किया गया है.
नॉन-वेज थाली महंगी होने की सबसे बड़ी वजह चिकन की कीमत में बढ़ोतरी रही. रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में ब्रॉयलर चिकन की कीमत सालाना आधार पर करीब 10% बढ़ी. नॉन-वेज थाली की कुल लागत में चिकन की हिस्सेदारी लगभग आधी है. चिकन के दाम बढ़ने से पूरी थाली की कीमत पर सीधा असर पड़ा. इसके पीछे चिकन के चारे की बढ़ी हुई लागत भी एक वजह रही.
प्याज ने बढ़ाया वेज थाली का खर्च
वेज थाली में प्याज ने सबसे ज्यादा दबाव बढ़ाया. अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43% बढ़कर करीब ₹40 प्रति किलो हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह करीब ₹28 किलो थी. महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से तैयार होने वाली फसल और स्टॉक को नुकसान पहुंचा. इसके अलावा, रबी प्याज का उत्पादन भी करीब 5-6% कम रहने का अनुमान है. इससे बाजार में प्याज की सप्लाई पर असर पड़ा और कीमतें बढ़ गईं.
आलू और टमाटर हुए सस्ते
खाने का खर्च सिर्फ सब्जियों की वजह से ही नहीं बढ़ा. खाने वाले तेल की कीमत 11% और LPG की कीमत 10% बढ़ी. इससे घर में खाना पकाने का कुल खर्च और बढ़ गया. हालांकि, कुछ चीजों की कीमत कम होने से वेज थाली की महंगाई ज्यादा नहीं बढ़ी. अगस्त में आलू के दाम 12% और टमाटर के दाम 28% घटे. आलू की कीमत में कमी का कारण रबी उत्पादन में 2-3% बढ़ोतरी और ज्यादा क्षेत्र में खेती को माना गया है. वहीं, बाजार में टमाटर की आवक बढ़ने से इसके दाम नीचे आए.
अगस्त में महीने के हिसाब से तस्वीर थोड़ी अलग
अगर जुलाई की तुलना अगस्त से करें तो वेज थाली की कीमत 1% बढ़ी, जबकि नॉन-वेज थाली की कीमत 1% कम हुई. अगस्त में प्याज की कीमत एक महीने में करीब 17% बढ़ी, जिससे वेज थाली महंगी हुई. दूसरी ओर, टमाटर के दाम 7% घटे, जिससे बढ़ोतरी कुछ कम रही. नॉन-वेज थाली के मामले में ब्रॉयलर चिकन की कीमत महीने के आधार पर करीब 4% घटी. श्रावण महीने में चिकन की मांग कमजोर रहने से इसके दाम नीचे आए और इसका असर नॉन-वेज थाली की कुल लागत पर भी पड़ा.
CRISIL की थाली में क्या-क्या शामिल है?
CRISIL की वेज थाली में रोटी, सब्जी, चावल, दाल, दही और सलाद शामिल होते हैं. वहीं, नॉन-वेज थाली में दाल की जगह ब्रॉयलर चिकन शामिल किया जाता है. इसकी कीमत की गणना देश के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम हिस्सों में रोजमर्रा की खाद्य सामग्री की मौजूदा कीमतों के आधार पर की जाती है. इस रिपोर्ट से पता चलता है कि घर के खाने की कीमत सिर्फ सब्जियों के दाम से तय नहीं होती. प्याज, चिकन, खाने का तेल, LPG और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें भी सीधे आपके महीने के किचन बजट को प्रभावित करती हैं.
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महेंद्र भार्गव
महेंद्र भार्गव एक अनुभवी बिजनेस और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो 2018 से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. वर्तमान में महेंद्र TV9 Bharatvarsh के साथ जुड़े हुए हैं, जहां बिजनेस और ऑटोमोबाइल से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट्स, रिव्यू, एक्सक्लूसिव स्टोरीज़ और इन-डेप्थ एनालिसिस पर काम कर रहे हैं. ऑटोमोबाइल और बिजनेस सेगमेंट में 5+ सालों के अनुभव के साथ, Mahendra ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. महेंद्र नवदुनिया (दैनिक जागरण ग्रुप) अखबार से रिपोर्टर के तौर पर शुरुआत की. आगे ETV Bharat, Dainik Bhaskar, News18 और Zee News में उन्होंने डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में कई भूमिकाओं में काम किया.
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