सरकारी नौकरी करते हुए भ्रष्टाचार करने वाले बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड (BSBCCL) के GM कमलेश कुमार गायब हैं। ठेकेदारों से तय पैमानों पर मोटा कमीशन वसूलकर पटना से नोएडा तक 12 से अधिक कीमती बेनामी संपत्तियां खरीदने वाले यह अफसर अब छापेमारी के ब

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संडे बिग स्टोरी में जानिए, कैसे कमलेश कुमार ने काली कमाई की? अपने और पत्नी के अलावा किस-किस रिश्तेदार के नाम पर बेनामी संपत्ति खरीदी?

कमलेश के कमीशन लेने के 2 तरीके

कमलेश कुमार मूल रूप से वैशाली के जन्दाहा के रहने वाले हैं। 2005 में बिहार सरकार की नौकरी में आए। बतौर असिस्टेंट इंजीनियर भवन निर्माण विभाग को जॉइन किया था। अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर भी हुआ। बदलते समय के साथ प्रमोशन हुआ।

विभाग ने इन्हें प्रमोशन देकर सुपरिटेंडिंग इंजीनियर बनाया। फिर हाल में ही विभाग ने इन्हें अपनी कंपनी बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड का GM (टेक्निकल) बनाया। कमलेश कुमार का सबकुछ बढ़िया चल रहा था। अंदर ही अंदर जमकर काली कमाई का खेल चल रहा था।

नाम न छापने की शर्त पर एक ठेकेदार ने बताया कि कमलेश कुमार प्रोजेक्ट्स के हिसाब से अपने चहेते ठेकेदारों का सलेक्शन करते थे। अंदर ही अंदर सबकुछ तय होता था। नए और पुराने ठेकेदारों के लिए इन्होंने अलग-अलग कमीशन का पैमाना पहले से ही तय कर रखा था।

पहला: नए ठेकेदार से ये प्रोजेक्ट के तय बजट का 4 से 5 प्रतिशत कमीशन लेते थे।

दूसरा : पुराने ठेकेदारों से प्रोजेक्ट के तय बजट का 2 से 3 प्रतिशत कमीशन ले रहे थे।

सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के काम को जानिए

  • अपने क्षेत्र या सर्किल में चल रहे प्रोजेक्ट्स के तहत सभी सरकारी भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्यों की क्वालिटी और डेवलपमेंट वर्क नियमित समीक्षा करना।
  • बड़े पैमाने पर आने वाले प्रोजेक्ट्स, उसका अनुमानित लागत और डिजाइनों की तकनीकी जांच कर उन्हें अप्रूव करना।
  • अपने सर्किल के तहत आने वाले एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के काम का मूल्यांकन और नियंत्रण करना।
  • निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले सामान, मानकों की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना, ताकि भवनों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
  • बजट के दायरे में रहकर प्रोजेक्ट्स का काम पूरा करवाना, प्रशासनिक कामों को देखना और अपने से सीनियर अधिकारियों को उसका डेवलपमेंट रिपोर्ट भेजना होता है।
पटना के राजीव नगर में कमलेश का बन रहा आलीशान घर।

पटना के राजीव नगर में कमलेश का बन रहा आलीशान घर।

परेशान लोगों ने की थी कंप्लेन

सूत्र बताते हैं कि कमलेश कुमार के भ्रष्टाचार का लेवल काफी बढ़ चुका था। भवन निर्माण विभाग के लिए काम करने वाले ठेकेदार बेहद परेशान थे। इनसे जुड़े किसी शख्श ने आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को लिखित शिकायत तब की थी, जब वो सुपरिटेंडिंग इंजीनियर थे। इसके बाद EOU हरकत में आई।

एक स्पेशल टीम बनाकर अंदर ही अंदर कमलेश कुमार की पूरी कुंडली खंगालनी शुरू की। कई दिनों से चल रही जांच के दरम्यान उनके भ्रष्टाचार किए जाने के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए।

इस बीच विभाग ने उन्हें भवन निर्माण निगम लिमिटेड का GM बना दिया था। फिर भी EOU की जांच नहीं रुकी। कार्रवाई आगे बढ़ी। ठोस सबूतों के आधार पर 21 सितंबर को पटना में EOU ने कमलेश कुमार के खिलाफ सरकारी से सैलरी से 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार आय से अधिक का केस दर्ज किया। जो 103.30 प्रतिशत अधिक है। इसके बाद 22 सितंबर को जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने इनके 4 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

छापेमारी में EOU को मिला

  • FIR से अलग जन्दाहा में सर्वोदय मैदान इलाके में G+2 की बिल्डिंग। इसके अलावा दूसरा घर बन रहा।
  • लग्जरी इनोवा क्रिस्टा गाड़ी का पेपर। (बेनामी)
  • SBI, ICICI और HDFC बैंक में 16 अकाउंट की डिटेल।
  • बीमा कंपनियों में इन्वेस्टमेंट के पेपर।
  • लाखों रुपए की ज्वेलरी।

पत्नी-बेटों के अलावा रिश्तेदारों के नाम खरीदी बेनामी संपत्ति

काली कमाई से कमलेश कुमार ने बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक बेनामी संपत्ति खरीदी है। जो पटना, वैशाली, भागलपुर और नोएडा में खरीदी गई है। इसे खरीदने में कैश का इस्तेमाल अधिक हुआ है। जो पेपर बरामद हुए हैं, वो बाजार भाव से बहुत कम हैं। कमलेश कुमार ने प्रॉपर्टी को खुद के नाम, हाउस वाइफ मीरा कुमारी, दो बेटों कीर्ति वर्धन और विभु भूषण के अलावा भाई व दूसरे रिश्तेदारों के नाम खरीद रखा है।

वैशाली से पटना और नोएडा तक खरीदी 11 प्रॉपर्टी

कमलेश कुमार के खिलाफ दर्ज FIR में EOU ने कुल 12 प्रॉपर्टी का जिक्र किया है। एक पुश्तैनी प्रॉपर्टी को छोड़कर इसमें 11 प्रॉपर्टी कमलेश ने खुद खरीदी है। इसमें 4 प्रॉपर्टी ऐसी है, जिसे कमलेश ने खुद के और अपनी पत्नी मीरा कुमारी के नाम पर खरीद रखा है। जिसमें पटना और नोएडा का फ्लैट और वैशाली के जन्दाहा की दो जमीन है।

जबकि, जन्दाहा में ही पत्नी मीरा के नाम पर अलग से दो जमीन खरीद रखी है। इसके बाद जन्दाहा में ही एक जमीन पत्नी और दो बेटों कीर्ति व विभु के नाम पर ले रखी है। पटना के राजीव नगर की जमीन कमलेश ने खुद के और बेटे कीर्ति के नाम से खरीदी है। वहीं, दो प्रॉपर्टी ऐसी है, जो पत्नी, भाई और दूसरे रिश्तेदारों के नाम से खरीदी गई थी।

प्रॉपर्टी खरीदने और बनाने पर 4.70 करोड़ रुपए खर्च

प्रॉपर्टी खरीदने और उसे बनाने में कमलेश कुमार ने जो खर्च किया है, वो उन्हें सरकार से मिलने वाली सैलरी से कहीं अधिक है। अब तक इनकी कुल सैलरी 2.28 करोड़ रही है। इसमें सैलरी का एक तिहाई मतलब 76 लाख रुपया घर खर्च और करीब 40 लाख रुपए दोनों बेटों की पढ़ाई पर खर्च कर चुके हैं।

15 लाख रुपए प्रॉपर्टी के स्टाम्प शुल्क पर खर्च कर चुके हैं। जबकि, FIR में प्रॉपर्टी खरीदने, घर व दुकान बनाने का खर्च करोड़ों में दिखाया गया है। इस पर कुल 4 करोड़ 70 लाख 5 हजार रुपया खर्च किया गया है।

इसमें दो प्रॉपर्टी बेहद कीमती है। दोनों पटना के राजीव नगर में है। इसमें एक दो दुकान के साथ तीन कट्‌ठा जमीन खरीदने पर 1 करोड़ 56 लाख 25 हजार रुपए कमलेश ने खर्च किया है।

इसी तरह राजीव नगर के रोड नंबर 25C में ढाई कट्‌ठा जमीन खरीद कर उस पर G+4 घर बनाने पर 1.20 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं, जन्दाहा में पुश्तैनी जमीन पर घर बनाने में इन्होंने 80 लाख रुपया खर्च किया है।

अब आगे क्या?

  • अब तक की जांच में EOU के हाथ जो बैंक डिटेल्स लगे हैं, एक-एक करके सभी को खंगाला गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अलग-अलग लोगों ने कमलेश कुमार के कई अकाउंट में मोटी रकम भेजे हैं। ये लोग कौन हैं? उन्होंने रुपए क्यों भेजे थे? कहीं काली कमाई को व्हाइट करके तो नहीं भेजा गया? इस पॉइंट पर जांच चल रही है।
  • इसके लिए जिन लोगों ने भी रुपए भेजे हैं, उन सभी को नोटिस देकर बुलाया जाएगा। उन सभी से पूछताछ होगी। दूसरी तरफ छापेमारी के दिन कमलेश किसी भी ठिकाने पर टीम को नहीं मिले थे। न ही उनके परिवार के लोग। उन्हें भी नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
  • उन्हें बताना होगा कि इतनी संपत्ति कैसे खरीदी? रुपए कहां से आए? इस मामले में अब तक की कार्रवाई के बारे में लिखित तौर पर भवन निर्माण विभाग को जानकरी दे दी गई है।