मोहम्मद शहाबुद्दीन के गढ़ में घुसकर उसके खौफ के साम्राज्य को मिटाने वाले IPS अधिकारी रत्न संजय बिहार आ रहे हैं। दूसरी ओर बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए सीनियर IPS अधिकारियों को जिलों की कमान सौंपी गई है।

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ADG से लेकर DIG स्तर के 36 पुलिस अधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी बनाया है। इनमें ADG के. एस. अनुपम, अमित लोढ़ा, नैय्यर हसनैन खान और अमृत राज शामिल हैं। सुपरकॉप कहे जाने वाले इन पुलिस अधिकारियों को जानने के लिए पढ़िए रिपोर्ट..।

1998 बैच के IPS अधिकारी रत्न संजय कटियार बिहार लौट रहे हैं। वह SSB के IG के रूप में लखनऊ में सेवाएं दे रहे थे। गृह मंत्रालय ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से मुक्त कर दिया है। पटना आकर पुलिस मुख्यालय में योगदान देंगे।

रत्न संजय बिहार में सुपरकॉप के रूप में फेमस हैं। उन्होंने करीब दो दशक तक सीवान में राज करने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन के आतंक के साम्राज्य को तहस-नहस कर दिया था।

रत्न संजय ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो बाहुबलियों और माफियाओं को चुनौती देने में पीछे नहीं रहते। 2004 में एक ऐसी घटना घटी थी जो बिहार ही नहीं पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी।

शहाबुद्दीन के घर पर छापेमारी, मिली पाकिस्तानी AK-47

बात 16 अगस्त 2004 की है। सात-आठ युवकों ने सीवान के गौशाला रोड स्थित राजीव किराना स्टोर पर धावा बोलकर कैश लूट लिया। सभी धमकी देते हुए निकले कि मुंह खोला तो बुरा अंजाम होगा।

दुकान में बैठे राजीव ने विरोध किया तो उसकी पिटाई कर दी गई। खतरा देख गिरीश बाथरूम में गया और एसिड की बोतल लाकर बदमाशों को डराया कि भागो नहीं तो एसिड फेंक देंगे।

यह देख सभी भाग गए, लेकिन कुछ ही समय बाद झुंड बनाकर लौटे। राजीव के साथ उसके भाई गिरीश और सतीश को भी उठा लिया। तीनों को प्रतापपुर लेते गए। वहां ईंख के खेत के पास गिरीश और सतीश को पेड़ से बांध दिया। राजीव को बैठाकर रखा गया। कुछ देर बाद तत्कालीन सांसद शहाबुद्दीन वहां पहुंचे।

शहाबुद्दीन ने अपना कोर्ट लगाया और फैसला सुनाया कि दोनों को एसिड से स्नान कराओ। शहाबुद्दीन का फरमान सुनते ही उनके गुर्गों ने गिरीश और सतीश पर तेजाब डालना शुरू किया। दोनों चीखते रहे, एसिड से धुंआ उठता रहा। गंध फैलती रही। दोनों की छटपटाहट पर किसी को रहम नहीं आई। मरने के बाद तक दोनों पर तेजाब डाला गया। बाद घटना के गवाह राजीव की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

शहाबुद्दीन के आदेश के बाद गिरीश और सतीश को तेजाब से जला दिया गया था। प्रतीकात्मक तस्वीर।

शहाबुद्दीन के आदेश के बाद गिरीश और सतीश को तेजाब से जला दिया गया था। प्रतीकात्मक तस्वीर।

उस समय रत्न संजय सीवान के एसपी थे। शहाबुद्दीन का खौफ इतना था कि उसके घर बिना उसकी मर्जी के पुलिस अधिकारी नहीं जाते थे। रत्न संजय ने बिना डरे प्रतापपुर स्थित उसके घर पर छापेमारी की।

शहाबुद्दीन के गुर्गों ने पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस के जवान पीछे नहीं हटे। गोली का जवाब गोली से दिया। काफी देर तक मुठभेड़ चली। इसके बाद पुलिस की टीम शहाबुद्दीन के घर में घुसी। उसके घर से पाकिस्तानी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के मुहर लगे AK-47 राइफल बरामद किए गए।

ADG तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा को लखीसराय और शेखपुरा की जिम्मेदारी मिली है। 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी अमित ने अपने पुलिस अनुभवों पर 'बिहार डायरीज' नाम की किताब लिखी।

इसके आधार पर ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’ वेब सीरीज बनी।

अमित नालंदा, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, गया और शेखपुरा जैसे जिलों में रहें। 2006 में शेखपुरा के कुख्यात गैंगस्टर अशोक महतो और उसके दोस्त पिंटू महतो को जेल भेजकर अमित चर्चा में आए थे। अशोक महतो को घुटनों पर लाकर उन्होंने शेखपुरा को गैंगवार और अपराधियों के आतंक से मुक्ति दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

अशोक महतो नवादा जेल ब्रेक कांड, शेखपुरा के मनीपुर नरसंहार, विधायक पर बम से हमला सहित बड़े आपराधिक मामलों में आरोपी था। वह नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, नालंदा सहित पांच जिलों में आतंक का दूसरा नाम माना जाता था।

90 के दशक में नवादा के वारसलीगंज और शेखपुरा के ससवहना में कुख्यात अपराधियों के दो गैंग थे। एक अखिलेश सिंह और दूसरा अशोक महतो का था। दोनों के बीच गैंगवार की घटनाएं होती रहती थीं। अमित लोढ़ा ने इसे खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई।

अमित लोढ़ा का जन्म राजस्थान के जयपुर में हुआ था। उन्होंने जयपुर के सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ाई की। पहले ही प्रयास में दाखिला लेकर IIT दिल्ली से बीटेक किया। 25 साल की उम्र में UPSC की परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बने।

ADG (विधि व्यवस्था) के. एस. अनुपम को पटना जिला की जिम्मेदारी मिली है। 1998 बैच की IPS अधिकारी अनुपम का पूरा नाम कासे सुहिता अनुपम है। वह मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की रहने वाली हैं। बिहार कैडर की अधिकारी अनुपम के पास ADG (CID) का अतिरिक्त प्रभार भी है।

जमुई में नाबालिग लड़की के साथ मारपीट और छेड़छाड़ मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सख्त चेतावनी देने के चलते वह पिछले दिनों चर्चा में आईं। उन्होंने कहा था कि अगर कोई पीड़िता का चेहरा ब्लर किए बिना वीडियो शेयर करेगा तो उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट लगाया जाएगा।

28 साल की पुलिस सेवा के दौरान अनुपम को कई अवार्ड मिले। उन्हें 2008 में वीरता के लिए पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री और 2015 में पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किया गया। 2025 में अनुपम को राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस से सम्मानित किया गया।

अनुपम ने सीआरपीएफ में डीआईजी के पद पर काम किया है। बिहार में आईजी मॉडर्नाइजेशन, गृह विभाग में विशेष सचिव रही हैं।

ADG (बी-सैप) नैयर हसनैन खान को मुजफ्फरपुर जिले का नोडल ऑफिसर बनाया गया है। नई जिम्मेदारी मिलते ही उन्होंने मुजफ्फरपुर SSP और SDPO ऑफिस का निरीक्षण किया। यहां लंबित फाइलों की समीक्षा की, अपराध रोकने के निर्देश दिए।

1996 बैच के आईपीएस अधिकारी नैयर हसनैन खान एसएसबी के आईजी, स्पेशल विजिलेंस यूनिट के एडीजी और ईओयू के एडीजी जैसे अहम पदों पर रहे हैं। EOU के एडीजी रहते हुए नैयर ने नीट पेपर लीक मामला सामने लाया था।

नैय्यर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद UPSC परीक्षा की तैयारी की और बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी बने।

शुरुआती पोस्टिंग में इन्होंने नक्सलियों के खिलाफ अभियान से अपनी पहचान बनाई। इनके पटना एसएसपी रहते हुए चर्चित किसलय अपहरण कांड के आरोपी को एनकाउंटर में मार गिराया गया था। बच्चे को सही सलामत परिवार को सौंपा गया था।

नैय्यर को नेपाल में 2016 में आए भूकंप में बेहतर काम करने के लिए डीजी एसएसबी गोल्डन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इन्होंने पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अजय खत्री नाम के एक व्यक्ति के मकान पर पुलिस की मदद से दबंगों ने कब्जा कर लिया था। पुलिस ने पीड़ित दंपति को ही फर्जी केस में जेल भेज दिया था।

इस बात की जानकारी मिलने पर उन्होंने जांच कराई। थानेदार और केस के आईओ दोषी मिले। दोनों को सस्पेंड कर विभागीय जांच का निर्देश दिया। पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र में मुफ्त सब्जी नहीं देने पर नाबालिग सब्जी विक्रेता को जेल भेजने के मामले में पूरे अगमकुआं थाना को सस्पेंड कर दिया था।

ADG अमृत राज को भोजपुर जिले की जिम्मेदारी मिली है। 1998 बैच के IPS अधिकारी अमृत ​​राज 28 साल से पुलिस अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। जुलाई 2026 में हुए तबादले में इन्हें बिहार पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) का ADG बनाया गया था।

अमृत राज को 2005 और 2016 में वीरता के लिए पुलिस पदक मिला। 2015 में अमृत सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किए गए थे।