स्विस ऑफिस कल्चर के ये 5 नियम उड़ा देंगे होश! क्या भारत में मुमकिन है ऐसी वर्क लाइफ?

स्विस दफ्तरों का ये सच उड़ा देगा होश

आज के दौर में जब हर कोई वर्क लाइफ बैलेंस (Work Life Balace) की बात कर रहा है, तब एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कॉर्पोरेट जगत में तहलका मचा दिया है. जर्मनी में रहने वाली भारतीय प्रोडक्ट मैनेजर सिमरन खोखा ने अपने इंस्टाग्राम पर स्विस (Switzerland) कॉर्पोरेट कल्चर से जुड़े ऐसे नियम साझा किए हैं, जिन पर भारतीय कर्मचारियों के लिए यकीन करना मुश्किल है. यह पोस्ट वायरल होते ही भारत और विदेशों के वर्कप्लेस की तुलना पर एक नई बहस छिड़ गई है. आइए जानते हैं क्या हैं वो बातें जो स्विस ऑफिस को भारतीय ऑफिसों से बिल्कुल अलग बनाती हैं.

दफ्तर में देर तक रुकना वफादारी नहीं

सिमरन ने बताया कि स्विस दफ्तरों में मीटिंग तय समय पर ही शुरू होती हैं. यहां कुछ मिनट की देरी को भी बेहद गैर-पेशेवर माना जाता है. यहां इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी देर डेस्क पर बैठे हैं, बल्कि आपके काम के नतीजे देखे जाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि यहां रोज शाम को देर तक दफ्तर में रुकना डेडिकेशन नहीं, बल्कि खराब टाइम मैनेजमेंट की निशानी माना जाता है.

छुट्टियां और पर्सनल लाइफ का सम्मान

उन्होंने कहा, यहां मैनेजर्स खुद कर्मचारियों को छुट्टियां लेने के लिए याद दिलाते हैं ताकि वे बर्नआउट से बच सकें. वहीं, काम के घंटों के बाद सहकर्मी एक-दूसरे को परेशान नहीं करते. इमरजेंसी के बिना फोन या मैसेज करने से बचा जाता है.

वर्कलोड पर खुलकर बात

सिमरन ने बताया कि स्विस कॉर्पोरेट कल्चर में भारी वर्कलोड के बारे में शिकायत करना गैर-जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार बातचीत का हिस्सा माना जाता है. जबकि भारत में ऐसा करना किसी गुनाह से कम नहीं है.

बॉस को कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं

उन्होंने बताया कि यहां बॉस को कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलता. कैफेटेरिया में एक आम कर्मचारी की तरह CEO भी आपको लाइन में खड़े दिख जाएंगे. इसके अलावा इंटर्न या जूनियर लेवल के कर्मचारियों से सीनियर्स के पर्सनल काम कराने वाला कल्चर भी बिल्कुल नहीं है.

बॉस से असहमति की आजादी

सिमरन के मुताबिक, जहां भारत में नौकरीपेशा लोग अपने बॉस की बातों को सीधे तौर पर खारिज करने से बचते हैं, वहीं स्विस कल्चर में अगर आपके पास ठोस तर्क और तथ्य हैं, तो आप अपने मैनेजर से खुलकर असहमति जता सकते हैं. इस वायरल पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, भारत के माहौल के बाद ऐसा कल्चर ताजी हवा के झोंके जैसा है. यह भी पढ़ें:Viral: मैं स्कूल का बच्चा नहीं हूं बीमार Gen Z कर्मचारी ने Boss को दिया ऐसा जवाब, इंटरनेट पर मचा गदर!

यहां देखिए वायरल पोस्ट

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अभिषेक राय

अभिषेक राय

अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है. शुरुआत में वे भोपाल के 'पीपुल्स समाचार' अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के 'जानो दुनिया' (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई. अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं. अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे. अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.

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