जैसलमेर में मानसून सुस्त पड़ गया है। बारिश नहीं होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में अगले 5 दिनों तक बारिश नहीं होगी। तेज धूप और उमस का दौर चलेगा।
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हालांकि, शनिवार से मानसून का नया सिस्टम सक्रिय होने का पूर्वानुमान जताया गया है। जिससे राहत की उम्मीद बंधी है। गौरतलब है कि जिले में अब तक सालाना 165 मिमी औसत के मुकाबले महज 80 मिमी बारिश दर्ज हुई है। यह आंकड़ा औसत से आधे से भी कम है, जिससे कृषि संकट गहरा गया है।
येलो अलर्ट के बाद नहीं बरसे बादल
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में मानसून की बेरुखी से हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। सोमवार को मौसम विभाग की ओर से यलो अलर्ट जारी होने के बाद भी दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही, लेकिन बारिश की एक बूंद तक नहीं बरसी। जिला मुख्यालय पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल छिटपुट बारिश ही देखने को मिली है।

बादलों की नदारद मौजूदगी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
जिले में औसत से कम हुई बारिश
मौसम आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अब तक सबसे अधिक 196 मिमी बारिश मोहनगढ़ में रिकॉर्ड की गई है। वहीं पोकरण में 162 मिमी और फलसूंड में 113 मिमी बारिश हुई है।
हालांकि इन क्षेत्रों में स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन संपूर्ण जिले के स्तर पर देखा जाए तो सूखे की स्थिति हावी होती नजर आ रही है।
महीने दर महीने पिछड़ता मानसून
जैसलमेर में इस बार बारिश की रफ्तार बेहद धीमी रही है। जून महीने में 35 मिमी, जुलाई में 36 मिमी और अगस्त की शुरुआत से अब तक मात्र 9 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है।
जैसे-जैसे मानसून का समय बीत रहा है, यह लगभग तय माना जा रहा है कि इस वर्ष कुल बारिश सामान्य औसत से काफी कम रहेगी। इसका सबसे बड़ा और सीधा प्रतिकूल प्रभाव स्थानीय कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है।

शनिवार से मानसून का नया सिस्टम सक्रिय होने का पूर्वानुमान जताया गया है। जिससे राहत की उम्मीद बंधी है।
बारिश नहीं होने से फसल खराब होने के कगार पर
बारिश में हो रही लगातार देरी के कारण किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। खेतों में बुवाई का काम पूरी तरह से अटका पड़ा है। जिन किसानों ने शुरुआती दौर की बारिश को देखकर बुवाई कर दी थी, उनकी फसलें अब पानी के अभाव में सूखकर खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं।
कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए समय रेत की तरह मुट्ठी से फिसलता जा रहा है। यदि 15 अगस्त तक जिले में अच्छी और पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो इस सीजन में फसलों को बचा पाना असंभव होगा। फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें वीकेंड पर सक्रिय होने वाले संभावित मानसूनी सिस्टम पर टिकी हुई हैं।