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सार
Allahabad University News: इलाहाबाद विश्वविद्यालय को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से समावेशी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर स्थापित करने के लिए 5 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Job Creation For Allahabad University Students: इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के छात्रों, शोधार्थियों और युवा उद्यमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने विश्वविद्यालय में समावेशी प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर की स्थापना के लिए पांच करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी है।
इस परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों के नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाकर उन्हें रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनाना है। इविवि की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के नेतृत्व में तैयार किए गए प्रस्ताव को डीएसटी ने स्वीकृति प्रदान की है।
इनक्यूबेटर के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
इस इनक्यूबेटर के माध्यम से विश्वविद्यालय में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा युवा उद्यमियों को अपने अभिनव विचारों को व्यावसायिक रूप देने का अवसर मिलेगा। परियोजना के तहत तकनीकी मार्गदर्शन, विशेषज्ञों की सलाह, उद्यम विकास, निवेशकों से संपर्क और स्टार्टअप विस्तार के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
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आम लोगों के जीवन से जुड़े चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
इस इनक्यूबेटर का फोकस आम लोगों के जीवन से जुड़े चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा। इनमें सहायक प्रौद्योगिकी, समावेशी स्वास्थ्य सेवाएं, समावेशी पर्यटन और समावेशी शहरी विकास शामिल हैं। इन क्षेत्रों में विकसित होने वाले स्टार्टअप न केवल आर्थिक लाभ अर्जित करेंगे, बल्कि दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, स्वास्थ्य सेवाओं और शहरी समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत करेंगे।
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परियोजना के प्रमुख अन्वेषक भूगोल विभाग के प्रो. अश्वजीत चौधरी होंगे। उनके साथ कुलसचिव प्रो. आशीष खरे, वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग की डॉ. शेफाली नंदन तथा इंजीनियरिंग एवं कम्युनिकेशन विभाग के डॉ. नीलेश आनंद सह-अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगे। यह टीम विश्वविद्यालय में नवाचार और उद्यमिता के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगी।
कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, नवाचारी और उद्यमी बनाना भी है। डीएसटी की यह परियोजना इलाहाबाद विश्वविद्यालय को स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
