कानपुर की गुजैनी पुलिस ने धर्मांतरण का दबाव बनाने के आरोपी पिता-पुत्र समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपियों ने धर्मांतरण का विरोध करने और घर में जबरन बनवाई गई मजार हटाने के लिए कहने पर ई-रिक्शा चालक सोनू जाटव और उसके परिवार के साथ मार
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धर्मांतरण की जानकारी पर हंगामा करते हिंदू संगठन
गुजैनी थानाप्रभारी राजन शर्मा ने बताया कि रामगोपाल चौराहा के पास स्थित बस्ती में रहने वाले सोनू जाटव के परिवार के साथ मारपीट के मामले में पुलिस ने शमीम, उसके बेटे शीबू, अरमान, अरसलान और अमिर खान को गिरफ्तार किया है। पीड़ित परिवार की तहरीर पर पहले आरोपियों के खिलाफ मारपीट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच में धर्मांतरण के आरोपों की भी पड़ताल की गई। आरोप सही पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा बढ़ाकर कार्रवाई की गई है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही हैं।

हंगामें की सूचना पर तैनात फोर्स
ग्रीनबेल्ट पर कब्जा कर किराए पर उठायी गई झोपड़ियां
वहीं धर्मांतरण के विरोध में परिवार की पिटाई की घटना के बाद पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) सतर्क हो गई है। पुलिस जांच में आरोपी शमीम पर बस्ती में कब्जा कर कई झोपड़ियां बनाकर उन्हें किराए पर देने और बाद में किराएदारों पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप भी सामने आए हैं। बस्ती में तनाव के चलते 24 घंटे फोर्स की तैनाती की गई हैं।
बस्ती में रहने वालों ने पुलिस को बताया कि करीब सात-आठ साल पहले आरोपी शमीम की हाईटेंशन के नीचे नगर निगम की ग्रीन बेल्ट पर कब्जा करके कई झोपड़ियां बनाईं, इसके बाद उन्हें किराए पर दे दिया। आरोप है कि कुछ दिन रहने के बाद शमीम और उसके परिवार के लोग उन पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने लगे। उनके इन्कार करने और विरोध जताने पर झोपड़ियां खाली करवा लीं।
इसके बाद शमीम ने अपने परिवार के लोगों को यहां बसा दिया। वर्तमान में शमीम के करीब 25 परिचितों और रिश्तेदारों के परिवार बस्ती में रह रहे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच और तेज कर दी है। एलआईयू भी बस्ती में रहने वाले लोगों और उनके आपसी संबंधों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि घटना के बाद बस्ती में किसी तरह का विवाद दोबारा न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है। पुलिस बल की तैनाती के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। मतांतरण के दबाव, झोपड़ियों पर कब्जे और मारपीट से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। जांच और साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।