माता वैष्णो देवी श्राइन में चढ़ावे की 500 करोड़ की चांदी के 'नकली' होने के मामले में जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया है।

Vaishno Devi fake silver row Jammu court summons crime branch

माता वैष्णो देवी श्राइन में चढ़ावे की 500 करोड़ की चांदी के 'नकली' होने के मामले में जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया है।

  • Published: 14 Jul 2026, 04:40 PM IST
  • Last Updated: 14 Jul 2026, 04:40 PM IST

Vaishno Devi fake silver row: माता वैष्णो देवी श्राइन में चढ़ावे के रूप में आई करीब 500 करोड़ रुपये की चांदी के 'नकली' होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जम्मू की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने इस गंभीर मामले में क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को निजी तौर पर कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। अदालत ने जांच अधिकारी को मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ 29 जुलाई, 2026 को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने को कहा है।

क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तब सामने आया जब ऐसी रिपोर्टें आईं कि श्राइन बोर्ड के पास जमा करीब 20 टन चांदी, जिसकी कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये बताई जा रही थी, को परीक्षण और पिघलाने के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस सामग्री में से केवल 5 से 6 प्रतिशत ही शुद्ध चांदी पाई गई, जबकि शेष सामग्री कैडमियम, लोहे और अन्य घटिया धातुओं से बनी हुई थी।

कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
अधिवक्ता दीपक शर्मा ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चांदी में मिलावट, हेरफेर और कथित तौर पर धन के दुरुपयोग का मामला है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि क्राइम ब्रांच ने इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की और केवल कागजी खानापूर्ति करते हुए शिकायत को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में फॉरवर्ड कर दिया। कोर्ट में यह तर्क दिया गया कि क्राइम ब्रांच खुद एक अधिसूचित पुलिस स्टेशन है और वे अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप
अधिवक्ता की शिकायत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत गंभीर अपराधों का जिक्र है। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, रिकॉर्ड में हेरफेर और कैडमियम जैसी धातुओं के उपयोग के आरोप शामिल हैं। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि स्टेटस रिपोर्ट में सबूतों को सुरक्षित रखने जैसे कोई कदम नहीं उठाए गए। इनमें सीसीटीवी फुटेज, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और चांदी को पिघलाने से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं।

क्या चाहते हैं शिकायतकर्ता?
इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की गई है ताकि यह पता चल सके कि क्या श्रद्धालुओं को विक्रेताओं द्वारा नकली सामान बेचा गया था, या फिर मंदिर में चढ़ाए गए असली चढ़ावे को किसी स्तर पर बदल दिया गया या उसमें मिलावट की गई। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि इस पूरी सप्लाई चेन और इसमें शामिल अधिकारियों, विक्रेताओं व हैंडलर्स की जवाबदेही तय की जाए। अब कोर्ट के आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।