पंचकूला की विशेष अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल, इसमें 6 IAS अधिकारियों, IDFC First व AU Small Finance बैंक के 4 अफसरों समेत कुल 19 लोगों को नामजद किया है। अब तक 37 आरोपियों पर चार्जशीट हो चुकी है और 26 गिरफ्तार हैं।
हरियाणा के 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में CBI ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की।
- Published: 02 Sep 2026, 06:05 PM IST
- Last Updated: 02 Sep 2026, 06:05 PM IST
हरियाणा में सरकारी खजाने में हुई करोड़ों रुपये की हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बार फिर बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने पंचकूला की विशेष CBI अदालत में 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 6 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।
जांच के दौरान CBI ने अब तक 54 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और कई अहम दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं। यह पूरा मामला IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में जमा हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।
आपराधिक साजिश और जालसाजी समेत कई गंभीर आरोप
CBI के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने, सबूत नष्ट करने, खातों में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात और उकसावे सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।
बैंक अधिकारियों से मिलीभगत का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार जांच में सामने आया कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर सरकारी धन के गबन की सुनियोजित योजना को अंजाम दिया।
CBI का कहना है कि हरियाणा सरकार के 8 विभागों और संस्थाओं के फंड को विभिन्न सूचीबद्ध बैंकों से उन शाखाओं में ट्रांसफर किया गया, जहां आरोपी बैंक अधिकारी तैनात थे। आरोप है कि इस दौरान हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा वित्तीय अनुशासन और धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया।
504 करोड़ रुपये के सरकारी धन की कथित धोखाधड़ी
CBI के अनुसार सरकारी खातों में जमा रकम को कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए ऐसे तीसरे पक्षों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था। इसके बाद रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर किया गया और कथित तौर पर नकदी में बदला गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से आरोपियों ने अवैध आर्थिक लाभ हासिल किया। CBI के अनुसार मामले में करीब 504 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि की धोखाधड़ी सामने आई है।
कथित घोटाले से हरियाणा सरकार के आठ विभाग और संस्थाएं प्रभावित
- पंचायत विभाग
- पंचकूला और कालका नगर निगम
- हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP)
- हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड (HLWB)
- हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB)
- हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB)
- हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) शामिल हैं।
अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
CBI इससे पहले इस मामले में 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के अधिकारी-कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियां शामिल हैं। ताजा चार्जशीट के बाद अब तक इस मामले में कुल 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
54 स्थानों पर छापेमारी, 20 करोड़ का सोना जब्त
CBI ने जांच के दौरान अब तक 54 स्थानों पर तलाशी ली है। तलाशी के दौरान करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत कई महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए जाने की बात जांच एजेंसी ने कही है।
हरियाणा विजिलेंस से CBI ने अपने हाथ में ली जांच
यह मामला शुरुआत में हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। बाद में हरियाणा सरकार के अनुरोध पर CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।
इसके अलावा CBI ने चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य संबंधित मामलों की जांच भी अपने हाथ में ली है। इनमें एक मामला Chandigarh Smart City Limited (CSCL) और नगर निगम चंडीगढ़ से संबंधित है, जबकि दूसरा मामला Chandigarh Renewable Energy and Science & Technology Promotion Society (CREST) से जुड़ा है। CBI इन दोनों मामलों में भी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
सरकारी धन की पूरी ट्रेल खंगाल रही CBI
CBI के मुताबिक तीनों मामलों में अन्य संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। जांच एजेंसी का फोकस कथित तौर पर गबन किए गए सरकारी धन की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाने, अपराध से अर्जित रकम और संपत्तियों को ट्रेस करने तथा मामले में शामिल अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर है।