भारतीय सिनेमा में ऐसे कई गाने हैं जो सदाबहार और कल्ट बने लेकिन उनके सिंगर कहीं गुमनाम हो गए। आज हम एक ऐसे ही सिंगर और गाने के बारे में बात करने जा रहे ...और पढ़ें

सफर को खुशनुमा कर देता है 51 साल पुराना गाना

सफर को खुशनुमा कर देता है 51 साल पुराना गाना 

HighLights

  1. सफर को खुशनुमा कर देता है 51 साल पुराना गाना 

  2. रविंद्र जैन ने दिया था गीत का संगीत 

  3. 5 दशक बाद भी कल्ट बना हुआ है गाना 

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में कई लीजेंडरी गायक आए और गए और लेकिन जीते जी एकदम से किसी को शोहरत मिलना और फिर अचानक गुमनामी की जिंदगी में चले जाना ये बहुत कम सिंगर के साथ हुआ।

जब इंडस्ट्री में रविंद्र जैन ने दिया बड़ा मौका

लेकिन 70-80 के दशक में एक ऐसे मशहूर सिंगर थे जो बचपन से मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) के नगमे सुन रहे थे और सिंगर बनने का सपना लिए मुंबई आए थे। जहां कुछ दिन धक्के खाने के बाद आखिरकार उन्हें वो मौका मिल गया जिसकी हर सिंगर को तलाश रहती है।

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मशहूर म्यूजिशियन रविंद्र जैन (Ravindra Jain) ने उन्हें वो बड़ा मौका दिया- नदिया के पार और गीत गाता चल में। ये सिंगर थे जसपाल सिंह (Jaspal Singh)।

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इंडस्ट्री में मिली अलग पहचान

जसपाल सिंह की आवाज सचिन पिलगांवकर (Sachin Pilgaonkar) पर एकदम फिट बैठती थी और इसीलिए गीत गाता चल (Geet Gaata Chal) आज भी उतना ही सदाबहार है। 5-6 दशकों बाद आज भी बसों, ऑटो में उनका गाना सफर को खुशनुमा बना देता है।

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इस गाने को रविंद्र जैन ने लिखा और कंपोज किया था वहीं जसपाल सिंह ने इसे आवाज दी थी। इस गाने के बाद से ही जसपाल सिंह को अच्छी खासी पॉपुलैरिटी मिली और वे बॉलीवुड के मशहूर सिंगर्स में शुमार हुए। वहीं इसे सचिन पिलगांवकर पर इसे फिल्माया गया था।

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क्यों गुमनाम हुए जसपाल सिंह?

जसपाल सिंह (Jaspal Singh) एक ऐसे सिंगर जिन्हें रातोंरात शोहरत तो मिली लेकिन वह ज्यादा लंबे वक्त तक टिक नहीं पाई। कुछ बेहतरीन गाने इंडस्ट्री को देने के बाद उन्हें ऑफर मिलना कम हो गए। इसके पीछे के कारणों में उस वक्त म्यूजिक इंडस्ट्री में चल रही राजनीति, पहले से बड़े सिंगर्स जैसे रफी, किशोर कुमार, मुकेश का दबदबा और उनकी आवाज कुछ सीमित ही एक्टर्स पर जंचना थे।

धीरे-धीरे जसपाल सिंह ने इंडस्ट्री से दूरी बना ली लेकिन वे म्यूजिक से जुड़े रहे और स्टेज शो करने लगे। 1975 की फिल्म 'गीत गाता चल' में टाइटल सॉन्ग गाकर मशहूर होने के बाद वे घर-घर में पहचाने जाने लगे। उनकी आवाज अनोखी थी; उन्होंने 'नदिया के पार', 'अखियों के झरोखों से', 'सावन को आने दो' जैसी हिट फिल्मों के लिए गाने गाए, जो आज भी म्यूजिक लवर्स की लिस्ट में शुमार है।