शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए नगर निगम ने अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के तहत 580.60 करोड़ रुपए का व्यापक प्लान तैयार किया है। हालांकि, यह पूरी राशि केंद्र सरकार से सीधे नहीं मिलेगी।
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यूसीएफ की शर्तों के मुताबिक परियोजना लागत की कम से कम 50 फीसदी राशि निगम को खुद बॉन्ड, बैंक लोन या निजी भागीदारी से जुटानी होगी। यानी 580 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को धरातल पर उतारने के लिए निगम के सामने करीब 290 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रबंध करने की बड़ी चुनौती होगी। खास बात यह है कि कुल 580.60 करोड़ के बजट में से 522.79 करोड़ रुपए (लगभग 90 फीसदी राशि) अकेले सीवरेज सिस्टम, 30 एमएलडी क्षमता के एसटीपी और 8 पंपिंग स्टेशनों के निर्माण पर खर्च होंगे। शेष तीन परियोजनाओं के खाते में महज 57.81 करोड़ रुपए आएंगे। साफ है कि यूसीएफ का पूरा मास्टर प्लान सीवरेज नेटवर्क के इर्द-गिर्द केंद्रित है।
ऐसे समझें पूरा प्लान... 90 फीसदी राशि अकेले सीवरेज पर खर्च होगी, बाकी 3 अन्य प्रोजेक्ट पर
1 सीवरेज: यह फ्लैगशिप एंकर और सबसे बड़ी परीक्षा
522.79 करोड़ रुपए के इस सबसे बड़े प्रोजेक्ट के जरिए शहर के बचे हुए सीवरेज कार्यों को पूरा करने, 30 एमएलडी का एसटीपी बनाने और 8 नए पंपिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। इससे शहर के 10 सीवरेज जोन कवर होंगे। यूसीएफ प्रस्ताव में इसे ‘फ्लैगशिप एंकर प्रोजेक्ट’ माना गया है, यानी फंड मंजूर होने पर शहर का सीवरेज ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। हालांकि, विशाल बजट के कारण इसके लिए 50% मैचिंग फंड जुटाना निगम के लिए सबसे कठिन कसौटी साबित होगा।
2 यूटिलिटी डक्ट: 37.87 करोड़ लागत, 10 साल में 12.80 करोड़ रिकवरी करेंगे
दूसरे बड़े प्रोजेक्ट के तहत शहर की प्रमुख सड़कों पर 60.70 किलोमीटर लंबी यूटिलिटी डक्ट और आरसीसी चैंबर बनाए जाएंगे। 37.87 करोड़ रुपए की इस परियोजना में 2,134 रुपए प्रति मीटर की दर से 10 वर्षों में 12.80 करोड़ रुपए (लगभग 34%) वसूलने का रिकवरी मॉडल तैयार किया गया है।
3 पार्किंग से कमाई: ब्रह्मपोल में 4.94 करोड़ से बनेगी पार्किंग, 3.18 करोड़ आय का अनुमान
ब्रह्मपोल पंपिंग स्टेशन के पास ‘जी+1’ पार्किंग के लिए 4.94 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। यूजर-फीस मॉडल पर आधारित इस पायलट प्रोजेक्ट से अगले 10 सालों में 3.18 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने का अनुमान जताया गया है।
4 जीआईएस सर्वे: 5 करोड़ खर्च होंगे, इसे मुख्य फंड से हटाने की सिफारिश
भूमिगत जल पाइपलाइन, सीवर लाइन, मैनहोल और अन्य यूटिलिटी की डिजिटल मैपिंग के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह मूल निर्माण कार्य न होकर प्रोजेक्ट तैयारी और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ा काम है, इसलिए इसे मुख्य प्रोजेक्ट फंड के बजाय ‘प्रोजेक्ट प्रिपरेशन एंड कैपेसिटी बिल्डिंग फंड’ से कराने की सिफारिश की गई है।
3 चरणों में मिलेगी राशि: काम की रफ्तार से जुड़ेगी किस्त
580.60 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए यूसीएफ से बजट एकमुश्त नहीं बल्कि 30, 50 और 20 फीसदी के तीन चरणों में जारी होगा। फंड का भुगतान परियोजना की भौतिक प्रगति से सीधे लिंक रहेगा। ऐसे में डीपीआर, वित्तीय क्लोजर या काम शुरू करने में जरा सी भी देरी अगली किस्त को अटका सकती है।
ये 4 बड़ी चुनौतियां भी: निगम को यह सब करना होगा
50% राशि बॉन्ड, बैंक लोन या निजी निवेशकों से जुटानी होगी। यूटिलिटी डक्ट से होने वाले राजस्व को सुरक्षित रखने का मैकेनिज्म बनाना होगा। प्रोजेक्ट को शहर के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ना होगा। प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के 3 महीने के भीतर जरूरी सुधार लागू करने होंगे।