कैनेरा बैंक ने अपने बयान में कहा कि बैंक ने मामले में फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी की थी, लेकिन उसकी कम वोटिंग हिस्सेदारी को देखते हुए यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकी.
कैनेरा बैंक ने अपने बयान में कहा कि बैंक ने मामले में फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी की थी, लेकिन उसकी कम वोटिंग हिस्सेदारी को देखते हुए यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकी.
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Subhash Chandra
जी ग्रुप के चेयरमैन रहे डॉ. सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवालियापन के मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर किए गए रिपेमेंट प्लान को लेकर सार्वजनित क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने आपत्ति जताई है. डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से पेश किए गए ₹6.25 करोड़ के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ कुछ बैंकों ने वोट किया था, जिसमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड, केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड शामिल हैं. खिलाफ में वोटिंग के बावजूद निजी लेनदारों के बहुमत की वजह से NCLT ने इसे मंजूरी दे दी.
80.81% वोट के आधार पर प्लान को मिली मंजूरी
केनरा बैंक द्वारा जारी मीडिया स्टेटमेंट के अनुसार, बैंक के पास इस मामले में 1.60% वोटिंग शेयर था. वहीं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड के पास 0.76% और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पास 6.09% वोटिंग शेयर था. इन सभी सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने प्रस्तावित रिपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया. हालांकि, अन्य निजी वित्तीय लेनदारों के पास कुल 80.81% वोटिंग शेयर था और उनके समर्थन के चलते रिपेमेंट प्लान को मंजूरी मिल गई.
केनरा बैंक ने अपने बयान में कहा कि बैंक ने मामले में फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी की थी, लेकिन उसकी कम वोटिंग हिस्सेदारी को देखते हुए यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकी.
यूनियन बैंक भी NCLAT जाएगा
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड ने अपने मीडिया स्टेटमेंट में कहा कि हमने केनरा बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ मिलकर रिपेमेंट प्लान को खारिज किया था. बैंक ने NCLT के समक्ष इस प्लान को मंजूरी नहीं देने की मांग रखी थी. बैंक के मुताबिक, इसके बावजूद कुछ निजी लेनदारों के बहुमत के चलते प्लान को NCLT से मंजूरी मिल गई. अब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड NCLT के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती देने जा रहा है.
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस भी दाखिल करेगा अपील
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने भी साफ किया है कि उसने अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर डॉ. सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था. अन्य वित्तीय लेनदारों के समर्थन से कुल 80.81% वोट प्लान के पक्ष में गए और इसे मंजूरी मिल गई. LIC HFL ने कहा है कि वह अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ NCLAT के समक्ष तत्काल अपील दाखिल करेगा.
अब NCLAT में होगी अगली कानूनी लड़ाई
इस पूरे मामले में अब मुख्य सवाल NCLT द्वारा मंजूर किए गए रिपेमेंट प्लान की वैधता और उस पर लेनदारों के मतदान से जुड़े मुद्दों का है. सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों द्वारा NCLAT में अपील किए जाने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष चलेगी.