जानकारी देते उप कृषि निदेशक डॉ. रविन्द्र जाखड़।

कैथल में धान का सीजन शुरू होने से पहले ही विभाग पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए चौकन्ना हो गया है। कैथल में इस बार करीब 4.5 लाख एकड़ में धान की फसल लगी है। कटाई के दौरान खेतों में आगजनी न हो, इसके लिए गांव स्तर तक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई ह

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कृषि विभाग के साथ हॉर्टिकल्चर, ग्राम सचिव, पटवारी, नहरी पटवारी, वन विभाग, मार्केट कमेटी और पशुपालन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को अभियान से जोड़ा गया है। विभाग का फोकस उन क्षेत्रों पर विशेष रूप से रहेगा, जहां पहले पराली जलाने की घटनाएं अधिक सामने आई थीं।

सरपंचों और नंबरदारों को भी अभियान से जोड़ा

उप कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र जाखड़ ने बताया कि गांव स्तर पर निगरानी के लिए सरपंचों और नंबरदारों को भी अभियान से जोड़ा गया है। ब्लॉक अनुसार सरपंचों के ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें गांव में होने वाली आगजनी की जानकारी साझा की जाएगी। फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए प्रशासन ने 629 नोडल अधिकारी और कर्मचारी लगाए हैं।

एक नोडल अधिकारी को करीब 100 किसानों की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी अपने निर्धारित किसानों के खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन की निगरानी करेंगे। पूरे जिले के नोडल अधिकारी डॉ. सतीश नारा बनाए गए हैं।

खेतों में बनाए जा रहे पराली के गट्‌ठे।

खेतों में बनाए जा रहे पराली के गट्‌ठे।

पिछले साल 11 किसानों पर हुआ केस

विभाग के अनुसार, पिछले साल जिले में पराली जलाने से जुड़े 72 मामले सामने आए थे। कैलरम, चूहड़ माजरा, कांगथली और सीवन में पराली के स्टॉक में आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं। जांच में 11 लोकेशन पर आगजनी की पुष्टि हुई थी।

कृषि विभाग ने 11 किसानों के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाए। 10 किसानों के चालान कर 5 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया। इनमें से 45 हजार रुपए जमा हुए। 11 किसानों की रेड एंट्री भी की गई, जिसके तहत तीन साल तक फसल बेचने पर रोक रहती है। ड्यूटी में लापरवाही पर करीब 75 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए गए थे।

कैलरम रेड जोन, कैथल-गुहला-पूंडरी ग्रीन जोन में

पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं के आधार पर जिले को चार जोन में बांटा गया था। कलायत का कैलरम रेड जोन में रखा गया था। वहीं कैथल, गुहला और पूंडरी को ग्रीन जोन में रखा गया, क्योंकि यहां अपेक्षाकृत कम मामले सामने आए थे। इस बार भी संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई जाएगी।

कृषि विभाग के अनुसार, फसल कटाई के दौरान जिस क्षेत्र में आगजनी की संभावना अधिक होगी, वहां अतिरिक्त अधिकारियों को लगाया जाएगा। विभाग का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही आगजनी की सूचना प्राप्त कर मौके पर कार्रवाई करना है।