
दिल्ली के सभी गांवों को शहर का दर्जा
दिल्ली अब एडमिनिस्ट्रेटिव तौर पर गांवों से मुक्त हो गई है. दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी के बचे हुए 48 गांवों को अर्बनाइज्ड करने के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है. सोमवार को डिप्टी मेयर डॉ. मोनिका पंत की अध्यक्षता में हुई निगम की सदन बैठक में यह फैसला लिया गया.
दिल्ली नगर निगम एक्ट की धारा 506-ए के तहत लिए गए इस फैसले के बाद इन गांवों में सिविक सुविधाओं और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट की जिम्मेदारी भी निगम की होगी. इसी के साथ दिल्ली में अब ऑफिशियल तौर पर गांव नहीं रह गए हैं. वहीं, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अब भी गांव हैं.
कब शुरू हुई थी प्रक्रिया
दिल्ली में गांवों को अर्बनाइज्ड घोषित करने की प्रोसेस करीब 63 साल पहले शुरू हुई थी. 1963 में पहले फेज से शुरू हुई यह प्रोसेस अब 2026 में बचे हुए 48 गांवों के अर्बनाइजेशन के साथ पूरी हो गई है. हालांकि, पड़ोसी देश की राजधानी की तस्वीर अलग है. पाकिस्तान के इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी में 2023 की जनगणना के मुताबिक 120 गांव दर्ज हैं.
63 साल में कैसे गांव से शहर बनी दिल्ली
दिल्ली में गांवों को अर्बनाइज्ड घोषित करने की शुरुआत पहले मास्टर प्लान के बाद 1963 में हुई थी. उस समय 19 गांवों को अर्बनाइज्ड गांव का दर्जा दिया गया. इसके तीन साल बाद 1966 में 72 और गांव इस कैटेगरी में शामिल किए गए.
इसके बाद 1982 में दूसरे मास्टर प्लान के दौरान 24 गांवों को अर्बनाइज्ड घोषित किया गया. 1994 में 20 और गांव इस लिस्ट में जोड़े गए. इसके बाद दिल्ली के तेजी से फैलते अर्बन एरिया और लैंड यूज में बदलाव के साथ अर्बनाइजेशन की स्पीड और बढ़ी.
तीसरे मास्टर प्लान और लैंड पुलिंग पॉलिसी लागू होने के बाद 2017 में 89 गांवों को अर्बनाइज्ड किया गया. इसके बाद 2019 में 79 और 2021 में एक गांव को यह दर्जा मिला. अब 2026 में बचे हुए 48 गांवों को भी अर्बनाइज्ड घोषित करने का फैसला हुआ है. MCD के टाउन प्लानिंग रिकॉर्ड में 1963, 1966, 1982, 1994, 2017 और 2019 के अर्बनाइजेशन से जुड़े नोटिफिकेशन भी उपलब्ध हैं.
इस तरह 1963 से शुरू हुई प्रोसेस के बाद दिल्ली के सभी 357 गांव अब एडमिनिस्ट्रेटिव तौर पर अर्बनाइज्ड कैटेगरी में आ गए हैं. यानी राजधानी में अब कोई गांव ऑफिशियल तौर पर रूरल एरिया की कैटेगरी में नहीं बचा है.
इस्लामाबाद की तस्वीर क्या है?
इस्लामाबाद की स्थिति दिल्ली से अलग है. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 जनगणना रिपोर्ट में इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी में 120 मौजा, देह, विलेज दर्ज हैं. यानी राजधानी क्षेत्र में अभी भी गांव एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट के तौर पर मौजूद हैं.
वहीं, अगर एक और पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश की बात करें तो वहां पर तस्वीर थोड़ी अलग है. बांग्लादेश की 2022 जनगणना में ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन और ढाका साउथ सिटी कॉर्पोरेशन को अर्बन एरिया के रूप में दर्ज किया गया है. नॉर्थ सिटी कॉरपोरेशन में 54 और साउथ में 75 वार्ड हैं. दोनों सिटी कॉरपोरेशन की आबादी भी पूरी तरह अर्बन एरिया के आंकड़ों में आती है.
गांव खत्म होने के बाद दिल्ली में क्या बदलेगा?
48 गांवों के अर्बनाइजेशन का सबसे सीधा असर एडमिनिस्ट्रेशन और सिविक सुविधाओं पर पड़ेगा. अर्बनाइज्ड एरिया में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, सफाई, पार्क और दूसरी सिविक सुविधाओं के डेवलपमेंट की जिम्मेदारी MCD के पास आएगी.
इसका असर जमीन और कंस्ट्रक्शन से जुड़े नियमों पर भी पड़ेगा. गांवों में अब तक लागू कई रूरल एरिया से जुड़े नियमों की जगह अर्बन प्लानिंग और निगम से जुड़े नियम लागू होंगे.
हालांकि, अर्बनाइज्ड घोषित होने का मतलब यह नहीं है कि गांव की जमीन या उसकी पुरानी आबादी तुरंत शहर की किसी सामान्य कॉलोनी में बदल जाएगी. जमीन का इस्तेमाल, कंस्ट्रक्शन और डेवलपमेंट अलग-अलग मास्टर प्लान और लोकल नियमों के तहत तय होगा. दिल्ली का यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि राजधानी का अर्बन एक्सपेंशन पिछले छह दशकों में लगातार हुआ है. 1963 में 19 गांवों से शुरू हुई प्रोसेस 2017 में एक साथ 89 गांवों के अर्बनाइजेशन तक पहुंची और अब 2026 में आखिरी 48 गांवों के साथ पूरी हो गई है.
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