भरतपुर में 7 पुलिसकर्मियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। इनमें स्पेशल टीम के 5 जवान, मथुरा गेट थाने का ASI और एक अन्य पुलिसकर्मी शामिल है। आरोपियों ने हर महीने 10 हजार रुपए देने से मना करने पर 16 साल के लड़के को पहले बेरहमी से पीटा।

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नाबालिग के शरीर पर चोटों के गंभीर निशान मिलने पर परिजन ACJM कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने मामले में मथुरा गेट थानाधिकारी को तलब किया।

कोर्ट के आदेश पर मथुरा गेट थाने में ही शुक्रवार को 7 पुलिसकर्मियों के खिलाफ नाबालिग के साथ मारपीट करने, रंगदारी वसूलने और उसे अवैध हथियार रखने के मामले में फंसाने के साथ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया गया।

मथुरा गेट थाना अधिकारी हरलाल मीणा ने बताया-नाबालिग की बुआ की शिकायत पर डीएसटी के दशरथ, अंकित, सत्यवीर, हरिओम, अभिमन्यु और मथुरा गेट थाने के एएसआई शिवलाल सहित एक अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। जांच अटल बंद थाना अधिकारी हेमेंद्र चौधरी को सौंपी गई है।

सातों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मथुरा गेट थाने में मामला दर्ज किया गया है।

सातों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मथुरा गेट थाने में मामला दर्ज किया गया है।

रेंटल कार का काम शुरू किया तो मांगे 10 हजार रुपए महीना नाबालिग की बुआ ने पुलिस को सौंपी रिपोर्ट में बताया- मेरे भतीजे के जन्म के 12 दिन बाद ही उसके पिता की मौत हो गई। इसके बाद उसे मैं भरतपुर ले आई। उसकी पढ़ाई-लिखाई करवाई। पिछले साल दिसंबर में मेरे नाबालिग भतीजे ने भरतपुर में रेंटल कार का कारोबार शुरू किया था।

नाबालिग की बुआ ने बताया- भतीजे के कारोबार शुरू करने के कुछ समय बाद DST का कॉन्स्टेबल दशरथ उसके ऑफिस पहुंचा और कहा-अगर कारोबार चलाना है तो हर महीने 10 हजार रुपए देने होंगे। डर के चलते मेरे भतीजे ने लगातार 3 महीने तक 10-10 हजार रुपए दिए।

कारोबार बंद होने के बाद भी जारी रही पैसों की मांग नाबालिग की बुआ ने बताया- कारोबार में घाटा होने के कारण मेरे भतीजे ने रेंटल कार का काम बंद कर दिया। कारोबार बंद होने के बावजूद कॉन्स्टेबल दशरथ उससे हर महीने पैसों की मांग करता रहा। जब मेरे भतीजे ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो पुलिसकर्मी मेरे भतीजे से रंजिश रखने लगा। उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त को नाबालिग अपने दोस्तों के साथ खाटूश्यामजी गया था। 21 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे वह भरतपुर लौट रहा था। रास्ते में कार पंचर हो गई तो वह पास की एक दुकान पर चाय पीने के लिए रुक गया। इसी दौरान DST के दो पुलिसकर्मी अंकित और मानवीर वहां पहुंचे। दोनों ने नाबालिग से कहा कि उसे कॉन्स्टेबल दशरथ ने बुलाया है। इसके बाद दोनों उसे अपने साथ ले गए।

DST ऑफिस में पट्टों, लात-घूंसों से पीटा आरोप है कि DST ऑफिस में पहले से कॉन्स्टेबल दशरथ मौजूद था। पुलिसकर्मियों ने नाबालिग के साथ मारपीट शुरू कर दी। उसे पट्टों, लात और घूंसों से पीटा। आरोप है कि इस दौरान कॉन्स्टेबल हरिओम उसके पैरों पर खड़ा हो गया। शाम करीब 5 बजे ASI शिवलाल दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंचा। इसके बाद नाबालिग के चेहरे पर कपड़ा बांधकर उसे एक सुनसान जगह ले जाया गया।

पैर पर कट्टा रखकर धमकाया, फिर बनाया फर्जी वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, सुनसान जगह पर कॉन्स्टेबल अनिल ने एक थैले से देसी कट्टा निकाला और उसे उसके पैर पर रख दिया। पुलिसकर्मियों ने धमकी दी कि यदि उसने वीडियो में उनके कहे अनुसार बयान नहीं दिया तो उसके पैर में गोली मार देंगे। आरोप है कि इसके बाद देसी कट्टे को नाबालिग की पैंट में फंसा दिया गया। फिर पुलिसकर्मियों ने तलाशी लेने का नाटक करते हुए हथियार बरामद करने का वीडियो बनाया। इसी आधार पर नाबालिग के खिलाफ 21 अगस्त को अवैध हथियार का मामला दर्ज कर दिया गया।

7 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज पुलिस की ओर से नाबालिग के खिलाफ केस दर्ज करने की सूचना मिलने पर उसके परिजन थाने पहुंचे। उन्होंने उसकी जमानत कराई। नाबालिग घर पहुंचा तो उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले।

पीड़ित पक्ष के वकील परमवीर सोगरवाल ने बताया कि 26 अगस्त को उन्होंने कोर्ट में एप्लिकेशन लगाई थी। इसके बाद 5 दिन पहले थाना अधिकारी हरलाल मीणा को कोर्ट में तलब कर FIR के आदेश दिए गए।

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