
भारतनेट पर लोकसभा समिति की रिपोर्टImage Credit source: Getty Images
लोकसभा में गुरुवार को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति (2025-26) ने दूरसंचार विभाग (DoT) और डिजिटल भारत निधि (DBN) के तहत चल रही परियोजनाओं के निष्पादन की समीक्षा पर अपनी 32वीं रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट में समिति ने माना कि भारतनेट के तहत बुनियादी ढांचे का काफी निर्माण तो हुआ है, लेकिन देशभर में ग्राम पंचायतों तक जुड़ाव और समान कनेक्टिविटी का लक्ष्य अभी भी अधूरा है. समिति ने भारतनेट की प्रगति, तकनीकी रणनीति, निगरानी और जवाबदेही को लेकर कई अहम सिफारिशें की हैं, जिसमें मुख्य तौर पर 7 सिफारिश शामिल हैं.
भारतनेट का व्यापक ऑडिट कराने की सिफारिश
समिति ने कहा कि कार्यशील ग्राम पंचायतों की संख्या लक्ष्य से कम है और राज्यों और मॉडलों के बीच प्रगति असमान है. इसलिए भारतनेट का राज्यवार और मॉडलवार व्यापक निष्पादन ऑडिट कराया जाए.
नेटवर्क के उपयोग पर ज्यादा फोकस
सिर्फ फाइबर बिछाने के बजाय नेटवर्क के वास्तविक उपयोग को बढ़ाने के लिए केंद्रित रणनीति बनाने और DBN फंड का परिणाम आधारित इस्तेमाल करने की सिफारिश भी की गई है.
संशोधित भारतनेट में देरी खत्म करने पर जोर
समिति ने लंबित पैकेज, राज्य-नीतियों और निविदाओं को जल्द अंतिम रूप देने, बीएसएनएल, राज्यों और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा प्रत्येक पैकेज के लिए माइलस्टोन आधारित निगरानी तंत्र बनाने की बात कही है, ताकि समय पर सभी लक्षित गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंच सके.
मोबाइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी
समिति ने प्रोजेक्ट-वाइज निगरानी मजबूत करने और तय समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है. साथ ही 4जी संतृप्ति योजना और बीओपी/बीआईपी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता देने को कहा है.
तकनीकी रणनीति और सेवा गुणवत्ता मजबूत करने का सुझाव
रिपोर्ट में स्पष्ट तकनीकी मानक तय करने, कठिन इलाकों में वैकल्पिक तकनीकों को समय पर मंजूरी देने, नेटवर्क विश्वसनीयता की निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने और न्यूनतम सुनिश्चित गति उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है. समिति ने आईपी-एमपीएलएस आर्किटेक्चर और मल्टी-टेक्नोलॉजी दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया.
वित्तीय निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की मांग
समिति ने CAG की ऑडिट टिप्पणियों का समयबद्ध अनुपालन, अंतिम छोर (Last Mile) तक कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए O&M व्यवस्था मजबूत करने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और डेटा आउटेज, कवरेज गैप और कमजोर सिग्नल जैसे मुद्दों पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है.
परियोजनाओं की एकीकृत मॉनिटरिंग
समिति ने DBN और संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के लिए पूर्व-परियोजना मूल्यांकन मजबूत करने, यथार्थवादी लागत निर्धारण, अनुबंधों का सख्ती से पालन और परियोजनाओं की प्रगति ट्रैक करने के लिए एकीकृत निगरानी तंत्र विकसित करने की सिफारिश की है.
कुल मिलाकर संसदीय समिति की रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि सरकार को अब केवल फाइबर नेटवर्क बिछाने की उपलब्धियों से आगे बढ़कर उसकी गुणवत्ता, उपयोग, विश्वसनीयता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा. समिति ने संकेत दिया है कि डिजिटल इंडिया की सफलता का अगला चरण तभी संभव होगा, जब भारतनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का लाभ वास्तव में गांवों और अंतिम छोर तक पहुंचे.
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Amod Rai
21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह
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