भोपाल1 घंटे पहलेलेखक: मनीष कुशवाह

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मध्यप्रदेश में शहरों की घनी आबादी के बीच बनी 12 पुरानी जेलें बाहर शिफ्ट होंगी। इनकी करीब 106 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन निजी डेवलपर्स को मिलेगी। इसके बदले वे नए स्थानों पर करीब 1228 करोड़ रुपए से आधुनिक जेलें बनाकर देंगे।

यानी सरकार को निर्माण के लिए अलग से बजट नहीं देना होगा। पुरानी जमीनों का अनुमानित आधार मूल्य 1971 करोड़ रुपए है। हाउसिंग बोर्ड को उम्मीद है कि रिजर्व कीमत से ज्यादा बोली मिलने पर निर्माण लागत निकालने के बाद सरकार को 1000 करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।

शहरों के विस्तार के साथ कई पुरानी जेलें घनी आबादी के बीच आ गई हैं। जगह की कमी से इनका विस्तार और आधुनिकीकरण मुश्किल हो रहा है। इसलिए हाउसिंग बोर्ड पुनर्घनत्वीकरण नीति-2022 के तहत 2 केंद्रीय, 7 जिला और 3 उप-जेलों को नए स्थानों पर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। बैतूल में 80% और भिंड में 69% निर्माण पूरा हो चुका है। बाकी 10 परियोजनाएं मंजूरी के अलग-अलग चरणों में हैं।

पूरी जमीन डेवलपर्स को, क्या बनेगा यह भी वही तय करेंगे पुरानी जेलों की जमीन पर आवासीय या व्यावसायिक प्रोजेक्ट में से क्या बनाना है, इसका फैसला निजी डेवलपर्स करेंगे। हालांकि, निर्माण के लिए नगर एवं ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के नियमों के अनुसार मंजूरी लेनी होगी। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के लागू प्रावधानों का भी पालन करना होगा।

12 जेलों का हिसाब : इन पुरानी जमीनों का अनुमानित मूल्य 1971 करोड़ रुपए

पुरानी जेलों के पुनर्निर्माण की योजना पर काम

हाउसिंग बोर्ड आवास निर्माण के साथ विकास की नई परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। इसी के तहत प्रदेश की 12 पुरानी जेलों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।। -ओम जैन, अध्यक्ष, मप्र हाउसिंग बोर्ड

घनी आबादी में जेलों का विस्तार मुश्किल कई जेल घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हैं। इनके विस्तार और आधुनिकीकरण में भी परेशानी आती है। ऐसे में रीडेंसिफिकेशन योजना से इन जेलों को आबादी वाले क्षेत्र से बाहर बनाने का काम किया जा रहा है। -मुकेश चंद्र गुप्ता, प्रमुख सचिव, जेल

बैतूल-भिंड में निर्माण जारी, जमीन की बोली से 41 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे

बैतूल: जेल की जमीन की रिजर्व कीमत 80.80 करोड़ थी, बोली 90.51 करोड़। 59 करोड़ से 480 कैदियों की जेल बन रही है। इसमें 21 बैरक, 11 हाई-सिक्योरिटी सेल, स्टाफ आवास और ट्रेनिंग सेंटर होंगे। निर्माण 80% पूरा है। सरकार को 31.51 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे। भिंड: जमीन की रिजर्व कीमत 22.11 करोड़ थी, बोली 25 करोड़ की मिली। बदले में 15.52 करोड़ से ओपन जेल, गार्ड रूम, बाउंड्री वॉल और मेहगांव-गोहद उप-जेलों में बैरक व आवास बन रहे हैं। निर्माण 69% पूरा है। सरकार को 9.48 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे। दोनों जगह रिजर्व कीमत से 12.60 करोड़ रु. ज्यादा की बोली मिली। इसी आधार पर बाकी परियोजनाओं में भी ज्यादा कमाई की उम्मीद है।

तीन जेलों की डीपीआर मंजूर

रतलाम: 153.50 करोड़ की जमीन के बदले 108.03 करोड़ से 1000 कैदियों की क्षमता वाली जेल और 28 आवास बनेंगे। दमोह: 83 करोड़ की जमीन के बदले 78 करोड़ से 600 कैदियों की क्षमता वाली जेल और 76 आवास बनेंगे। मंदसौर: 109.55 करोड़ की जमीन के बदले 105.25 करोड़ से 1000 कैदियों की क्षमता वाली जेल और 41 आवास बनेंगे।

चार जेलों की प्रारंभिक रिपोर्ट मंजूर

सागर: सबसे महंगी 653.27 करोड़ की जमीन के बदले 325 करोड़ से 4000 कैदियों की केंद्रीय जेल, 38 आवास बनेंगे। रीवा: 533 करोड़ की जमीन के बदले 282.05 करोड़ से 2400 कैदियों की केंद्रीय जेल, 234 आवास व बीहर रिवर फ्रंट बनेगा। डीपीआर अगली साधिकार समिति की बैठक में रखी जाएगी। झाबुआ: 72.14 करोड़ की जमीन के बदले 60.19 करोड़ से 500 कैदियों की क्षमता वाली जेल और 54 आवास बनेंगे। छतरपुर: 86.94 करोड़ की जमीन के बदले 116.45 करोड़ से 600 कैदियों की जेल और 76 आवास बनेंगे।।

तीन जेलों के प्रस्ताव भेजे गए

जावरा: 31.41 करोड़ की जमीन के बदले 30.73 करोड़ से 300 कैदियों की उप-जेल। मैहर: 51.43 करोड़ की जमीन के बदले 37.29 करोड़ से 300 कैदियों की उप-जेल। मंडला: 85.93 करोड़ की जमीन के बदले 85.21 करोड़ से 600 कैदियों की जेल और 59 आवास प्रस्तावित हैं।

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