Sep 08, 2026 08:08 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

Follow us on Google News

share

विजय नगर और जीटीबी नगर जैसे प्रमुख स्टूडेंट हब्स में 1990 के दशक की बनी पुरानी जर्जर इमारतें, संकरी गलियां, लटकते बिजली के तार और बेसमेंट में सीलन के बीच हजारों छात्र रहने को मजबूर हैं।

Delhi Satya Niketan PG Collapse

सत्य निकेतन हादसे की जांच के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है।

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला पीजी (PG) इमारत ढहने और 7 छात्रों की मौत के बाद अब दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के नॉर्थ कैंपस के छात्र भी अपनी सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर खौफ में हैं। विजय नगर और जीटीबी नगर जैसे प्रमुख स्टूडेंट हब्स में 1990 के दशक की बनी पुरानी जर्जर इमारतें, संकरी गलियां, लटकते बिजली के तार और बेसमेंट में सीलन के बीच हजारों छात्र रहने को मजबूर हैं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा, दिल्ली में 200 से ज्यादा पीजी इमारतें अति-संवेदनशील और डेंजर कैटेगरी में आती हैं, जिनकी दोबारा जांच शुरू कर दी गई है।

अब तक क्या-क्या एक्शन हुआ?

सत्य निकेतन हादसे की जांच के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है।

MCD के डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिनटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

पूरी दिल्ली में बिना नक्शा पास बनी 5वीं मंजिल वाली इमारतों को तुरंत सील करने के आदेश दिए गए हैं। हादसे के जिम्मेदार भवन मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया है।

DU छात्रों का दर्द किसने सुना?

नॉर्थ कैंपस में पढ़ाई कर रहे छात्रों ने निजी पीजी मालिकों और दलालों के मनमाने रवैये पर अपनी आपबीती साझा की।

विजय नगर में रहने वाली एक छात्रा ने कहा, "हम ₹14,000 किराया देते हैं, बिजली का बिल अलग है। सत्या निकेतन हादसे के बाद से हम सो नहीं पाए हैं। हमारी जान की भी कोई कीमत है या नहीं?"

आर्ट्स फैकल्टी की छात्रा ने बताया कि ₹20,000 देने के बाद भी एक नामी पीजी में दूषित पानी पीने से उन्हें टाइफाइड हो गया। वहीं एक और छात्रा ने बताया कि महंगे किरायों के बावजूद घटिया खाना और कम मात्रा दी जाती है।

एक छात्र ने याद दिलाया कि पिछले दिनों आए भूकंप के दौरान पीजी की छतों में दरारें आ गई थीं, लेकिन न तो मकान मालिकों ने और न ही प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान दिया।

ब्रोकरों की मनमानी और DU हॉस्टलों की कमी

एक स्थानीय ब्रोकर ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि कई लोग पूरी इमारत या फ्लोर किराए पर लेकर उन्हें बिना किसी सुरक्षा मानकों के अवैध पीजी में बदल देते हैं। उनका एकमात्र मकसद छात्रों से भारी रकम वसूलना होता है।

छात्रों की मांग है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी को JNU और BHU की तर्ज पर अपने कैंपस के भीतर हॉस्टल क्षमता बढ़ानी चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले छात्रों को निजी पीजी माफिया के रहमोकरम पर न छोड़ना पड़े।