सीतापुर में साढ़े 7 करोड़ की लागत से बने नए न्यायालय भवन में उद्घाटन से पहले दरारें दिखने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे। PWD ने पुट्टी उखड़ने की बात कही।
नए भवन में आईं दरारें
- Published: 25 Aug 2026, 08:39 PM IST
- Last Updated: 25 Aug 2026, 08:39 PM IST
अनिल उपाध्याय- सीतापुर। लंबे इंतजार के बाद सीतापुर के व्यवहार न्यायालय को नया भवन मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन उद्घाटन से पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से बने नए न्यायालय भवन में दरारें दिखाई देने लगी हैं। भवन में आई दरारों और पहले सामने आ चुकी सीपेज की समस्या ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम चलता में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत से व्यवहार न्यायालय के लिए नया भवन बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग की देखरेख में करीब दो से ढाई साल पहले भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन तकनीकी खामियों और अन्य कार्य अधूरे रहने के कारण अब तक भवन का हैंडओवर नहीं हो सका है।
निर्माण के बाद सामने आई सीपेज और दरार की समस्या
नए भवन के निर्माण के बाद ही कई हिस्सों में सीपेज और दरारें आने की शिकायत सामने आई थी। मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने भी न्यायालय और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी देकर सुधार की मांग की थी। इसके बाद विभाग की ओर से मरम्मत कार्य कराया गया, जिससे सीपेज की समस्या तो काफी हद तक दूर हो गई, लेकिन भवन के अलग-अलग हिस्सों में दरारें अब भी दिखाई दे रही हैं। आरोप है कि इन दरारों को पुट्टी और मरम्मत के जरिए छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर उभरकर सामने आ गईं।
सीतापुर में साढ़े 7 करोड़ की लागत से बने नए न्यायालय भवन में उद्घाटन से पहले दरारें दिखने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे। PWD ने पुट्टी उखड़ने की बात कही। pic.twitter.com/LgjOdZdpHw
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दशकों पुराने भवन में संचालित हो रहा न्यायालय
व्यवहार न्यायालय वर्तमान में जनपद पंचायत के लिए दशकों पहले बनाए गए भवन में संचालित हो रहा है। लंबे समय से नए भवन की जरूरत महसूस की जा रही थी। नया भवन तैयार होने के बाद उम्मीद थी कि न्यायालय को पुराने भवन से राहत मिलेगी, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण अब तक नए भवन का उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। अधिवक्ताओं के मुताबिक नए भवन में निर्माण कार्य के अलावा ऑनलाइन सिस्टम व्यवस्था के लिए जरूरी तैयारियां भी पूरी नहीं की गई थीं। इन कमियों की जानकारी न्यायालय को दी गई थी और सुधार की मांग की गई थी।
अधिवक्ता बोले- निर्माण में लापरवाही की शिकायतें मिली थीं
अधिवक्ता देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि नए भवन में काम अधूरे होने के साथ ही निर्माण के दौरान कथित लापरवाही के कारण सीपेज और दरार की समस्या सामने आई थी। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं ने इस संबंध में न्यायालय को अवगत कराया था। उनके अनुसार विभाग द्वारा मरम्मत के बाद सीपेज की समस्या दूर हुई, लेकिन कुछ स्थानों पर दरारें अभी भी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने बताया कि नए भवन के उद्घाटन को लेकर हाईकोर्ट से प्रोटोकॉल जारी होता है और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही उद्घाटन किया जाएगा।
PWD ने दरार से किया इनकार, पुट्टी उखड़ने की बताई वजह
वहीं लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता अमित टोप्पो ने भवन में दरार होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि भवन का निर्माण करीब दो से ढाई साल पहले पूरा हुआ था, लेकिन हैंडओवर नहीं होने के कारण इतने समय तक नियमित देखरेख नहीं हो सकी। उप अभियंता के मुताबिक जो दरार जैसी दिखाई दे रही है, वह पुट्टी उखड़ने के कारण है। उन्होंने कहा कि भवन के रखरखाव की जिम्मेदारी फिलहाल पांच साल तक ठेकेदार की है। यदि कहीं वास्तविक दरार या अन्य समस्या सामने आती है तो उसकी मरम्मत कराई जाएगी।
उद्घाटन से पहले गुणवत्ता जांच की मांग
करोड़ों रुपये की लागत से बने न्यायालय भवन में उद्घाटन से पहले ही सामने आई दरारों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों और अधिवक्ताओं की नजर इस बात पर है कि भवन को न्यायालय को सौंपने से पहले इसकी तकनीकी जांच और कमियों का स्थायी समाधान कराया जाता है या नहीं।
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