Published: Wednesday, October 21, 2026, 15:24 [IST]
NEET UG 2026: डॉक्टर बनने का सपना देखने की कोई उम्र नहीं होती। कुछ लोग कम उम्र में ही अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं, तो कुछ जिंदगी के कई दशक गुजर जाने के बाद भी कोशिश करना नहीं छोड़ते। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहने वाले 70 वर्षीय अशोक बहार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। परिवार में कई डॉक्टर होने के बावजूद उनका अपना सपना अब तक अधूरा है।
इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी। लेकिन इस बार उनका मामला परीक्षा के नतीजों से आगे बढ़कर अदालत तक पहुंच गया। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले को लेकर एक ऐसी मांग उठाई, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट को फैसला सुनाना पड़ा। अदालत ने उनकी अपील खारिज करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में फैसला लेने का अधिकार किसके पास है।
हाईकोर्ट ने खारिज की अपील
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमबीबीएस और अन्य मेडिकल कोर्सों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली अपील खारिज कर दी है। यह अपील 70 वर्षीय नीट यूजी अभ्यर्थी अशोक बहार ने दाखिल की थी, जो 2026 की परीक्षा में शामिल हुए थे।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने एकल न्यायाधीश के पुराने फैसले को सही माना। अदालत ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था करना सरकार या कानून बनाने वाली संस्था का काम है, अदालत का नहीं।
पीठ के मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर वरिष्ठ नागरिकों को मेडिकल दाखिले में विशेष आरक्षण दिया जा सके।
अशोक बहार ने क्या मांग की थी?
अशोक बहार चाहते थे कि नीट यूजी के जरिए एमबीबीएस और अन्य मेडिकल कोर्सों में प्रवेश लेने वाले पात्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएं या विशेष कोटा बनाया जाए। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर उचित नीतिगत फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। साथ ही 23 जून 2026 को दिए गए उनके आवेदन पर तय समय में कारण सहित निर्णय लेने का आदेश भी जारी किया जाए।
हालांकि, एकल न्यायाधीश ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद बहार ने उसी हाईकोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ में अपील की।
कोर्ट ने क्यों नहीं दिया आदेश?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की मांग किसी ऐसे कानूनी अधिकार पर आधारित नहीं है, जिसे अदालत लागू करा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामले में परमादेश जारी नहीं किया जा सकता। परमादेश एक न्यायिक आदेश होता है, जिसके जरिए किसी सरकारी अधिकारी या संस्था को उसका कानूनी कर्तव्य पूरा करने का निर्देश दिया जाता है।
पीठ ने कहा कि अशोक बहार चाहें तो यह मामला सरकार या विधायिका के सामने उठा सकते हैं। मेडिकल कोर्सों में प्रवेश के लिए आयु सीमा तय करना भी संबंधित सरकार या कानून बनाने वाली संस्था के अधिकार क्षेत्र में आता है। एकल न्यायाधीश के फैसले में कोई गलती नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी।
NTA ने अदालत में क्या कहा?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की ओर से अदालत को बताया गया कि उसका काम केवल प्रवेश परीक्षा आयोजित करना है। एनटीए के वकील ने कहा कि एजेंसी मेडिकल दाखिले से जुड़े मौजूदा कानूनों और सरकारी नीतियों के अनुसार काम करती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग आरक्षण की व्यवस्था फिलहाल मौजूद नहीं है।
इसलिए ऐसा कोई फैसला एनटीए अपने स्तर पर नहीं ले सकती। यह सरकार या संबंधित विधायिका का विषय है।
उम्र की सीमा हटने का दिया तर्क
अशोक बहार के वकील पंकज धीर सिंह राणा ने अदालत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नीट यूजी में अधिकतम आयु सीमा हटा दी गई थी। उनका तर्क था कि जब वरिष्ठ नागरिकों को मेडिकल शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलता है, तो उनके लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था पर भी विचार होना चाहिए।
उन्होंने दिव्यांगों, स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व सैनिकों और खिलाड़ियों को मिलने वाले आरक्षण या विशेष लाभों का उदाहरण दिया। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं होने को मनमाना और अनुचित बताया।
हालांकि, अदालत ने साफ किया कि प्रवेश परीक्षा देने की अनुमति और आरक्षण पाने का कानूनी अधिकार दो अलग बातें हैं।
परीक्षा रद्द होने से लगा था झटका
अशोक बहार उन करीब 22 लाख अभ्यर्थियों में शामिल थे, जिन्होंने 3 मई 2026 को नीट यूजी परीक्षा दी थी। उन्होंने लखनऊ के परीक्षा केंद्र पर पेपर दिया था। 70 साल की उम्र में मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने की उनकी तस्वीरें और कहानी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही थीं। दी गई जानकारी के अनुसार, पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने की खबर से वह बेहद निराश हुए थे। इसका असर उनकी सेहत पर भी पड़ा था।
मां चाहती थीं कि बेटा डॉक्टर बने
अशोक बहार के डॉक्टर बनने के सपने के पीछे उनके परिवार की बड़ी भूमिका है। उनके पिता लखनऊ के सम्मानित चिकित्सक थे और मां सावित्री देवी चाहती थीं कि बेटा भी डॉक्टर बने। साल 1990 में उनकी मां का निधन हो गया, लेकिन उनका सपना अशोक बहार के मन में बना रहा।
उनकी पत्नी डॉ. मंजू बहार स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। अशोक के मुताबिक, पत्नी के प्रोत्साहन से उन्होंने दोबारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनके परिवार में करीब 20 डॉक्टर हैं। इनमें कई विदेशों में भी चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं।
1974 में दी थी पहली मेडिकल परीक्षा
अशोक बहार ने पहली बार 1974 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी। उस समय यह परीक्षा सीपीएमटी के नाम से होती थी। हालांकि, वह इसे पास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने 2023 में दोबारा प्रयास किया, लेकिन परीक्षा केंद्र दूर होने के कारण वह देर से पहुंचे और उन्हें परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली। इसके तीन साल बाद 2026 में उन्होंने एक बार फिर नीट यूजी परीक्षा में हिस्सा लिया।
कई डिग्रियां, अलग-अलग क्षेत्रों में काम
अशोक बहार ने लखनऊ विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान और रसायन विज्ञान में बीएससी की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने कंप्यूटर एप्लीकेशन में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा, कानून की डिग्री और एमबीए भी किया है।
उन्होंने कई दशक तक इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मार्केटिंग हेड के रूप में काम किया। बाद में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद विदेश मंत्रालय के साथ सलाहकार के रूप में काम किया। वह एक स्थानीय अखबार के संपादक भी रहे और पार्ट-टाइम वकालत भी की।
डॉक्टर बनकर आश्रम के लोगों की सेवा करना चाहते हैं
अशोक बहार लखनऊ के पास अपने गांव गहरू में 'दिव्य प्रेम आश्रम' का निर्माण कर रहे हैं। उनकी इच्छा है कि मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह आश्रम में रहने वाले लोगों का इलाज करें और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएं। वह केवल एमबीबीएस तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि हेपेटोलॉजी यानी लिवर से जुड़ी बीमारियों में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं।
उनका मानना है कि फैटी लिवर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसलिए वह इस क्षेत्र में पढ़ाई करके जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहते हैं। 70 साल की उम्र में भी अशोक बहार अपने इस सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष आरक्षण की उनकी मांग को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है।