विदेशी मुद्रा भंडार ने रचा इतिहास: 729 अरब डॉलर के पार, अब रुपये और बाजार पर क्या होगा असर?

Published: Saturday, August 29, 2026, 11:04 [IST]

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार, 28 अगस्त को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) 729.33 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि यह नया रिकॉर्ड सोमवार, 31 अगस्त को FCNR(B) स्वैप विंडो बंद होने से ठीक पहले बना है। माना जा रहा है कि इन दोनों बड़े घटनाक्रमों से आने वाले दिनों में रुपये की चाल और घरेलू बाजारों की दिशा तय होगी।

RBI की स्वैप सुविधा के जरिए देश में डॉलर का भारी प्रवाह हुआ, जिससे महज एक हफ्ते के भीतर विदेशी मुद्रा भंडार में 12.42 अरब डॉलर का तगड़ा उछाल आया। FCNR(B), एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और विदेशी मुद्रा कर्ज के जरिए 21 अगस्त तक कुल मिलाकर लगभग 73 अरब डॉलर की इनवर्ड फंडिंग आ चुकी थी। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक को बुकिंग की आखिरी तारीख 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त करनी पड़ी।

India Forex Reserves Hit All-Time High of $729 Billion: Impact of FCNR(B) Window Closing in 2026

FCNR(B) विंडो: आखिरी तारीख, योग्यता और लॉक-इन अवधि

इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए बैंकों को सोमवार, 31 अगस्त तक नए FCNR(B) डिपॉजिट बुक करने होंगे। इसमें नॉन-रेसिडेंट इंडियन (NRI), ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया (OCI) और पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन (PIO) निवेश कर सकते हैं। यह ऑफर केवल 3 से 5 साल की अवधि (टेन्योर) वाले डिपॉजिट पर लागू है, जिसमें अभी बुक किए गए पैसों पर एक साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा। योग्य गैर-निवासियों के लिए भारत में इस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री है। वहीं, बैंक 11 सितंबर तक इन पैसों को स्वैप कर सकेंगे।

बैंकों की आखिरी समय की FCNR(B) डॉलर ब्याज दरें

बैंक3-साल की USD दर5-साल की USD दर
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक7.40%7.10%
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया6.50%6.60%
साउथ इंडियन बैंक6.50–7.00%6.50–7.00%

ये ब्याज दरें अगस्त के अंत की हैं। अलग-अलग बैंकों की शर्तें और बकेट नियम लागू हो सकते हैं।

रुपये, महंगाई और बॉन्ड यील्ड पर क्या पड़ेगा असर?

विंडो जल्दी बंद होने के ऐलान के बाद, भारी इनफ्लो के बावजूद रुपये में थोड़ी नरमी देखने को मिली। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड घटकर 6.85–6.88 प्रतिशत के आसपास आ गई। भारत और अमेरिका के बीच यील्ड का अंतर 210–230 बेसिस प्वाइंट के करीब रहने से 'कैरी ट्रेड' का सपोर्ट कुछ कमजोर बना हुआ है। इसके बावजूद, यह ऐतिहासिक विदेशी मुद्रा भंडार आयातित महंगाई (Imported Inflation) के खतरे को कम करेगा। साथ ही, क्रूड ऑयल या डॉलर में अचानक तेजी आने पर बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई को जरूरी सहारा भी देगा।

31 अगस्त के बाद क्या बदलेगा और क्या रहेगा पहले जैसा?

मंगलवार यानी 1 सितंबर से नए FCNR(B) डिपॉजिट पर RBI की स्वैप सुविधा नहीं मिलेगी। हालांकि, बैंक अपनी सामान्य FCNR(B) स्कीमें जारी रख सकते हैं। जो डिपॉजिट पहले से बुक हो चुके हैं, उन्हें मैच्योरिटी तक तय ब्याज दर और सभी सुरक्षा लाभ मिलते रहेंगे। अब 2029 से 2031 के दौरान जब ये डिपॉजिट मैच्योर होंगे, तब बाजार की नजरें कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और बड़े पैमाने पर होने वाले रिडेम्पशन पर रहेंगी। कुल मिलाकर, आने वाले समय में रुपये की चाल किसी हेडलाइन के बजाय आर्थिक आंकड़ों (डेटा) पर निर्भर करेगी।

Story first published: Saturday, August 29, 2026, 11:04 [IST]

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