पटना36 मिनट पहले

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बिहार में संगठित अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) अब केवल पटना मुख्यालय से नहीं, बल्कि आपके अपने शहर और रेंज स्तर से माफियाओं पर प्रहार करेगी। बिहार पुलिस के सभी 12 रेंजों में ईओयू के विशेष सेल बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, राज्य के हर जिले में एक-एक ईओयू इंस्पेक्टर की तैनाती कर दी गई है। इसका सीधा मकसद पेपर लीक, जमीन माफिया और संगठित गिरोह चलाने वाले कुख्यातों की पहचान कर उनके आर्थिक साम्राज्य को जमींदोज करना है।

ईओयू के एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन के अनुसार, काली कमाई से अकूत संपत्ति बनाने वाले 256 कुख्यातों और माफियाओं पर पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव ईडी को भेजा गया है। अकेले इस साल 12 जून से अब तक 10 बड़े अपराधियों के खिलाफ प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इन 10 माफियाओं के पास 108 करोड़ 93 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा मिला है।

ईओयू ने हाल ही में दो बड़ी कार्रवाई कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। नालंदा के जमीन माफिया संतोष डाउन के 25 ठिकानों पर छापेमारी कर 27 लाख कैश और 75 जमीन के डीड बरामद किए गए। वहीं, जमुई के गुड्डू यादव के पास से 34.19 लाख नकद और 131 जमीन के डीड के साथ अंचल कार्यालय के सरकारी रजिस्टर भी मिले।

बॉर्डर पर ‘इकोनॉमिक’ पहरेदारी

बिहार की नेपाल और बंगाल से सटी सीमाओं पर तस्करी और आर्थिक अपराध रोकने के लिए 8 जिलों के 14 पुलिस अनुमंडलों में बॉर्डर इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट का गठन किया गया है। साथ ही, नकली सामान बेचने वालों पर लगाम कसने के लिए बौद्धिक संपदा अपराध शाखा भी बनाई गई है।

इन 12 रेंजों में होंगे ईओयू के सेल

रेंज : सेंट्रल, मगध, शाहाबाद, तिरहुत, चंपारण, सारण, मिथिला, कोशी, पूर्णिया, पूर्वी, मुंगेर व बेगूसराय। नया सेल: अवैध संपत्ति की नीलामी और जब्ती के लिए अलग सेल का गठन।

बड़ी कार्रवाई : पेपर लीक माफिया संजीव मुखिया और गोल्ड रॉबरी किंग सुबोध सिंह की संपत्ति जब्त करने की तैयारी।

माफिया की कमर तोड़ने के लिए ‘मनी’ पर चोट जरूरी

बिहार पुलिस अब यह समझ चुकी है कि अपराधियों को जेल भेजने से गिरोह खत्म नहीं होते। गिरोह तब खत्म होता है जब उसकी फंडिंग रुकती है। ईओयू का रेंज स्तर पर विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर सेल होने से जमीन माफिया और फर्जीवाड़ा करने वालों की जानकारी तुरंत मिलेगी। यह विकेंद्रीकरण जांच में तेजी लाएगा और माफियाओं की बेनामी संपत्ति को जब्त कर उन्हें आर्थिक रूप से पंगु बना देगा।

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