नई दिल्ली(उत्तम हिन्दू न्यूज)- मौत के बाद इंसान के साथ क्या होता है और क्या चेतना शरीर खत्म होने के बाद भी मौजूद रहती है? यह सवाल सदियों से रहस्य बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं से लेकर विज्ञान तक, इस विषय पर अलग-अलग विचार मिलते हैं। इसी बीच अमेरिका की 33 वर्षीय महिला ब्रिआना लैफर्टी (Brianna Lafferty) के कथित Near-Death Experience (NDE) ने इस सवाल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
ब्रिआना के मुताबिक, एक मेडिकल घटना के दौरान वह करीब 8 मिनट तक क्लिनिकली डेड स्थिति में थीं। उनका दावा है कि उस दौरान उन्हें अपने शरीर से अलग होने और आसपास हो रही घटनाओं का अनुभव हुआ। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि उनके अनुभव को वैज्ञानिक रूप से मौत के बाद जीवन का प्रमाण नहीं माना गया है।
शरीर से अलग होने जैसा महसूस हुआ
ब्रिआना के अनुसार, उस दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनकी चेतना उनके शरीर से अलग हो गई हो। उन्होंने दावा किया कि वह अपने शरीर को बाहर से देख पा रही थीं। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें किसी तरह का दर्द महसूस नहीं हुआ और इसके बजाय एक अजीब तरह की शांति का अनुभव हुआ।
उन्होंने अपने अनुभव को डरावना होने के बजाय शांत और अलग तरह का बताया।
सुनाई दी एक रहस्यमयी आवाज
ब्रिआना का कहना है कि शरीर से अलग होने जैसा अनुभव होने के बाद उन्हें एक आवाज सुनाई दी। उनके मुताबिक, आवाज ने उनसे पूछा कि क्या वह तैयार हैं? इसके बाद उन्हें अंधेरे जैसी अनुभूति हुई।
उनका दावा है कि इस अनुभव के बाद मौत को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। उन्होंने महसूस किया कि इंसान का अस्तित्व केवल उसके शरीर तक सीमित नहीं हो सकता।
ब्रिआना का दावा- ‘मौत अंत नहीं है’
ब्रिआना के मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें यह मानने पर मजबूर किया कि मौत शायद वह अंतिम पड़ाव नहीं है, जैसा आमतौर पर माना जाता है। उनका दावा है कि शरीर के खत्म होने के बाद भी चेतना किसी रूप में मौजूद रह सकती है।
हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत अनुभव और विश्वास है। इसे वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर स्थापित नहीं किया गया है।
क्या होता है Near-Death Experience?
ऐसे अनुभवों को मेडिकल और रिसर्च की भाषा में Near-Death Experience (NDE) कहा जाता है। कुछ लोग बताते हैं कि गंभीर स्थिति में पहुंचने पर उन्हें तेज रोशनी दिखाई दी, शरीर से बाहर निकलने जैसा एहसास हुआ, किसी आवाज या व्यक्ति की मौजूदगी महसूस हुई या बेहद शांति का अनुभव हुआ।
वहीं विज्ञान के स्तर पर अभी तक ऐसा कोई निर्णायक प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि मृत्यु के बाद आत्मा या चेतना किसी दूसरी दुनिया में चली जाती है। इसलिए ब्रिआना की कहानी को उनके व्यक्तिगत NDE अनुभव के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि मौत के बाद जीवन का प्रमाण मानकर।
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