कोलकाता, 13 अगस्त (भाष) पश्चिम बंगाल सरकार ने पीएम पोषण योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन से वंचित 8,375 स्कूलों को रसोई गैस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक को 3,000 रुपये देने का फैसला किया है। इसके अलावा सरकार ने भोजन सामग्री की लागत और रसोइया-सहायकों के मासिक मानदेय में भी वृद्धि की है। बृहस्पतिवार को इस संबंध में आदेश जारी किया गया।
इस कदम से इन स्कूलों को लकड़ी से खाना पकाने की व्यवस्था से एलपीजी आधारित रसोई व्यवस्था की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।
पीएम पोषण वार्षिक कार्य योजना एवं बजट 2026-27 के तहत राज्य की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में योजना के दायरे में शामिल 81,012 स्कूलों में से 72,637 स्कूलों में एलपीजी कनेक्शन था, जबकि 8,375 स्कूलों में खाना पकाने के लिए अब भी लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा था।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इसके माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि लकड़ी पर निर्भर स्कूलों को एलपीजी सुविधा उपलब्ध कराई जाए और बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बनी रहे। खाना पकाने और भोजन से जुड़े प्रावधानों में वृद्धि इसी प्रयास का हिस्सा है।’’
राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश में कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त और प्रायोजित स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक (बाल वाटिका) और प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन की सामग्री लागत एक अगस्त से बढ़ाकर 6.78 रुपये से 10 रुपये प्रति छात्र प्रतिदिन कर दी गई है।
इसके अलावा रसोइया-सहायकों के अतिरिक्त मासिक मानदेय को दोगुना कर 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है। यह वृद्धि अधिकतम 10 महीने की अवधि के लिए होगी। इसके बाद अगस्त से प्रत्येक रसोइया-सहायक को प्रति माह कुल 3,000 रुपये का मानदेय मिलेगा।
पीएम पोषण के आंकड़ों के अनुसार, लकड़ी से खाना पकाने वाले स्कूलों की संख्या सबसे अधिक बांकुरा जिले में है। जिले में कुल 3,639 स्कूल ऐसे हैं, जहां रसोई गैस नहीं है। इसके बाद झाड़ग्राम में 2,217 और पश्चिम बर्द्धमान में 1,007 स्कूल हैं।
उत्तर दिनाजपुर में 613 स्कूल लकड़ी पर निर्भर थे, जबकि उत्तर 24 परगना में 366 और मुर्शिदाबाद में ऐसे स्कूलों की संख्या 310 थी। जलपाईगुड़ी में 217 और पूर्व मेदिनीपुर में छह स्कूल लकड़ी से खाना बना रहे थे।
वहीं, अलीपुरद्वार, बीरभूम, पूर्व बर्द्धमान, कूचबिहार, दक्षिण दिनाजपुर, हुगली, हावड़ा, मालदा, नदिया, पुरुलिया, सिलीगुड़ी, पश्चिम बर्द्धमान, दक्षिण 24 परगना और कलिम्पोंग समेत कई जिलों में आंकड़ों में शामिल सभी स्कूलों में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध था।
अधिकारी ने कहा कि भोजन सामग्री की बढ़ी हुई लागत से बच्चों को नियमित रूप से गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने में अतिरिक्त सहायता मिलेगी, जबकि रसोइया-सहायकों के बढ़े हुए मानदेय से स्कूल स्तर पर योजना को लागू करने में उनकी भूमिका को मान्यता मिलेगी।
पीएम पोषण योजना को पहले मध्याह्न भोजन योजना के नाम से जाना जाता था। इसके तहत स्कूली बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
भाषा रमण अजय
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