दक्षिण अमेरिकी मछली बनी सोलापुर के मछुआरों का सिरदर्द! फिश टैंक से उजनी डैम पहुंची ‘सकर’ फिश

  • Written By:

    अनिल सिंह

Updated On: Jul 31, 2026 | 04:24 PM IST

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सार

Ujani Dam Sucker Fish: महाराष्ट्र में सोलापुर के उजनी बांध में फिश टैंक से पहुंची दक्षिण अमेरिकी सकर मछली बनी भारी संकट का कारण। 36 टन निकाली गई, मछुआरों के जाल हो रहे बर्बाद।

Solapur Ujani Dam Sucker Fish Terror

सकर मछली बनी सोलापुर में मछुआरों की परेशानी का सबब (फोटो क्रेडिट-X)

विस्तार

Solapur Ujani Dam Sucker Fish Terror: यदि आपके पास घर में एक्वेरियम या फिश टैंक है और उसमें पाली गई विदेशी मछली आकार में काफी बड़ी हो गई है, तो उसे किसी नजदीकी नदी या बांध में प्रवाहित करने से पहले सौ बार सोचें। आपकी यह लापरवाही स्थानीय पर्यावरण और मछुआरों के जीवन के लिए भयंकर तबाही का कारण बन सकती है।

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में स्थित उजनी बांध (Ujani Dam) में दक्षिण अमेरिका की मूल निवासी सकर मछली (Sucker Fish) इस समय भारी संकट का पर्याय बन चुकी है। बांध से अब तक 36 टन सकर मछलियां निकाली जा चुकी हैं, फिर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

फिश टैंक से उजनी डैम तक का सफर और बढ़ता जैविक संकट

सकर मछली भारत की मूल निवासी नहीं है। अक्सर लोग घर के फिश टैंक की मछलियों के बड़े हो जाने पर उन्हें उजनी बांध जैसे जलाशयों में छोड़ देते हैं। उचित नियंत्रण और योजना के अभाव में इस प्रजाति का प्रजनन पूरे क्षेत्र के जल निकायों में तेजी से फैल गया है।

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बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और विशेषज्ञों के अनुसार, यह आक्रामक प्रजाति स्थानीय मछलियों के अंडों और उनके बच्चों (जीरा) को निगल जाती है। इसके परिणामस्वरूप बांध में व्यावसायिक रूप से उपयोगी स्थानीय मछलियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। जिससे मछुआरे प्रभावित हो रहे हैं।

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खाने योग्य नहीं, कांटेदार शरीर से जालों को भारी नुकसान

सकर मछली खाने योग्य बिल्कुल नहीं होती, इसका उपयोग केवल औद्योगिक तेल निकालने या मछली का चारा बनाने में ही किया जा सकता है। स्थानीय मछुआरों के लिए यह मछली दोहरी मुसीबत बनकर उभरी है। जब यह भारी मछली जाल में फंसती है, तो अपने मजबूत तंतुओं से जाल को फाड़कर भाग जाती है, जिससे मछुआरों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके शरीर पर बेहद नुकीले कांटे होते हैं, जिससे जाल से निकालते वक्त मछुआरों के हाथ जख्मी हो जाते हैं। अध्ययनों के मुताबिक, यह मछली मिट्टी के किनारों और कृषि बांधों में गड्ढे व बिल बनाकर उनकी संरचना को भी नुकसान पहुंचा रही है।

मानसून में निष्कासन जरूरी; प्रशासन ने बनाया संग्रहण केंद्र

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विदेशी मछली मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर अंडे देती है, इसलिए इस अवधि में इसे पानी से बाहर निकालना बेहद आवश्यक है। मछुआरों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए और इस मछली के उचित निस्तारण के लिए प्रशासन ने एक विशेष संग्रहण केंद्र (Collection Center) स्थापित किया है। मछुआरों से अपील की गई है कि वे पकड़ी गई सकर मछलियों को पानी में वापस फेंकने के बजाय केंद्र में जमा कराएं ताकि योजनाबद्ध तरीके से इस संकट पर काबू पाया जा सके।

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