जिस नेता ने बचाई थी मनमोहन सरकार, बिग बी को दिवालिया होने से बचाया… क्यों राजनीतिक चाणक्य कहलाए अमर सिंह?
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Written By:
प्रिया जैस
Updated On: Aug 01, 2026 | 10:45 AM IST
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सार
Amar Singh Political Career: उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के महासचिव रहे अमर सिंह ने देश की राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक उन्होंने अपनी छाप छोड़ी।

अमर सिंह का पॉलिटिकल करियर (AI Generated Image)
विस्तार
Amar Singh Death Anniversary: एक ऐसी शख्सियत जो नहीं होते मनमोहन सिंह की सरकार 2008 में ही डूब जाती। जो नहीं होते को अमिताभ बच्चन कभी बिग बी नहीं बन बाते और आज टैक्सी चला रहे होते। जो नहीं होते तो आज समाजवादी पार्टी उभर कर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी में से एक नहीं बन आती। हम बात कर रहे है अमर सिंह की, जिन्हें राजनीतिक चाणक्य कहना गलत नहीं होगा। आइए हम आपको बताते है कि आखिर क्यों वे इतने खास थे और कैसे उन्होंने कई लोगों की जिंदगियों में बदलाव लाए।
राजनीतिक चाणक्य और रणनीतिकार
अमर सिंह को राजनीति का ‘चाणक्य’ और समाजवादी पार्टी का ‘सारथी’ माना जाता था। 2008 की न्यूक्लियर डील के दौरान अमर सिंह की भूमिका को उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, 2008 में, मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिरने की कगार पर थी क्योंकि वामपंथी पार्टियों ने अपना समर्थन वापस ले लिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि वे अमेरिका के साथ हुई न्यूक्लियर डील से नाखुश थे।
इस दौरान उन्होंने बेहतरीन तरीके से उनके बीच मध्यस्थता कराई। उन्होंने उन नेताओं के बीच एक अहम कड़ी का काम किया जिनके बीच बातचीत में रुकावटें थीं। खास तौर पर, उन्होंने एचडी देवेगौड़ा (जो अंग्रेजी बोलते थे) और मुलायम सिंह यादव (जो हिंदी बोलते थे) के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
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मुलायम सिंह यादव के साथ अमर सिंह (सौजन्य-IANS)
जब मुलायम सिंह शुरू में इस डील का समर्थन करने को लेकर हिचकिचा रहे थे, तो अमर सिंह उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलवाने ले गए। चूंकि मुलायम कलाम का बहुत सम्मान करते थे, इसलिए उन्होंने राष्ट्रपति की बात ध्यान से सुनी, जिसमें उन्होंने समझाया कि भारत के लिए न्यूक्लियर डील क्यों जरूरी थी। इस स्पष्टीकरण से मुलायम सहमत हो गए और उन्होंने UPA को समर्थन देने की घोषणा कर दी, जिससे सरकार बच गई।
मीडिया मैनेजमेंट और मनाने की कला में माहिर
वे मीडिया को मैनेज करने और लोगों को आसानी से मनाने की कला में भी बेहद माहिर थे। मुलायम सिंह ने एक बार कहा था कि अगर अमर सिंह न होते तो वे शायद जेल चले जाते। इतना ही नहीं, बाकी राजनीतिक दलों में भी उनका प्रभाव उतना ही रहा, जितना समाजवादी पार्टी में रहा। उन्होंने 2015 में मुलायम के पोते की शादी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी सुनिश्चित करने का श्रेय लिया। साथ ही, 2018 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हाई-लेवल इंडस्ट्रियल समिट में अहम भूमिका में देखा गया था।
राजनीति, बॉलीवुड और कॉर्पोरेट इंडिया के बीच एक कड़ी
अमर सिंह की खासियत थी कि वे बड़े बिजनेस, ग्रामीण राजनीति और मुंबई के ग्लैमर की दुनिया को एक साथ मिला सकते थे। समाजवादी पार्टी को मॉडर्न बनाने में अमर सिंह का बड़ा योगदान रहा। अमर सिंह उत्तर प्रदेश के एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। समाजवादी पार्टी के महासचिव और राज्यसभा के सदस्य थे। वे अपनी समाजवादी पार्टी में कॉर्पोरेट हस्तियों और फिल्म स्टार्स को लाते थे, जिससे पार्टी के वर्चस्व को बढ़ाने में मदद मिलती थी। जया बच्चन, जया प्रदा और संजय दत्त को सफलतापूर्वक पार्टी में शामिल करने का श्रेय उन्हें ही जाता है।

जया प्रदा के साथ अमर सिंह (सौजन्य-IANS)
फिल्म इंडस्ट्री को दिया बढ़ावा
अमर सिंह ने उत्तर प्रदेश में फिल्म स्टार्स और प्रोडक्शन को सुविधा देने के लिए फिल्म डेवलपमेंट काउंसिल की स्थापना की थी। जब फिल्म इंडस्ट्री को प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता था या उत्तर प्रदेश में शूटिंग के लिए मदद की जरूरत होती थी, तो वे सबसे पहले अमर सिंह से ही संपर्क करते थे। उन्होंने खुद 4 फिल्मों में अभिनय भी किया। अमर सिंह ने ‘हमारा दिल आपके पास है’, मलयालम फिल्म ‘बॉम्बे मित्तैयी’, ‘अ ट्रीप टू यूनिकॉर्न आयलैंड’, ‘जेडी’, जैसी फिल्मों में काम किया।
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अमिताभ बच्चन के साथ दोस्ती भी और दुश्मनी भी
अमर सिंह को ‘यारों का यार’ कहा जाता था, जो वफादारी के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे, लेकिन वे अपनी अपनी दुश्मनी के लिए भी उतने ही मशहूर थे। बच्चन परिवार से उनका रिश्ता मनमुटाव वाला रहा लेकिन वहीं थे जिन्होंने अमिताभ बच्चन को दिवालिया होने से बचाया था। 90 के दशक में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन बैंकरप्ट हो गए थे। उनकी प्रोडक्शन कंपनी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ABCL) बड़े घाटे में चल रही थी और उन पर 90 करोड़ का कर्जा हो गया था। इसके साथ ही उनके ऊपर 55 केस भी दाखिल थे। इस संकट से निकलने में अमर सिंह ने उनकी मदद की थी।
अमिताभ बच्चन ने एक बार कहा था कि अगर सिंह न होते तो वे ‘टैक्सी चला रहे होते’। हालांकि, जब अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ी और जया बच्चन उनके साथ नहीं गईं, तो उनके रिश्ते खराब हो गए। इसके बाद अमर सिंह ने सालों तक परिवार की सार्वजनिक रूप से आलोचना की, लेकिन मरने से पहले उन्होंने माफी भी मांगी।
Today is my father’s death anniversary & I got a message for the same from @SrBachchan ji. At this stage of life when I am fighting a battle of life & death I regret for my over reaction against Amit ji & family. God bless them all. — Amar Singh (@AmarSinghTweets) February 18, 2020
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, “आज मेरे पिता की पुण्यतिथि है और मुझे इसके लिए अमिताभ बच्चन जी का संदेश मिला। जिंदगी के इस पड़ाव पर, जब मैं जीवन-मरण की लड़ाई लड़ रहा हूं, मुझे अमित जी और उनके परिवार के प्रति अपनी तीखी प्रतिक्रिया पर अफसोस है। भगवान उन सभी का भला करे।” 1 अगस्त 2020 को सिंगापुर में किडनी फेल्योर से उनका निधन हो गया था।
