मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर 2018 से लंबित दो याचिकाओं का हाई कोर्ट ने गुरुवार को निराकरण कर दिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने दोनों याचिकाकर्ताओं को पहले खुद 25-25 फलदार पौधे लगान
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कोर्ट ने कहा कि पौधे लगाने के बाद याचिकाकर्ता प्रदेश में सड़क निर्माण समेत अन्य कार्यों के दौरान काटे गए पेड़ों और उनके बदले लगाए गए पौधों की वास्तविक संख्या का अध्ययन करें। ठोस आंकड़े जुटाने के बाद यदि जरूरत महसूस हो तो नई याचिका दायर की जा सकती है।
2018 में दायर हुई थीं दो याचिकाएं
जबलपुर निवासी विवेक कुमार शर्मा और नीमच निवासी आनंद मनावत ने 2018 में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि सड़क निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन उनके बदले पर्याप्त पौधे नहीं लगाए जा रहे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि हाई कोर्ट की तीन जजों की फुल बेंच ने 1 मार्च 2025 को 24 सितंबर 2015 की उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत 53 प्रजातियों के पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी।
नौ साल में कई हाईवे बने, लेकिन आंकड़े नहीं
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि दोनों याचिकाओं को दाखिल हुए करीब नौ वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में कई नए हाईवे और सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन याचिकाओं में यह स्पष्ट आंकड़ा नहीं है कि कितने पेड़ काटे गए और उनके बदले कितने पौधे लगाए गए।
कोर्ट ने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि पेड़ काटे जा रहे हैं और उनके बदले पौधे नहीं लगाए जा रहे। वास्तविक स्थिति जानने के लिए ठोस आंकड़ों के आधार पर अध्ययन जरूरी है।
इंदौर में 12 लाख पौधों का दिया उदाहरण
बेंच ने यह भी कहा कि यह मानना सही नहीं होगा कि प्रदेश में सिर्फ पेड़ों की कटाई हो रही है और नए पौधे नहीं लगाए जा रहे। कोर्ट ने इंदौर में 12 लाख पौधे लगाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष वहां बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया था और पिछले सप्ताह इसकी सालगिरह भी मनाई गई।
बेंच ने बताया कि जबलपुर नगर निगम ने इस वर्ष 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
अब आंकड़े जुटाकर नई याचिका का विकल्प
कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं को पहले 25-25 फलदार पौधे लगाने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही प्रदेश में पेड़ों की कटाई और पौधरोपण की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठोस आंकड़े मिलने के बाद जरूरत होने पर याचिकाकर्ता नए सिरे से अदालत का रुख कर सकते हैं।