भोपाल18 मिनट पहले

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भोपाल के पास जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) किले के चमन महल में रविवार को सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में मप्र समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मंजूरी दे दी गई। 350 साल पुराने इस किले में यह प्रदेश की पहली ऐसी कैबिनेट बैठक रही, जिसमें एक साथ 9 विधेयकों को मंजूरी दी गई। इन सभी को सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

इधर, यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए समान नियम लागू होंगे। बिल में सभी धर्मों में महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष तय की गई है।

अभी मुस्लिम पर्सनल लॉ की पारंपरिक व्याख्या के अनुसार कई मामलों में 15 वर्ष की उम्र के बाद लड़कियों को विवाह को मान्यता दी जाती है। यूसीसी लागू होने के बाद इस पर पूरी तरह अपराध हो जाएगा। यही नहीं, यूसीसी में प्रतिबंधित ब्लड रिलेशन के बीच विवाह की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि, यदि किसी समुदाय की मान्य परंपरा या रीति-रिवाज ऐसे विवाह की अनुमति देते हैं और वे सार्वजनिक नीति या नैतिकता के विरुद्ध नहीं हैं, तो उन्हें छूट दी जा सकेगी। प्रस्तावित विधेयक से मप्र के लगभग डेढ़ करोड़ आदिवासियों को पूरी तरह बाहर रखा गया है।

विधानसभा का मानसून सत्र आज से मध्यप्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। सत्र में सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समेत 15 विधेयक पेश करेगी। इनमें रविवार को कैबिनेट से मंजूरी पाने वाले 9 नए विधेयक भी शामिल हैं। इनमें यूसीसी, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, निजी विश्वविद्यालय, धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, श्रम शक्ति संहिता और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं।

सत्र के दौरान विपक्ष भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। विधायकों ने सरकार से जवाब मांगते हुए कुल 1756 सवाल लगाए हैं। इनमें 900 तारांकित और 856 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने 267 ध्यानाकर्षण सूचनाएं, 77 शून्यकाल सूचनाएं और 20 अशासकीय संकल्प दिए हैं।

विपक्ष ने 5 स्थगन प्रस्ताव भी दिए हैं, जिनमें 3 उज्जैन से जुड़े मुद्दों पर हैं। मौजूदा विधानसभा का यह 11वां सत्र है। सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की और विधानसभा परिसर का निरीक्षण किया।

राम-रहीम-रविंदर-रॉबिन, अब सभी के लिए एक कानून: सीएम मुख्यमंत्री यादव ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि मप्र में अब राम, रहीम, रविंदर और रॉबिन सभी के लिए एक समान कानून होंगे। सीएम ने स्पष्ट किया कि यूसीसी से किसी भी धर्म की धार्मिक परंपराओं, समारोह या रीति-रिवाज या पूजा पद्धति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ना ही किसी के मौलिक अधिकारों में कोई बदलाव आएगा।

कैलाश बोले- यूसीसी पर आदिवासी विधायकों से बात हुई? राकेश ने कहा- ये केंद्र के फॉर्मेट में

यूसीसी पर कैबिनेट की चर्चा के दौरान नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के बीच इस विषय पर आमने-सामने हो गए। विजयवर्गीय ने कहा कि महाराष्ट्र के कुछ समुदायों में निकट संबंधियों के बीच विवाह की परंपरा है। मध्यप्रदेश के कुछ आदिवासी समुदायों में भी ऐसी परंपराएं हैं। ऐसे में आदिवासी विधायकों से भी इस विषय पर राय ली जानी चाहिए।

इस पर राकेश सिंह ने कहा कि यूसीसी को लेकर केंद्र सरकार का एक स्वरूप पहले से मौजूद है और उसी के अनुरूप आगे बढ़ा जा रहा है। इस पर विजयवर्गीय ने कहा कि मैं आपसे नहीं पूछ रहा हूं। आप बीच में मत बोले। राकेश ने भी जवाब दिया- क्यों नहीं बोल सकता। मंत्रिपरिषद का सदस्य हूं।

कुछ मसले यदि अलग-अलग राज्यों में कॉमन हैं तो यह केंद्र का विषय हो सकता है। वही तय हो जाएगा। हालांकि इसके बाद विजयवर्गीय ने बाकी मंत्रियों से भी कहा कि यूसीसी पर जो भी पूछना अभी पूछ लो, बाद में पूछने का चक्कर नहीं होगा। कुछ मंत्रियों ने सवाल-जवाब भी किए।

राजपूत पूछने लगे सवाल तो सीएस ने समझाया

निजी विवि की स्थापना से जुड़े अधिनियम में संशोधन ​विधेयक पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई। इसमें 25 जमीन की बाध्यता को खत्म करने के मुद्दे पर खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि यह सही नहीं है। कम से कम कुछ जमीन की बाध्यता तो होनी ही चाहिए।

इस पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने साफ किया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों की मीटिंग में स्पष्ट कर चुके हैं ​कि निजी विवि की स्थापना में राज्य जमीन की बाध्यता को खत्म करें। वर्टिकल यूनिवर्सिटी बनने लगेगी को देश-दुनियां की जानी-मानी यूनिवर्सिटी राज्यों में आएंगी।

वर्टिकल ग्रोथ पर ध्यान देना है। राजपूत ने फिर कहा कि 1-2 एकड़ तो रखनी चाहिए। हालांकि इसके बाद भी बिल कैबिनेट से मंजूर हो गया।

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