क्या आप जानते हैं भारत की पहली देशभक्ति फिल्म कौन सी थी? 8 दशक पहले भारत स्वतंत्र हुआ था, लेकिन यह देशभक्ति फिल्म आजादी के पहले ही बन गई थी।
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कौन सी थी भारत की पहली देशभक्ति फिल्म?
HighLights
कौन सी थी भारत की पहली देशभक्ति फिल्म?
एक अंग्रेजी निर्देशक ने किया था फिल्म को डायरेक्ट
अशोक कुमार ने निभाई थी फिल्म में अहम भूमिका
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। इस साल हम अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत को आजाद हुए 8 दशक हो चुके हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत की पहली देशभक्ति फिल्म आजादी के कई सालों पहले ही बन चुकी थी। दिलचस्प बात ये है कि इस फिल्म का डायरेक्शन एक अंग्रेजी निर्देशक ने किया था।
क्या है फिल्म की कहानी?
इस फिल्म की कहानी गांवों के डेवलपमेंट और देशभक्ति पर आधारित है, इसमें लीड किरदार और उसकी पार्टनर लोकल गांव वालों की जिंदगी आसाना बनाने के लिए काम करते हैं। लेकिन वो जो भी काम करने जाते हैं, वहां के लोकल लालची जमींदार उनका विरोध करते हैं। लेकिन फिर भी वे अपने काम पर अडिग रहते हैं। तो क्या वह गांव वालों को उनका हक दिला पाएंगे? क्या जमींदार उनके आगे झुकेगा? यही फिल्म की कहानी है।
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90 साल पहले रिलीज हुई थी ये फिल्म
भारत की पहली देशभक्ति फिल्म 1936 में रिलीज की गई थी, इस फिल्म को जर्मन फिल्ममेकर फ्रांज ऑस्टेन (Franz Osten) ने डायरेक्ट किया था। वहीं बॉम्बे टॉकीज ने इसे प्रोड्यूस किया था। खास बात यह है कि इस फिल्म में अशोक कुमार और देविका रानी ने लीड रोल निभाया था। इस फिल्म का नाम है जन्मभूमि (Janmabhoomi)। जिसमें अशोक कुमार (Ashok Kumar) ने अजय और देविका रानी (Devika Rani) ने प्रोतिमा का किरदार निभाया है।
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इस फिल्म में देशभक्तिपूर्ण कोरस और ट्रैक शामिल हैं, जिनमें सबसे खास है 'जय जय जननी जन्मभूमि', जो देशभक्ति से भरा और प्रेरणादायक है। इस गीत के बोल जमुना स्वरूप कश्यप ने लिखे थे और सरस्वती देवी ने इसका संगीत दिया था। वहीं अशोक कुमार के साथ साथी कलाकारों ने इसे आवाज दी थी।
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आज भी बॉलीवुड में कई देशभक्ति फिल्में बनाई जाती हैं लेकिन बात जब शुरुआती फिल्मों की आती है तो यह और भी खास बात हो जाती है। खासकर 'जन्मभूमि' (1936) के लिए, क्योंकि यह स्वतंत्रता के पहले बनी फिल्म है और इसे एक अंग्रेज डायरेक्टर ने बनाया है। यह बॉम्बे टॉकीज द्वारा निर्मित एक देशभक्ति सामाजिक ड्रामा फिल्म है। इसे शुरुआती भारतीय सिनेमा की उन पहली फिल्मों में से एक माना जाता है, जो गांव के परिवेश पर आधारित और राष्ट्रवादी थीं।